मणिपुर में राजकीय आतंकवाद

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 16/03/2017 - 19:39

संपादक महोदय,

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के बयान से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो रहा है कि मणिपुर में हुए विधानसभा चनावों से लोगों की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है।

उत्तर-पूर्व और मणिपुर में केन्द्र सरकार अपनी लूट को कायम रखना चाहती है इसलिए वह सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (आफ्स्पा) को रद्द नहीं करेगी। यह लूट बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए चलायी जाती है। इस लूट को जारी रखने के लिए उत्तर-पूर्व को जबरन हिन्दोस्तान में रहने पर मजबूर किया जा रहा है और उन्हें आत्म-निर्धारण के अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। राजकीय आतंकवाद का इस्तेमाल करते हुए उत्तर-पूर्व के लोगों के जीवन के अधिकार का भी बार-बार उल्लंघन किया जा रहा है।

बयान में यह स्पष्ट दिखता है कि मणिपुर और उत्तर-पूर्व के लोग सेना और राज्य के दमनकारी कदमों के खिलाफ़ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। बड़ी बहादुरी के साथ आफ्स्पा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और अपने जीवन के अधिकार तथा आत्म-निर्धारण के अधिकार की मांग कर रहे हैं। मणिपुर के लोगों का संघर्ष राष्ट्र-विरोधी नहीं है, बल्कि सरकार की लोगों के बीच फूट डालने वाली नीतियां, सेना का राज और लोगों पर चलाया जा रहा राजकीय आतंकवाद राष्ट्र-विरोधी हैं। यह बयान बखूबी दिखाता है कि मणिपुर में विद्रोह की वजह वहां पर चलाया जा रहा सेना का बर्बर राज है, और इसके विपरीत यह विद्रोह तब तक चलता रहेगा जब तक मणिपुर और पूरे उत्तर-पूर्व से आफ्स्पा को पूरी तरह से हटाया नहीं जाता।

आज हमारे मणिपुरी भाई-बहनों की मांगों को हमारे समर्थन की ज़रूरत है। मैं अपने उत्तर-पूर्व के भाई-बहनों के आगे बढ़ते हुए प्रगतिशील संघर्ष को अपना पूरा समर्थन देता हूँ।

आज उत्तर-पूर्व में ही नहीं बल्कि देश के प्रत्येक हिस्से में लोगों के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। हमारे देश की सभी समस्याओं के लिए एक ही दुश्मन जिम्मेदार है - इज़ारेदार पूंजीवादी घरानों की अगुवाई में हिन्दोस्तान का शासक वर्ग। हमें इन इज़ारेदार पूंजीवादी घरानों के खिलाफ़ एकजुट होकर संघर्ष करने और इस मौजूदा व्यवस्था को उखाड़ फेंककर, उसके स्थान पर एक नयी समाजवादी व्यवस्था का निर्माण करने की ज़रूरत है।

शिरीन, मुंबई

Tag:    Mar 16-31 2017    Letters to Editor    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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