राजस्थान के रामगढ़ में शहीदी दिवस पर विचार गोष्ठी

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 18:18

23 मार्च, 2017 को शहीदी दिवस के अवसर पर राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की उप-तहसील रामगढ़ में ‘वर्तमान हिन्दोस्तान में भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता’, इस विषय पर विचार-गोष्ठी रखी गई। इसकी अध्यक्षता रामगढ़ के उपसरपंच श्री चेतराम, प्रधानाध्यापक श्री करणी सिंह व श्री रूलीचंद लकेसर ने की।

हरियाणा के जाखल में शहीदी दिवस मनाया गया

जन चेतना मंच, जाखल द्वारा जिला फतेहाबाद में 23 मार्च को शहीदी दिवस पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था संगवारी नाटक समूह का ‘उसने कहा था’ नाटक। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा जारी बयान, ‘शहीद भगत सिंह का आह्वान - हिन्दोस्तान की धरती पर क्रान्ति तथा समाजवाद के लिए काम करें!’ की प्रतियां बांटी गईं।

शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और हिन्दुस्तान ग़दर पार्टी के शहीदों पर एक प्रस्तुति दिखाई गयी। जगसीर सिंह जिद्धा गांव और गांव म्योंद से आये शहीद भगत सिंह मंच की तरफ से एक नाटक पेश किया गया।

विचार गोष्ठी में अपने विचार रखने वाले थे - नोहर डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर श्री रजनीकांत नोखवाल, लोक जन समिति के अध्यक्ष श्री मनीराम लकेसर, नर्सेज़ एसोसिएशन के श्री दलीप सुथार, रामगढ़ ग्राम विकास कमेटी के श्री कन्हैया लाल जैन, हिंद नौजवान एकता सभा के का. मनोज शर्मा, का. दिनेश स्वामी और का. सूरज भाम्भू, भगत सिंह विद्यालय के अध्यापक श्री रामनिवास पोखरनी, राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के श्री अशोक वर्मा व श्री भूप सहू, प्रधानाध्यापक श्री करणी सिंह और श्री प्रदीप भाम्भू और लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा।

गोष्ठी में वक्ताओं ने हिन्दोस्तानी लोगों के विभिन्न तबकों के सामने नाना प्रकार की समस्याओं पर चर्चा की। कई वक्ताओं ने कहा कि हमारे क्रान्तिकारी शहीदों के बारे में बच्चों को पाठ्यक्रम में नहीं बताया जाता है, क्योंकि हमारी शिक्षा प्रणाली पर बर्तानवी उपनिवेशवदियों का प्रभाव आज भी बहुत भारी है। अंग्रेज शासकों द्वारा स्थापित की गई ‘बांटो और राज करो’ की नीति, जिसके अनुसार अलग-अलग संप्रदायों के लोगों को बार-बार आपस में भिड़ाया जाता है और सांप्रदायिक कत्लेआम आयोजित किया जाता है, इसकी कड़ी निन्दा की गई। किसानों और ग्रामीण आबादी की दुर्दशा के उदाहरण देते हुये, अनेक वक्ताओं ने इस बात की कड़ी निन्दा की कि बड़े-बड़े पूंजीपतियों के लाखों-करोड़ों रुपयों के कर्जे़ माफ किये जाते हैं, परन्तु किसान कर्ज़े के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं या गांवों से पलायन करके, शहरों में जाकर पूंजीपतियों के शोषण का शिकार बनते हैं।

सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों, कंपाउंडरों, बेड, आदि की भारी कमी की आलोचना करते हुये, वक्ताओं ने बताया कि किस तरह स्वास्थ्य सेवा में निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, कर्मचारियों को ठेके पर रखा जा रहा है और लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। शिक्षा का निजीकरण करने की कोशिशों की निन्दा की गई। हमारे देश के बड़े-बड़े पूंजीपतियों की साम्राज्यवादी आकांक्षाओं पर भी चर्चा की गई। सभी वक्ताओं ने शहीद भगत सिंह और उनके साथियों की कुर्बानी का उदाहरण देते हुये आह्वान किया कि जिस हिन्दोस्तान का सपना उन्होंने देखा था, उसे साकार करने के लिये हमें आगे आना होगा।

लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा ने बहुत ही प्रेरणादायक ढंग से शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी जीवन और काम का विवरण दिया। हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन और बाद में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन के घोषित उद्देश्यों से यह साफ हो जाता है कि वे बर्तानवी उपनिवेशवादियों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के खिलाफ़ थे और एक ऐसा हिन्दोस्तान बनाना चाहते थे जो गोरे-काले शोषकों से मुक्त हो। उनका उद्देश्य आज भी पूरा नहीं हुआ है, यह कहते हुये उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि हमारे शहीदों के उस सपने को पूरा करने के लिये हमें आज संघर्ष में आगे आना होगा।

इंक़लाब ज़िन्दाबाद!, भगत सिंह अमर रहें!, समाजवाद ज़िन्दाबाद! साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!, के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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