गुजरात जनसंहार के 15 वर्ष

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/03/2017 - 19:33

संपादक महोदय,

मजदूर एकता लहर के 16-28 फरवरी के अंक में प्रकाषित “गुजरात जनसंहार के 15 वर्ष” लेख पढ़ा। इस लेख में बहुत सारे तथ्यों और मुद्दों पर प्रकाष डाला गया है। सबसे निर्विवादित रूप से यह स्पष्ट होता है कि इस जनसंहार की तैयारी 2 महीने पहले से ही की गयी थी। गुंडों के हाथों में वोटर लिस्ट तथा मुसलमान लोगों के पते पहले से ही मौजूद थे। बिना किसी तहक़ीकात के, बिना यह जाने कि आग लगने की असली वजह क्या है, मुसलमानों को निषाना बनाया गया। जिस तरह राज्य सरकार ने बेझिझक कार सेवकों की लाषों की परेड गोधरा से अहमदाबाद ले जाने दी, इससे यही साबित होता है कि राज्य ने पूरी सक्रियता के साथ यह कत्लेआम आयोजित किया था।

गुजरात जनसंहार को इज़ारेदार पूंजीपतियों के मीडिया ने इसे महज “खुफ़िया एजेंसियों की नाकामयाबी” बताया, जबकि सच तो यह है कि इसे आयोजित करने में राज्य का पूरा-पूरा सहभाग था। राज्य और केन्द्र सरकारें चाहतीं तो इसे आसानी से रोक सकती थीं। दरअसल राज्य ही हमें सांप्रदायिक आधार पर बांटने का काम करता है। इस दंगे से पहले भी 1984 में सिखों का जनसंहार, 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद हिंदुओं और मुसलमानों का जनसंहार, ऐसे न जाने कितने सांप्रदायिक हिंसा के कांड आयोजित किये गये हैं। अगर गौर किया जाये तो 1947 के बाद सांप्रदायिक हिंसा के 54 बडे कांड हुए हैं। चाहे भाजपा का शासन हो या कांग्रेस का या फिर किसी और तथाकथित धर्म निरपेक्ष पार्टी का, सांप्रदायिक हिंसा आयोजित की गयी है। इस सांप्रदायिक हिंसा को आयोजित करने वाले बडे़-बडे़ गुनहगारों को कोई सज़ा नहीं हुई है। कितने सारे जांच आयोग और विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) बनाये गये हैं। इनकी रिपोर्टें एक तो देरी से आती हैं, और इनमें बडे़-बड़े आयोजकों के ख़िलाफ़ कोई सबूत पेश नहीं किये जाते, जबकि आम जनता तक को यह पता होता है कि असली गुनहगार कौन हैं। सरकारें भी इन रिपोर्टों के गुनहगारों को सज़ा दिलाने में कोई दिलचस्पी नही दिखातीं। आज तक केवल छोटे नेता या निचले दर्ज़े के अफ़सरों को ही सज़ाएं मिली हैं तथा मुख्य आयोजकों को ऊंचे पदों से पुरस्कृत किया गया है।

पिछले साल भर से हम “सांप्रदायिक हिंसा: समस्या तथा समाधान”, इस विषय पर प्रस्तुति पेश करते आये हैं। लगभग 35 से भी ज्यादा जगह हुई इस प्रस्तुति के बाद लोग हमें यही बताते हैं कि कैसे दंगों के वक्त पड़ोसियों ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर पीड़ितों की रक्षा की, उन्हें पनाह दी। जो लोग सेना में थे, ऐसे कुछ लोगों ने हमें बताया कि सेना की टुकडियां जनसंहार को रोकने के लिए तैयार थीं, लेकिन उन्हें बैरक में वापस लौटने के आदेश दिये गये। अंत में सभी ने माना कि इस सांप्रदायिक हिंसा की जड़ में इज़ारेदार पूंजीपतियों का राज्य ही है, लोग नहीं हैं।

नया राज्य और नयी राजनीतिक प्रकिया का निर्माण करना होगा, जिसमें सही मायने में संप्रभुता लोगों के हाथों में हो। सभी फैसले मानव केन्द्रित हों। ऐसा राज्य जो सांप्रदायिक हिंसा के मुख्य आयोजकों को सज़ा देगा। और यह “”सुनिश्चित करेगा कि सांप्रदायिक हिंसा कभी न हो। राज्य द्वारा सांप्रदायिक आधार पर लोगों का बंटवारा न हो। ऐसा राज्य जो हम सबकी खुशहाली सुनिश्चित करे। उस राज्य के निर्माण के लिये हमें मज़दूर, किसान, औरत, नौजवान और सभी उत्पीड़ित लोगों की क्रांतिकारी एकता बनानी होगी। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के इस एकता बनाने के आह्वान को मैं पूरी सहमति देता हूं और इसे बनाने के लिये मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा।

राजेश, मुम्बई

Tag:    Mar 16-31 2017    Letters to Editor    Communalism     2017   

पार्टी के दस्तावेज

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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सिर्फ मज़दूर वर्ग ही हिन्दोस्तान को बचा सकता है! हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, ३० अगस्त २०१२

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