महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए, शोषण और अन्याय से मुक्त समाज के लिए प्रदर्शन किया

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/03/2017 - 18:11

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, 800 से अधिक महिलाओं, पुरुषों, नौजवानों और छात्रों ने 8 मार्च, 2017 को दिल्ली के राजीव चैक से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन किया। उनके जोशभरे नारे और गीत सड़कों में गूंजते रहे, उनकी मुट्ठियां बुलंद थीं, उनके हाथों में शानदार बैनर और प्लेकार्ड थे। राज्य द्वारा उन पर किये जा रहे सबतरफा हमलों का विरोध करते हुए, उन्होंने अपने अधिकारों के लिए, अन्याय और असमानता से मुक्त समाज के लिए संघर्ष को जारी रखने की आवाज़ बुलंद की।

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प्रदर्शनकारियों के उद्देश्य बैनरों पर लिखे हुए नारों से स्पष्ट हो रहे थे: “महिलाओं की मुक्ति समाज की मुक्ति का रास्ता!”, “शासन सत्ता अपने हाथ, जुल्म-अन्याय करें समाप्त!”, “महिलाओं पर हमला पूरे समाज पर हमला!”, “राजकीय आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा मुर्दाबाद!”, “महिलाओं की संघर्षरत एकता जिंदाबाद!”, प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुरुषों ने जोरदार नारों के साथ यह मांग की कि राज्य महिलाओं के अधिकारों और सम्मान, रोज़गार, खाद्य, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शौच व्यवस्था आदि के अधिकारों की रक्षा करे, राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने, यौन उत्पीड़न और हमलों से मुक्त जीने, काम करने और यातायात के अधिकारों की रक्षा करे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2017 के अवसर पर जारी एक संयुक्त पर्चे में समानता, सुरक्षा, सम्मान, रोज़गार सहित अन्य अधिकारों की मांग की गयी।

जंतर-मंतर पहुंचकर, प्रदर्शन ने एक विशाल जनसभा का रूप ले लिया। भागीदार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाषणों, गीतों, नाटकों, आदि के माध्यम से, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने विचारों को प्रस्तुत किया। नौजवान कार्यकर्ताओं ने बहुत ही भावुक तरीके से “मेरे लिए काम नहीं... “ गीत को गाकर सभा की शुरुआत की। उस गीत में बताया गया कि महिलाएं अपने परिवारों और समाज के लिये कड़ी मेहनत करती हैं, परन्तु खुद गरीबी और भुखमरी में पिसती रहती हैं।

वक्ताओं ने सभी को याद दिलाया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत पूंजीवादी शोषण के खिलाफ़ और शोषण-दमन से मुक्त समाज के लिए महिलाओं के संघर्ष के साथ हुयी थी। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों की रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर हमलों की निंदा की, विभिन्न राष्ट्रों, राष्ट्रीयताओं, समुदायों और इलाकों के लोगों की एकता को तोड़ने के राज्य के सुनियोजित प्रयासों की निंदा की। उन्होंने राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और आतंक को खत्म करने की मांग की। उन्होंने सेना और राज्य के सुरक्षा संस्थाओं द्वारा अत्याचार को रोकने, सैनिक शासन और ए.एफ.एस.पी.ए. को वापस लेने की मांग की। उन्होंने तरह-तरह के फासीवादी कानूनों के तहत, किसी सबूत के बिना, मुकदमा चलाये बिना, मनमानी से बेकसूरों की गिरफ्तारी और उन पर यातनाओं की निंदा की।

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सभा को संबोधित करने वाली अनेक महिलाओं ने इस राजनीतिक व्यवस्था की वैधता पर सवाल उठाया, जिसमें हमेशा सबसे बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इज़ारेदार पूंजीपतियों के हितों की ही हिफाज़त की जाती है, जबकि मेहनतकशों के बुनियादी अधिकारों तक को पैरों तले रौंदा जाता है।

इस दिन की एक विशिष्टता थी कि महिलाओं ने वर्तमान राजनीतिक प्रक्रिया पर बहादुरी से सवाल उठाये, जिसमें अधिकांश महिलाओं और पुरुषों को वोट डालने का अधिकार होने के बावजूद, वास्तव में कुछ भी ताक़त नहीं है। लोग न तो चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों का चयन कर सकते हैं, न ही चुने गए प्रतिनिधियों से जवाब मांग सकते हैं और न ही उन्हें वापस बुला सकते हैं। उन्होंने इस बात का पर्दाफाश किया कि कानूनों को शोषक पूंजीपतियों के हित में बनाया जाता है जबकि हम महिलाओं व पुरुषों को अपने हित में कानून बनवाने का कोई साधन नहीं है। उन्होंने आह्वान किया कि एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने के लिए एकजुट संघर्ष करें, जिसमें हम खुद अपने मालिक होंगे, जिसमें सभी के लिए समानता, सम्मान और अधिकारों की मान्यता होगी।

नाटकों के माध्यम से महिलाओं और पुरुषों ने उन तमाम पिछड़े रिवाज़ों और पूर्व-धारणाओं का विरोध किया, जो जवान महिलाओं पर तरह-तरह के बंधन डालती हैं तथा उनके अधिकारों और सम्मान पर हमलों को जायज़ ठहराती हैं। जोशभरे गीतों और नृत्यों से शोषण और अन्याय के खिलाफ़ संघर्ष में महिलाओं की एकता और आशावादिता को प्रकट किया गया।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 1-15 मार्च के पार्टी के अखबार मज़दूर एकता लहर की सैकड़ों प्रतियां बेचीं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लेख छपे थे। भागीदारों और उपस्थित लोगों ने बड़ी उत्सुकता के साथ अखबार को पढ़ा।

इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 27 से अधिक संगठनों ने मिलकर काम किया था। उनमें शामिल थे - नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वीमेन, आॅल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन, पुरोगामी महिला संगठन, ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन, वाई.डब्ल्यू.सी.ए., स्वास्तिक महिला समिति, स्त्री मुक्ति संगठन, सोसाइटी फॉर लेबर एंड डेवलपमेंट, समा, जागोरी, सहेली, विमेंस रिसोर्स सेंटर, सॉलिडेरिटी एंड एक्शन अगेंस्ट एच.आई.वी. इन्फेक्शन इन इंडिया (साथी), शेड्स ऑफ हैप्पीनेस फाउंडेशन, राही फाउंडेशन, निरंतर, नारी शक्ति मंच, संगत, ज्वाइंट विमेंस प्रोग्राम, तार्शी, फेमिनिज़्म इन इंडिया, कामकाजी महिला समन्वय समिति, डोमेस्टिक वर्कर्स यूनियन, दिल्ली सॉलिडेरिटी ग्रुप, नेशनल अलाइंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स, भोर फाउंडेशन, आज़ाद फाउंडेशन और एक्शन इंडिया।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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