नोटबंदी पर सिरसा में विचार गोष्ठी

Submitted by bk on बुध, 01/03/2017 - 16:00

12 फरवरी, 2017 को लोक राज संगठन की हरियाणा परिषद ने नोटबंदी के कुप्रभाव पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया। सभागृह के बाहर शहीद भगत सिंह और 1857 के ग़दरियों के बारे में एक प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी। विचार गोष्ठी में शिक्षकों, विद्यार्थियों, मज़दूरों, किसानों और व्यापारियों ने हिस्सा लिया।

Meeting on Noteban in Sirsaसभा की अध्यक्षता लोक राज संगठन के सर्व हिन्द परिषद के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा, कामरेड दुनिचन्द और पुरुषोत्तम शास्त्री ने की। मंच का संचालन कामरेड कुलदीप ने किया।

सभा की शुरुआत करते हुए कामरेड दुनिचन्द ने लोक राज संगठन का परिचय देते हुए बताया कि लोक राज संगठन लोगों के हाथों में सत्ता लाने के लिये प्रतिबद्ध है। यह संगठन पूरे देश में लोगों को सबल बनाने के लिये लोक राज समितियां बना रहा है, जो लोगों के लिये सत्ता का साधन बनेंगी।

नौजवान साथी कामरेड आकाश वर्मा ने विस्तार से समझाया कि नोटबंदी मज़दूरों, किसानों, ट्रांस्पोर्टरों, दुकानदारों पर आर्थिक हमला थी। मोदी ने कहा था कि इससे भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा, लेकिन नोटबंदी से कालाबाज़ारी को बढ़ावा मिला है। नोटबंदी से टाटा और अलीबाबा की भुगतान बैंक पेटीएम को फायदा हुआ है। उसके तुरंत बाद ही मुकेश अंबानी, बिरला और मित्तल को भुगतान बैंक के लाईसेंस दिये गये। पूंजीपति परजीवी वर्ग है, यह मजदूरों, किसानों का खून चूसकर जिन्दा रहता है। पूंजीपति वर्ग की सत्ता को ख़त्म करने के लिये हमें शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के बताये रास्ते पर चलकर क्रांति से इनका तख़्ता उलटना होगा।

जयवीर कांस्वा ने किसानों की दुर्दशा और नोटबंदी से हुए दुष्प्रभाव पर नज़़र डाली। पुरुषोत्तम शास्त्री ने शिक्षकों के अतिशोषण और शिक्षा के निजीकरण पर बात रखते हुए समझाया कि शासक वर्ग हर कदम बड़े पूंजीपतियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने के लिए उठाता हैं। नोटबंदी भी इसी इरादे से किया गया एक कदम था। हंसराज वर्मा ने कहा कि लोक राज संगठन की जिम्मेदारी है कि वह मज़दूरों, किसानों का मार्गदर्शन करे। हम सबको मिलकर इस प्लेटफार्म को और विशाल बनाना है। श्री रणजीत सिंह, श्री विजय कंडारा, श्री राज पाल और श्रीमती सावित्री देवी ने नोटबंदी की कड़़ी आलोचना की।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के वक्ता कामरेड संतोष कुमार ने अपने वक्तव्य में रखा कि सरकार कोई भी हो उसका काम है कि पूंजीपतियों को बेषुमार मुनाफ़ा पहुंचाना। नोटबंदी भी उसी में से एक कदम है। सरकार ने नोटबंदी को यह कह कर लागू किया था कि इससे आतंकवाद, काला धन और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। जबकि मोदी सरकार आतंकवाद के सरगना अमरीका के साथ रणनैतिक गठबंधन को और मजबूत कर रही है। भ्रष्टाचार तो पूंजीवादी व्यवस्था की नींव में है।

समाज में भ्रम फैलाया जाता है कि कांग्रेस पार्टी कम बुरी है और भाजपा ज्यादा बुरी है। ये पार्टियां सिर्फ पूंजीपतियों की मैंनेजर हैं, पूंजीपति समय-समय पर इनको बदलते रहते हैं। भाजपा निजीकरण और उदारीकरण की उसी नीति को लागू कर रही है जिसे कांग्रेस पार्टी ने शुरू किया था। पूंजीपति देश की संपत्ति को ही नहीं बल्कि देश को बेच रहे हैं। देश को बचाने का रास्ता सिर्फ ग़दरियों का ही रास्ता है। जो क्रांति का रास्ता है। देश की वर्तमान राज्य सत्ता को क्रांति के ज़रिये उखाड़कर फैंकना होगा और नये राज्य तंत्र का निर्माण करना होगा, जिसमें संप्रभुता लोगों के पास होगी।

सभा का समापन करते हुये लोक राज संगठन की सर्व हिन्द परिषद के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा ने कहा कि यह वर्ष 1917 की महान अक्तूबर क्रांति के सौ साल का वर्ष है। रूस के मज़दूरों ने पूंजीपतियों का तख़्ता उलटकर समाजवादी समाज बनाया था। हिन्दोस्तान के मज़दूरों और किसानों को भी क्रांति के ज़रिये समाजवादी देश बनाना होगा, तभी हमारे देश के लोगों की मुक्ति हो सकती है।

सभा के अंत में एक नौजवान साथी ने जोशभरी कविता पेश की जिसके बोल थे - “कुछ दबी हुई आवाज़ों में हुंकार ज़रूरी है... दिल में वीर भगत सिंह जैसी आग ज़रूरी है...”।

Tag:    विचार गोष्ठी    1857 के ग़दरियों    पेटीएम    Mar 1-15 2017    Struggle for Rights    2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)