बैंक मज़दूरों की जायज़ मांगों का समर्थन कीजिये! बकाया कर्ज न चुकाने वाले पूंजीपतियों से भुगतान कराया जाये!

Submitted by bk on शुक्र, 17/03/2017 - 01:16

28 फरवरी, 2017 को बैंक मज़दूरों की देशव्यापी हड़ताल :

Bank workers strike28 फरवरी, 2017 को पूरे हिन्दोस्तान में सभी प्रकार के बैंकों के 10 लाख से भी अधिक मज़दूरों ने हड़ताल की। हड़ताल का बुलावा यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स (यू.एफ.बी.यू.) ने दिया था जो कि बैंक कर्मचारियों की एक संयक्त यूनियन है। इस हड़ताल में वाणिज्यिक बैंकों, स्थानीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के मज़दूरों ने भाग लिया।
हड़ताल कर रहे बैंक मज़दूर मांग कर रहे हैं:

  • नोटबंदी के वक्त कर्मचारियों द्वारा किये गये अतिरिक्त घंटों के काम का मुआवजा दिया जाये;
  • न चुकाये गये कर्ज़ों की वसूली के लिये कड़े कदम उठाये जायें और बैंकों के उच्च अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाये;
  • जानबूझकर भुगतान न करने वालों के खिलाफ़ फौज़दारी कार्यवाई हो;
  • जल्दी ही वेतनों में संशोधन किये जायें; और
  • सभी पदों पर पर्याप्त भर्ती हो।

हड़ताल करने वाले मज़दूर सरकार द्वारा श्रम कानूनों में संशोधन और स्थायी काम को अनुबंध के आधार पर ठेके में कराने का भी विरोध कर रहे हैं।
बैंक मज़दूरों ने हड़ताल करने का फैसला तब लिया जब 21 फरवरी को बैंक प्रबंधन के साथ वार्ता विफल हो गई। मुख्य श्रम आयुक्त की अध्यक्षता में हुई समझौता सभा के दौरान बैंकों के प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाली इंडियन बैंक एसोसियेशन ने कर्मचारियों की मांगों को मानने से इनकार कर दिया।
केन्द्र सरकार, जो अधिकांश बैंकों की मालिक है और जो नोटबंदी के लिये जिम्मेदार है, उसने अफ़सरों व बैंकों के अन्य कर्मचारियों द्वारा लंबे-लंबे घंटों व बहुत ही तनावपूर्ण वातावरण में जबरदस्ती से काम करने के लिये मुआवजा देने का कोई वायदा नहीं किया है।
यह स्पष्ट है कि केन्द्र सरकार जानबूझकर बैंकों के ऋण न चुकाने वालों को सोच-समझकर सुरक्षा दे रही है। सबसे बड़े ऋण न चुकाने वालों के नामों की सूची सार्वजनिक करने की बैंक मज़दूरों की बार-बार उठाई गयी मांग को उसने लगातार नज़रंदाज किया है।  
बैंक मज़दूर मांग उठाते आये हैं कि बड़े कार्पोरेट ऋण लेने वालों और बैंक के उच्च प्रबंधन के बीच की सांठ-गांठ की जांच होनी चाहिये, कि उन बैंकों के मुख्य कार्यपाल व बोर्ड के अध्यक्ष को जिम्मेदार माना जाना चाहिये। बैंक ऋण न चुकाने वालों व अपराधी अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाई करने के बजाय, मोदी सरकार बैंक मज़दूरों पर मुद्रा रिसाव करने में सांठ-गांठ करने का दोष लगाती आयी है।
सार्वजनिक संपत्ति पर डाका डालने वाले बड़े पूंजीपतियों की रक्षा करने और इन अपराधों का बोझ बैंक मज़दूरों व आमतौर पर जनता पर डालने के लिये हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी केन्द्र सरकार की कड़ी निंदा करती है।
बैंक मज़दूरों की मांगें पूरी तरह से जायज़ हैं।
सभी पार्टियों तथा मज़दूरों, किसानों, महिलाओं व नौजवानों के सभी संगठनों को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी बुलावा देती है कि बैंक मज़दूरों की मांगों का पूरी तरह समर्थन करें।

Tag:    Mar 16-31 2017    Voice of the Party    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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