महिला मुक्ति के लिए समाजवाद आवश्यक है!

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 17:58

पुरोगामी महिला संगठन ने “महिला मुक्ति के लिए समाजवाद आवश्यक है!”, इस विषय पर 19 मार्च, 2017 को महाराष्ट्र के ठाणे में एक सभा का आयोजन किया। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को मुख्य प्रस्तुति करने के लिए आमंत्रित किया गया। इस विषय ने नौजवान महिलाओं तथा पुरुषों में बहुत उत्सुकता पैदा की, क्योंकि उन्हें सोवियत संघ की सफलताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी बहुत बढ़िया समर्थन प्रकट किया। इस सभा में सिर्फ़ ठाणे जिले के अलग-अलग शहरों से ही नहीं, बल्कि मुम्बई, पुणे और गुजरात के वडोदरा से भी लोग आये थे!

Mumbai meeting प्रस्तुति ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की उपेक्षित अवस्था स्वाभाविक ही नहीं है, और न ही यह पुरुषों, मजहबों, जातियों, देशों, प्रांतों या नस्लों की वजह से है। इस असलियत का पर्दाफाश किया गया कि महिलाओं की समस्याओं की जड़ आज के पूंजीवादी समाज के शोषक स्वभाव में है, और उनकी मुक्ति के लिए लड़ना सिर्फ़ उनके हित में ही नहीं, बल्कि पुरुषों के हित में भी है। महिला मुक्ति का संघर्ष, मज़दूर वर्ग के समाजवाद के लिए संघर्ष का एक अविभाज्य तथा आवश्यक हिस्सा होना चाहिए।

प्रस्तुति के दूसरे हिस्से में सोवियत संघ के तेजस्वी समाजवादी काल का विवरण किया गया। उस काल में पूंजीवाद की सब बीमारियों का अंत किया गया था। शोषण, ग़रीबी, बेरोज़गारी तथा दमन का अंत किया गया था। समाज की प्रगति में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर महिलाओं का भी सहभाग सुनिश्चित करने के लिए, मज़दूर-मेहनतकशों के राज्य ने विषेष प्रबंध किये थे।

ऐसे देश की रक्षा करने में कौन पीछे रहेगा? 1941 में जब नाज़ियों ने उस देश पर बर्बर हमला किया, तब नाज़ियों के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए नौजवान और बूढ़े पुरुष ही नहीं बल्कि प्रत्येक उम्र की महिलाओं तथा बच्चों ने भी जान की परवाह नहीं की। पूर्व की सीमापर 8 लाख महिला सैनिकों को तैनात किया गया था, जबकि भर्ती होने की इच्छा प्रकट करने वाली महिलाओं की संख्या इससे कई गुना अधिक थी। सोवियत संघ की वायुसेना की 588वीं रेजिमेंट में सभी विमान चालक, संचालक और मेकैनिक, महिलाएं ही थीं। जिनकी उम्र लगभग 20 साल की थी। हर रात वे दुश्मन की सेना पर अनवरत बमबारी करती थीं। जर्मन सिपाही उनसे इतना डरते थे कि उन्होंने उनको “रात की चुड़ैल”, का नाम दिया था। 1942 से 1945 तक उन्होंने 24,000 से ज्यादा मिशनों में हिस्सा लिया और तकरीबन 23,000 टन बम बरसाये। प्रत्येक विमान चालिका ने 800 से ज्यादा मिषनों में हिस्सा लिया। मातृभूमि की रक्षा करते-करते उनमें से 30 शहीद हो गयीं और 23 को “हीरो ऑफ दी सोवियत यूनियन” का मेडल देकर सम्मानित किया गया। उनकी बहादुरी दर्शकों के सामने एक विडियो के द्वारा पेश की गयी।

जब सोवियत संघ का पतन हुआ और पूंजीवाद की पुनस्र्थापना हुई, तब पूंजीवाद की सभी बीमारियां फिर से आ गईं। तेजस्वी समाजवादी काल के दौरान सोवियत महिलाओं का क्या अनुभव था, इसके बारे में कई छोटे-छोटे विडियो क्लिप दिखाये गये। इसमें से एक में, एक बूढ़ी महिला, अपने सुंदर अतीत के बारे में तथा आज के रूस की घटिया परिस्थिति के बारे में बताती है! भयंकर ठंड का सामना करते हुए वह बाहर जाती है और अपने समकालीन व्यक्तियों के साथ प्रदर्षन करती है। अतीत को भूलने नहीं देने का निश्चित वे सब व्यक्त करते हैं। प्रस्तुति करने वाली एक साथी ने वहां के युवाओं से आह्वान किया कि उन्हें सोवियत संघ में समाजवाद की स्थापना के इतिहास को पढ़ना चाहिए तथा उससे पर्याप्त सीखें लेनी चाहिए।

लोक राज संगठन, कामगार एकता कमेटी तथा ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के नेताओं और कार्यकर्ताओं तथा उपस्थित अनेक व्यक्तियों ने अपनी बातें रखीं। मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता है, इस बात पर सभी सहमत थे।

Tag:    महिला मुक्ति    समाजवाद आवश्यक    सोवियत संघ    Apr 1-15 2017    Struggle for Rights    Popular Movements     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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