भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ झारखण्ड में जबरदस्त विरोध

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/03/2017 - 19:03

झारखण्ड में भाजपा की सरकार हिन्दोस्तानी और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने राज्य की भूमि, श्रम और समृद्ध खनिज संपदा को लूटने के लिए आमंत्रित कर रही है और उसके लिये सारी रुकावटें हटा रही है। 16-17 फरवरी को मोमेंटम झारखण्ड इन्वेस्टर समिट-2017 के दौरान हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीपतियों के साथ 200 से भी अधिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एम.ओ.यू.) समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।

झारखण्ड सरकार ने ऐलान किया है कि उसके पास भावी निवेशकों के लिए 20 लाख एकड़ से भी अधिक ज़मीन उपलब्ध है। इससे यह साफ हो जाता है कि झारखण्ड सरकार राज्य की पूरी भूमि और प्राकृतिक संपदा को पूंजीपतियों के मुनाफ़ों की लालच को पूरा करने के लिए बेचने को तैयार है।

इससे पहले 23 नवम्बर, 2016 को राज्य सरकार ने ज़मीन संबंधी दो कानूनों में संशोधन किये थे - छोटा नागपुर टेनेंसी अधिनियम और संथाल परगना अधिनियम, जिससे कि जोतने के लायक ज़मीन को गैर-खेती के काम में इस्तेमाल किया जा सके। विपक्षी पार्टी के सदस्यों द्वारा उठाये गये सवालों को दरकिनार करते हुए इन संशोधनों को केवल तीन मिनट में ही पारित कर दिया गया। टेनेंसी अधिनियम के मूल दस्तावेज़ में कुछ ऐसे प्रावधान

थे जिसके तहत छोटे किसानों और जनजातिय समुदायों की खेती की ज़मीन के लिए कुछ विशेष सुरक्षा दी गयी थी।

छोटा नागपुर टेनेंसी अधिनियम में संशोधन से अब आदिवासियों की ज़मीन को सड़क, नहर, रेलवे, केबल ट्रांसमिशन, पाइपलाइन, और स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, पंचायत भवन, अस्पताल, आंगनवाड़ी”, और सरकारी कार्यों संबंधी परियोजनाओं के लिए सरकार के आदेश पर लिया जा सकता है। कानून में नए प्रावधानों से जनजातियांे की ज़मीन को किसी भी काम के लिए हथियाने के लिए सरकार के हाथों में असीमित शक्ति आ गयी है। संथाल परगना टेनेंसी अधिनियम का लक्ष्य है अधिग्रहण की गयी ज़मीन पर दिए जाने वाले मुआवज़े को कम करना।

गोड्डा जिले के लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया है कि अधिकांश ज़मीन पर खेती नहीं होती है। इस तरीके से लोगों द्वारा खेती के लिए इस्तेमाल की जा रही ज़मीन इज़ारेदार पूंजीपति अदानी समूह को दी जा चुकी है।

खूंटी और गोड्डा जिलों के गांवों के लोग सरकार के इन संशोधनों से सबसे अधिक प्रभावित हैं और सरकार द्वारा ज़मीन का अधिग्रहण किये जाने का जमकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने राज्य की राजधानी में प्रदर्शन किये और जब मुख्यमंत्री उनके जिले में आये, उस समय उनके सामने विशाल प्रदर्शन आयोजित किये।

गोड्डा जिले के कई गांवों में ग्राम प्रधानों की इजाज़त के बिना “अदानी” के किसी भी अधिकारी को अन्दर आने की इजाज़त नहीं दी जा रही है। 16-17 फरवरी में विदेशी कंपनियों द्वारा निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम के वक्त लोगों ने झारखण्ड आदिवासी संघर्ष मोर्चा के झंडे तले संगठित होकर राज्यपाल के घर के सामने जन पंचायत आयोजित की और प्रदर्शन किया।

Tag:    Mar 16-31 2017    Struggle for Rights    Economy     Popular Movements     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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