तमिलनाडु में तेल की खोज के खिलाफ़ विरोध

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/03/2017 - 18:58

15 फरवरी को केन्द्र सरकार ने पूरे देश में 44 क्षेत्रों से तेल और गैस के विकास और निकासी के लिए अनुबंध किए जाने की घोषणा की।

जैसे ही यह घोषणा हुई, दक्षिणी तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले के नेदुवासल गांव में विरोध शुरू हो गया, जो कि अनुबंधित क्षेत्रों में आने वाला एक गांव है। तेल और गैस को निकालने के लिए एक निजी ठेकेदार को 10 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र किराये पर दिया गया है। नेदुवासल के लिए कर्नाटक स्थित जेम लैबोरेट्रीज़ के साथ अनुबंध किया गया है। हाल में किया गया यह अनुबंध हिन्दोस्तान की सरकार की अक्तूबर 2015 की सीमांत तेल क्षेत्र नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीमांत और छोटे तेल क्षेत्रों के शोषण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को आमंत्रित करना है।

पिछले कुछ सप्ताह में, आसपास के 30 गांवों की हजारों महिलाएं और पुरुष नेदुवासल गांव के लोगों के साथ विरोध में शामिल हुए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता, छात्र, इंजीनियरिंग स्नातक और अन्य अनेक लोग भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं।

नेदुवासल गांव भू-जल समृद्ध क्षेत्र में स्थित है। इस नदी-मुख इलाके की ज़मीन बहुत उपजाऊ है और इसकी एक स्वस्थ बहु-फसलीय कृषि अर्थव्यवस्था है। नेदुवासल के आसपास के 100 किमी के इलाके में ओ.एन.जी.सी. कंपनी 200 से अधिक तेल के कुंओं और कई अन्य प्रतिष्ठानों का संचालन करती है। नेदुवासल और आसपास के गांवों के लोग नागापट्टिनम, तिरुवरूर और तंजावुर जिलों में चल रहे तेल की खोज के नकारात्मक नतीजों से सीख ले चुके हैं। वे जानते हैं कि यह लोगों के जीवन और आजीविका के लिए गंभीर खतरों से भरा है।

लोग बढ़ते वायु और जल प्रदूषण, भू-जल में कमी, सांस की बीमारियों की बढ़ती घटनाओं, कृषि भूमि के प्रदूषण और क्षतिग्रस्त भूमि को बहाल करने में कमियों की वजह से बहुत चिंतित हैं। जिन किसानों ने मुआवजा पाने के लिए अर्जियां दी हैं वे अभी तक मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

कुछ खास घटनायें लोगों की याद में अभी भी ताजा हैं। 2008-09 में नेदुवासल के पास ओ.एन.जी.सी. द्वारा निर्मित एक खोजी कुएं से खुदाई के तीन महीने बाद भी गैस जलती रही। सात साल तक तेल के कचरे से भरे गड्ढे खुले पड़े थे। भारी बारिश के दौरान, कचरा तालाब से पड़ोस की भूमि पर बहता था। लोगों के खेतों के बीच भूमिगत पाइपलाइनों में कच्चे तेल का रिसाव हो गया और खड़ी फसलें बर्बाद हो गई। इससे सिंचाई के पानी की नहर और भू-जल भी प्रदूषित हुए हैं। तेल रिसाव से बर्बाद हुए खेतों पर कभी भी खेती नहीं हो सकी। नाकाम रहे तेल के कुओं को खुला छोड़ दिया गया जिसकी वजह से 2000 एकड़ उपजाऊ ज़मीन बंजर हो गयी और कांटेदार पौधों से भर गयी।

नेदुवासल और आसपास के गांवों के लोग अधिकारियों के इन झूठे वादों पर विश्वास नहीं कर रहे हैं कि वे तेल खोज कार्यक्रम से प्रभावित लोगों की देखभाल करेंगे।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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