बड़े सरमायदारों के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए “जनादेश” पाने में चुनावों का इस्तेमाल

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 13 मार्च, 2017

पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा में विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किये जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा को बड़े पैमाने पर सीटें मिली हैं और मणिपुर व गोवा में वह बहुमत के लिए जुगाड़ करने में लगी हुई है। पंजाब में कांग्रेस को बहुमत मिला है। मोटे तौर पर इस चुनाव से भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। इससे राज्य सभा में उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़ाने में मदद मिलेगी और देशभर में ज्यादा राज्य सरकारें भी उसकी अगुवाई में होंगी।

विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के लिए ये चुनाव ऐसे वक्त पर हुए हैं जब भाजपा सरकार के दो सालों से चले आ रहे हमलों के खिलाफ़ देशभर में मज़दूरों की यूनियनों का संघर्ष तेज़ हो रहा था। पूरे देश में किसानों में आक्रोश बढ़ रहा था। लोगों के विरोध के चलते भूमि अधिग्रहण बिल संसद में अटका पड़ा था। जनतांत्रिक अधिकारों, मानव अधिकारों और राष्ट्रीय अधिकारों पर खुल्लम-खुल्ला हो रहे हमलों के खिलाफ़ विश्वविद्यालयों के छात्रों, महिला संगठनों और अन्य लोगों के बीच विरोध बढ़ रहा था। यहां तक कि पूंजीपतियों के कुछ तबकों में भी संयम खोने और असंतोष बढ़ने के आसार नज़र आ रहे थे।

हाल ही में हुए चुनावों का इस्तेमाल देश और विदेश के इज़ारेदार पूंजीपति एक जनादेश” बनाने के लिए कर रहे हैं, ताकि उदारीकरण और निजीकरण के रास्ते भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को और भी तेज़ी के साथ अमल में लाया जा सके। इन चुनावों का इस्तेमाल इज़ारेदार पूंजीपति अपनी क्रूर हुकूमशाही को और अधिक मजबूत करने, तथा उसे कानूनी जामा पहनाकर लोगों पर थोपने के लिए कर रहे हैं।

देश के 150 इज़ारेदार पूंजीपति घरानों की अगुवाई में तमाम शोषक हमारे देश का अजेंडा बनाते हैं और यह फैसला करते हैं कि चुनाव के नतीजे क्या होंगे। जिस व्यवस्था को दुनिया का सबसे बड़ा जनतंत्र कहा जाता है, एक ऐसी व्यवस्था है जहां मुट्ठीभर इज़ारेदार पूंजीपति देश का अजेंडा तय करते हैं। वे सब मिलकर एक ऐसी पार्टी को चुनते हैं जो सबसे बढ़िया ढंग से उनके हितों की सेवा करेगी और साथ ही अगले पांच साल तक लोगों को सबसे असरदार तरीके से बेवकूफ बना सकेगी।

जब उन्होंने किसी पार्टी को सत्ता में लाने का फैसला कर लिया तो फिर, ये इज़ारेदार पूंजीपति अपनी पसंद का नतीजा हासिल करने के लिए अपनी विशाल संपत्ति और तमाम हथकंडों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ पार्टियों को कमजोर करने के लिए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये जाते हैं। चुनी हुई राजनीतिक पार्टी की जीत का रास्ता खोलने के लिए अन्य पार्टियों में फूट डाली जाती है।

सांप्रदायिकता और जातिगत आधार पर लामबंध करना, धनबल, मीडिया पर अपने नियंत्रण और अनेक फूट डालने के हथकंडों के अलावा, बड़े सरमायदारों के पास इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है, जिसके सहारे वे बड़ी आसानी से चुनाव के नतीजों के साथ खिलवाड़ करते हैं और अपनी पसंदीदा पार्टी के लिए व्यापक जनादेश” पैदा करते हैं।

11 मार्च, 2017 को आये, चुनावों के नतीजों से यह साफ नज़र आ रहा है कि देश के सबसे बड़े और प्रभावशाली पूंजीपति चाहते हैं कि देश के स्तर पर भाजपा को मजबूत किया जाये ताकि वह और भी असरदार तरीके से उनके मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी अजेंडे को आगे बढ़ा सके। जो कोई भी इस अजेंडे का विरोध करेगा उसे राष्ट्र-विरोधी करार देकर, उस पर फासीवादी दमन किया जायेगा तथा फौजीकरण और अंतर-साम्राज्यवादी जंग में हिस्सा लेकर इस अजेंडे को आगे बढ़ाया जायेगा।

बड़े सरमायदारों के सरगना इन चुनावों के नतीजों पर खुलेआम जश्न मना रहे हैं और मोदी को देश का नया सम्राट” कहकर उसका गुणगान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी दावा कर रहे हैं कि 2022 में जब देश की राजनीतिक आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी उस समय तक एक नया हिन्दोस्तान” बनाने का रास्ता इन चुनावों के ज़रिये खुल गया है।

नए हिन्दोस्तान के साइनबोर्ड तले हमारे देश में बड़े सरमायदार तमाम मेहनतकश लोगों के अधिकारों और खुशहाली को कुचलते हुए, दुनियाभर के साम्राज्यवादियों के खेमे में जुड़ने की अपनी योजना को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं। सरमायदारों का यह कार्यक्रम है - देश के सस्ती और बेहद उत्पादक तथा जवान श्रमशक्ति के अधिकतम शोषण के आधार पर मुट्ठीभर लोगों के हाथों में अपार दौलत को समेटना। सरमायदारों का कार्यक्रम है - किसानों की व्यापक पैमाने पर और अधिक लूट, प्राकृतिक संसाधनों की लूट-खसोट, फौजीकरण और राज्य की तिजोरी को लूटना।

हमारे देश के सरमायदार देश को बेहद खतरनाक रास्ते पर ले जा रहे हैं।

सरमायदारों का यह दावा है कि इस चुनाव के ज़रिये लोगों ने मोदी को सरमायदारों के मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए “जनादेश” दिया है, यह एक बड़ा फरेब है। इस महा झूठ को चुनौती देना बहुत ज़रूरी है। आज ज़रूरी है कि हम सब मज़दूर वर्ग की लड़ाकू एकता की हिफाज़त करें तथा उसे और मजबूत करें और सरमायदारों के हमलों की खिलाफ़ अपना संघर्ष और अधिक तेज़ करें।

हमारी सभी समस्याओं का - सांप्रदायिकता का, वर्ग शोषण का और जाति पर आधारित दमन का, बस एक ही इलाज है, और वह है बड़े सरमायदारों की हुकूमत को खत्म करना और मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करना। इस पूरी राजनीतिक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था की दिशा को बदलने की ज़रूरत है।

राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में लेकर हम मज़दूर और किसान अर्थव्यवस्था की कार्यदिशा को बदल देंगे तथा सभी प्रकार के शोषण को खत्म कर देंगे और सभी को इंसान का जीवन जीने के लिए आवश्यक ज़रूरतों को पूरा करेंगे।

आओ, हम सब मिलकर सरमायदारों के कार्यक्रम के खिलाफ़ अपने संघर्ष को इस नज़रिये के साथ तेज़ करें कि हम एक ऐसा राज्य स्थापित करेंगे जहां सभी के अधिकारों की गारंटी होगी। आओ, हम अपनी लड़ाकू एकता को और अधिक मजबूत करें और हुक्मरान वर्ग द्वारा हमारे बीच फूट डालने की चालों को नाकामयाब करें।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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