निजीकरण को तेज़ करने के कदम

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 17:20

मोदी सरकार ने आने वाले वित्त वर्ष 2017-18 में कोयले के व्यवसायिक खनन की योजना की घोषणा की है। इसके पहले चरण में चार कोयला खदानों की नीलामी की जाएगी और पूरे साल के दौरान 23 कोयला खदानों की नीलामी करने की योजना है। व्यवसायिक खनन करने वाली इन खदानों के मालिकों को अपना कोयला किसी भी ग्राहक को बेचने की छूट होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2015 में कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम को लाया गया, जिसके तहत सरकार निजी कंपनियों द्वारा कोयले के व्यवसायिक खनन की इजाज़त दे सकती है।

कोयले के व्यवसायिक खनन की इजाज़त देने का घोषित लक्ष्य है - “निजी कंपनियों द्वारा कोयले के व्यवसायिक खनन की इजाज़त देकर राज्य द्वारा चलायी जा रही कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) के लिए सरकार स्पर्धा खड़ी करना चाहती है”। पिछले कई वर्षों से सरकार सी.आई.एल. के मज़दूरों की “कम उत्पादकता” के बारे में प्रचार करती आ रही है। व्यवसायिक कोयला खनन में सी.आई.एल. को “स्पर्धाकारी” बनाने के नाम पर मज़दूरों की संख्या को कम किया जायेगा।

निजीकरण को लगातार जारी रखते हुए मोदी सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की जो भी कंपनियां लगातार तीन वर्षों से मुनाफे़ कमा रही हैं उन्हें शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जायेगा। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को शेयर बाज़ार की सूची में शामिल करने के लिए उन कंपनियों में सरकार की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचा जायेगा या फिर नए शेयर जारी किये जायेंगे और निजी कंपनियों को बेचे जायेंगे, जिससे सरकार की हिस्सेदारी अधिक से अधिक 75 प्रतिशत तक ही सीमित हो जाये। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों का पहला हिस्सा दिवाली के दौरान बेचने के लिए निकाला जायेगा।

निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपाम) ने सभी सरकारी विभागों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं कि वे उन कंपनियों की पहचान करें जिनके कुछ हिस्से का निजीकरण किया जा सकता है।

1 फरवरी को पेश किये गए केन्द्रीय बजट में की गयी घोषणाओं के मद्देनज़र भारतीय रेल ने एक सलाहकार नियुक्त किया है जो यह बताएगा कि किस तरह से रेलवे के तहत आने वाली तीन सार्वजनिक कंपनियों - आई.आर.सी.टी.सी., आई.आर.एफ.सी. और इरकॉन को शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जा सकता है। 

केन्द्रीय बजट में अगले वर्ष के लिए 72,500 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें शामिल हैं, पांच सार्वजनिक बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी को शेयर बाज़ार में बेचना, और कुछ कंपनियों की रणनीतिक बिक्री करना। रणनीतिक बिक्री का मतलब है कंपनी का नियंत्रण पूरी तरह से उसे खरीदने वाले के हाथों में दे देना, यानी की पूरा निजीकरण।

इसके साथ-साथ सरकार ने राज्य द्वारा चलायी जा रही तेल कंपनियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सहायक कंपनियों का विलयन करना भी शुरू कर दिया है।

Tag:    व्यवसायिक खनन    सी.आई.एल.    कम उत्पादकता    Apr 1-15 2017    Struggle for Rights    Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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