झारखण्ड में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ विरोध जारी

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 18:02

‘छोटा नागपुर टेनेंसी अधिनियम’ और ‘संथाल परगना अधिनियम’ में संशोधन के खिलाफ़, आदिवासी लोगों के संघर्ष का झारखण्ड आदिवासी संघर्ष मोर्चा निरंतर नेतृत्व कर रहा है। ये दोनो अधिनियम झारखण्ड में भूमि के इस्तेमाल को परिभाषित करते हैं। 5 मार्च को इस मोर्चे ने जंतर-मंतर पर एक रैली का आयोजन किया। इस रैली का मकसद था उद्योगों के लिए आदिवासियों की ज़मीनों के अधिग्रहण के खिलाफ़, लोगों के निरंतर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को सब लोगों के सामने लाना। 

इस दौरान, राज्य सरकार बड़े पूंजीपतियों को रियायती दरों पर ज़मीनें बेचने के अपने कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ा रही है। सार्वजनिक सुनवाई का ढोंग करते हुए, 4 मार्च को सरकार ने यह दावा किया कि प्रभावित गांववासियों ने अदानी समूह को बिजली संयंत्र बनाने के लिए ज़मीन देने पर अपनी सहमति व्यक्त कर दी है। 

विरोध में शामिल झारखण्ड आदिवासी संघर्ष मोर्चा और अन्य संगठनों के नेताओं ने मोदी सरकार को चेतावनी दी कि अगर निजी उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ लोगों के विरोध को केन्द्र सरकार लगातार नज़रंदाज़ करेगी तो वे लोग राज्य की आर्थिक नाकेबंदी का आयोजन करेंगे। 

Tag:    भूमि अधिग्रहण    छोटा नागपुर टेनेंसी अधिनियम    Apr 1-15 2017    Struggle for Rights    Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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