सरकारी कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 17:34

16 मार्च, 2017 को पूरे देश में केन्द्र सरकार के 12 लाख से अधिक कर्मचारियों ने हड़ताल की। हड़ताल में सरकार के विभिन्न विभागों - डाक, आयकर, आर.एम.एस., सी.जी.डब्ल्यू.बी., पोस्टल अकाउंट, सिविल अकाउंट, सर्वे ऑफ इंडिया, जनगणना विभाग सहित, कई और विभागों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। ‘कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्पलाईज़ एंड वर्कर्स’ के बैनर तले बीस सूत्रीय मांगपत्र के समर्थन में यह हड़ताल की गई थी। यह हड़ताल देश के प्रत्येक हिस्से में सफलतापूर्वक हुई।

मांग पत्र में दी गई मुख्य मांगें हैं :

  1. कैजुअल, कांट्रेक्ट, पार्ट टाइम, कान्टीजेंट एवं दैनिक वेतन भोगी मज़दूरों को नियमित करना। सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतन निर्धारित करना।
  2. नई पेंशन स्कीम को समाप्त करके पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करना।
  3. ग्रामीण डाक सेवकों को डाक विभाग में सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर वेतन, पेंशन व भत्ते आदि विभागीय कर्मचारियों की तरह देना।
  4. सरकारी कार्यों का निजीकरण एवं आउटसोर्सिंग बन्द करना।
  5. सभी खाली पदों को भरा जाये व नये पदों का सृजन किया जाये।
  6. सभी केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों को सेवा काल में पांच पदोन्नतियां दी जायें।
  7. सभी लोअर मण्डलीय लिपिकों को अपर मण्डलीय लिपिक बनाया जाये।
  8. ड्राइवरों सहित, विभिन्न कैडरों के सभी विभागों के समान पदों के लिये समान वेतन दिया जाये।
  9. सभी विभागों में प्रोडेक्टीविटी लिंक्ड बोनस दिया जाये।
  10. सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनर्स के लिए सभी रिकोग्नाईज़ प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा की सुविधा दी जाये।
  11. सातवें वेतन आयोग के वेतन के आधार पर ओवर टाईम तथा नाईट ड्यूटी एलाउंस की दरें निर्धारित की जायें।
  12. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान प्रत्येक पांच वर्ष में पुनः निर्धारित किये जायें।
  13. केन्द्र सरकार के सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार “समान काम का समान वेतन” दिया जाये।
Tag:    सरकारी कर्मचारियों    इम्पलाईज़ एंड वर्कर्स    Apr 1-15 2017    Struggle for Rights    Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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