मारुति के 31 मज़दूरों के खिलाफ़ अदालत के अन्यायपूर्ण निर्णय की कड़ी निंदा करें!

Submitted by cgpiadmin on शनि, 01/04/2017 - 18:51

उनकी तुरंत रिहाई के लिये एकजुट हों और संघर्ष करें!

18 मार्च को गुणगांव की एक जिला अदालत ने साफ तौर से मारुति-सुजुकी के एक प्रबंधक की हत्या के फर्ज़ी आरोप में 31 मज़दूरों को दोषी करार दिया है। इनमें से 13 मज़दूरों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। चार मज़दूरों को पांच साल कैद की सज़ा सुनाई गई है और बाकी 14 मज़दूरों पर जुर्माना लगाया गया है।

18 मार्च की शाम को गुणगांव मानेसर क्षेत्र में स्थित मारुति-सुजुकी के 6 विभिन्न कारखानों के 20,000 मज़दूरों ने 1 घंटे तक काम को ठप्प रखा। इस पूर्णतः अन्यायपूर्ण और मज़दूर-विरोधी निर्णय के खिलाफ़ प्रदर्षन भी किया। मारुति-सुजुकी के मज़दूरों ने यह ऐलान किया कि वे, अपने साथियों के लिये न्याय का अपना संघर्ष नहीं छोड़ेंगे क्योंकि उन्हें अन्यापूर्ण तरीके से सज़ा दी गई है। उन जुर्मों के लिए जो उन्होंने किये ही नहीं हैं। उनका “अपराध” सिर्फ इतना था कि वे मज़दूरों के अधिकारों की मांग जोर-शोर से कर रहे थे और काम की अमानवीय शर्तों को बदलना चाहते थे। 

यह याद रखना ज़रूरी है कि चार साल पहले एक कमरे में आग लगने से मानव संसाधन प्रबंधक की मौत हो गयी थी, उसी कमरे में मज़दूरों और कम्पनी अधिकारियों के बीच वार्ता चल रही थी। उसके तुरंत बाद 148 मज़दूरों को पुलिस ने उनके घरों से उठा लिया था। बचाव पक्ष के वकील द्वारा मामले की अंतिम बहस के दौरान यह बताया गया कि हत्या के आरोप के लिए पर्याप्त सबूत ही नहीं मिले। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि मज़दूरों ने ही आग लगाई थी, जिससे प्रबंधक की मौत हुई। अधिकतर मज़दूर, जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, वे घटना के दिन उस परिसर में मौजूद ही नहीं थे।

अधिकतर मज़दूर जिन पर हत्या के आरोप लगाये गये थे वे यूनियन के नेता और सक्रिय कार्यकर्ता हैं। अधिकतर मज़दूर जिन्हें मनमाने तरीके से घर से उठाया गया था उनकी सूची ठेकेदारों द्वारा दी गई थी। इतनी बड़ी संख्या में पकड़े गए मज़दूरों को तीन साल तक जमानत भी नहीं दी गई। हिरासत में लिये गये 117 लोगों के खिलाफ़ एक भी सबूत न होने की वजह से उन्हें बरी कर दिया गया। केन्द्र तथा राज्य सरकार, और अदालतों का वर्ग चरित्र स्पष्ट दिखता है कि वे पूंजीवादी शोषकों के हितों की रक्षा के, और मज़दूर वर्ग को अपने हित में संगठिन होने से वंचित रखने के अंग हैं।

हरियाणा के अधिकारियों ने गुणगांव-मानेसर क्षेत्र में पुलिस तथा अर्ध-सैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया है ताकि अदालत के फैसले के खिलाफ़ इस इलाके में विरोध-प्रदर्षन कर रहे मज़दूरों को रोका जा सके। 15 मार्च तक के लिये कर्फ्यू भी लगाया गया था। इसके बावजूद, प्रशासन मज़दूरों को अपने ऊपर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ़ गुस्से को प्रकट करने से नहीं रोक सका।

अदालत द्वारा सज़ा घोषित होने से पहले, अस्थायी कार्य समिति द्वारा एक अपील भी जारी की गई थी, जिसमें मारुति-सुजुकी यूनियन और गुणगांव के बाहर की यूनियनें भी शामिल थीं कि वे सज़ा के खिलाफ़ प्रदर्षन करेंगी। 18 मार्च को भारी संख्या में मज़दूर गुणगांव जिला अदालत के परिसर में मारुति-सुजुकी के मज़दूरों के लिए न्याय की मांग को लेकर लामबंध हुए। सज़ा काट रहे मज़दूरों के समर्थन में 19 मार्च को गुणगांव-मानेसर क्षेत्र के लगभग एक लाख से भी अधिक मज़दूरों ने दोपहर के भोजन को त्याग दिया।

16 मार्च को पूरे देश में मनाए जा रहे नेशनल एक्षन डे पर हरियाणा के गुणगांव-मानेसर-धारूहेड़ा-बावल औद्योगिक क्षेत्र की कई यूनियनों ने मारुति-सुजुकी के 20,000 मज़दूरों का साथ दिया। उन्होंने इसमें होन्डा मोटरसाइकिल और स्कूटर, हीरो मोटरकॉर्प, दायकिन एयर कंडिशनिंग, बेलासोनिका ऑटो कम्पोनेंटस, केनसाई नेरोलक पेंटस, रिको ऑटो वर्क्स, ओमेक्स ऑटो, बजाज मोटर्स, सनबीम, मुंजाल किरियू, सोना कोयो स्टीयरिंग, माइक्रोटेक, अहरेस्टी, प्रीकॉल, हेमा, नपीनो, सत्यम ऑटो, जी.के.एन., मेट्रो ऑरटेम, एफ.सी.सी., मुंजाल शोवा, टॉलब्रोस, परफेटी फ्रीगोग्लास, ओरगेनिका मेडिकल, ई.एन.के.वाई., यूनीप्रोडक्ट, ऑटोफिट, एनडयोरंस, असती, एम.के. ऑटो, हरसोरिया, अमूल, मोज़रबीयर और एल.जी. कम्पनी की यूनियनों को शामिल किया।

चेन्नई और कोयम्बतूर में जिन कंपनियों के मज़दूरों ने समर्थन में प्रदर्शन किया और अपनी एकजुटता प्रकट की उनमें शामिल हैं, डायमंड चेन, टी.आई. साइकिल्स, ट्यूब इंडिया प्रोडक्ट्स, ऑनलोड गियर्स इन्नोवेटर्स, साईमीरा, कैटरपिलर, सन्मीना, जे. इंजीनियरिंग, शांति गियर्स और सी.एन.एफ. ऑटोमोटिव आदि। इसी क्रम में लुधियाना, भिलाई और रूद्रपुर से भी विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टें प्राप्त हुई हैं।

अदालत के अन्यायपूर्ण फैसले और मारुति मज़दूरों को दी गयी बेहूदा सज़ाओं के ज़रिये बड़े पूंजीपति पूरे मज़दूर वर्ग को संदेश देना चाहते हैं - अपने अधिकारों के लिये लड़ने की हिम्मत मत करो, नहीं तो पूरी ज़िन्दगी जेलों में सड़ोगे!

मज़दूर वर्ग इसे न मानने के लिये दृढ़ है। देशभर के करोड़ों मज़दूरों ने अदालत के इस अन्यायपूर्ण फैसले का बहादुरी से एकताबद्ध होकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।

सभी 31 मारुति मज़दूरों को रिहा करो और उनके खिलाफ़ सभी आरोपों को वापस लो, नहीं तो तुम्हें पूरे हिन्दोस्तान के करोड़ों मज़दूरों के विद्रोह का सामना करना पड़ेगा! पूंजीपति वर्ग के आतंकी दांव-पेंचों के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग का यह उचित जवाब है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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