दुनियाभर में मज़दूर वर्ग और लोगों के बढ़ते विरोध

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:09

इस वर्ष मई दिवस ऐसे समय पर आ रहा है जब दुनियाभर में मज़दूर वर्ग के विरोध की संख्या और उसकी विशालता बढ़ती ही जा रही है। पूंजीवादी हमले के खिलाफ़ मज़दूर दृढ़ संकल्प के साथ लड़ रहे हैं और अधिक शक्तिशाली और संयुक्त संघर्ष कर रहे हैं। मेहनतकश लोगों पर थोपे गए “मितव्ययिता” के उपायों, सामाजिक सेवा में कटौती और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध हो रहे हैं।

Paris demo फ्रांस के शासकों द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव, जिन्हें वे मज़दूरों के ऊपर थोपना चाहते हैं, उसके खिलाफ़ मज़दूरों के विरोध, हड़ताल और मोर्चों की लम्बी कड़ी, मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध की सबसे बड़ी अभिव्यक्तियों में से एक है। मार्च 2016 से, लगातार चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों ने फ्रांस के विभिन्न हिस्सों को बुरी तरह से ठप्प कर दिया है। प्रदर्शनकारियों और मज़दूर यूनियनों ने प्रस्तावित श्रम कानून सुधारों के विरोध में आवाज़ उठाई है, जिसकी वजह से काम का सप्ताह 35 घंटे से बढ़कर 48 घंटे का हो जायेगा और मज़दूरों को नौकरी से निकालना मालिकों के लिए आसान हो जायेगा। बिना अनुबंध किये दो साल से अधिक काम करने वाले ड्राइवरों और मैकेनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन की अगुवाई में, मार्च 2017 में एक के बाद एक अलग-अलग विभागों के मज़दूर हड़ताल पर उतरे हैं।

ब्रिटेन में, बी.एम.डब्ल्यू. कंपनी के लगभग 3,500 मज़दूरों ने 31 मार्च को पेंशन के मुद्दे पर हड़ताल करने के पक्ष में बड़े पैमाने पर समर्थन किया। 2016 की तीसरी तिमाही में पिछले वर्ष की उसी अवधि की तुलना में कर-पूर्व मुनाफ़े में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज़ करने के बावजूद, बी.एम.डब्ल्यू. कंपनी ने अपनी दो निर्धारित-भत्ता पेंशन योजनाओं को बंद करने का अपना इरादा घोषित किया है। यह इसे “निर्धारित-अंश-दान पेंशन योजना” के साथ बदलने की योजना बना रहा है, जिससे मज़दूरों को “बाज़ार से आने वाले जोखिम” के अधीन कर दिया जायेगा, जिसका अर्थ है कि उनकी मेहनत की कमाई की बचत को पूंजीपतियों द्वारा लूटने के लिए खुला छोड़ दिया जायेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण, सुविधाओं में कटौती और महत्वपूर्ण अस्पतालों और स्वास्थ इकाइयों को बंद करने के खिलाफ़, 4 मार्च को लंदन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किये गये। पिछले एक दशक में इंग्लैंड और वेल्स में सरकार ने नेशनल हेल्थ सिस्टम को जिस दिशा में चलाया है, उसके विरोध में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवर और आम लोग मज़दूरों के प्रदर्शनों में जुड़ रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में और तेज़ हो गये हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य सेवा को एक हक़ बतौर पाने के लिए अपनी लड़ाई तेज़ करने की कसम खाई। उन्होंने यह भी कसम खाई कि इस बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के कार्यक्रम के लिए सरकार को जवाबदेह ठहरायेंगे।

22 मार्च को ए.टी. एंड टी. के 17,000 मज़दूरों ने हड़ताल की। कैलिफोर्निया और नेवादा में कंपनी द्वारा यूनियन की सहमति के बिना नौकरी की शर्तों में एक तरफा बदलाव किये जाने के खिलाफ़ टेलिफोन मज़दूर हड़ताल पर हैं। इन टेलिफोन मज़दूरों का प्रतिनिधित्व कम्युनिकेशन वर्कर्स ऑफ अमेरिका यूनियन के द्वारा किया जा रहा है। कैलिफोर्निया और नेवादा में ए.टी. एंड टी. के मज़दूरों के अनुबंध को खत्म हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है।

जर्मनी में हवाई अड्डे के मज़दूर 11 मार्च को 24 घंटे की हड़ताल पर चले गए और, उन्होंने दूसरी बार 14 मार्च को 24 घंटे की हड़ताल की, जिसे एक और दिन के लिये बढ़ा दिया गया। मज़दूर अपने काम की दयनीय परिस्थितियों का विरोध कर रहे हैं, जो पिछले 10 वर्षों में और भी बिगड़ गयी है। ग्राउंड स्टाफ को न्यूनतम वेतन से बस थोड़ा ज्यादा वेतन मिलता है। अधिकांश मज़दूर अल्पकालिक अनुबंध पर रखे जाते हैं, और उड़ान प्रबंधन के सबसे कठिन कार्यों में से कई कार्य अस्थायी मज़दूरों

द्वारा करवाये जाते हैं। इन अस्थायी मज़दूरों को और भी कम वेतन दिया जाता है। साथ ही, बर्लिन के हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या तेज़ी से बढ़ने के कारण इन मज़दूरों के कामकाज पर भारी दबाव बढ़ा है।

चिली और पेरू में दुनिया की दो सबसे बड़ी तांबा खदानों में करीब 1,500 खनन मज़दूर 10 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पिछले कुछ वर्षों में, इन दोनों देशों में खनन कंपनियों ने वैश्विक मांग और कीमतों में बढ़ोतरी से भारी मुनाफे़ कमाए हैं, लेकिन मज़दूरों को इसका बहुत कम या बिल्कुल न के बराबर लाभ मिला है। जैसा कि एक मज़दूर ने कहा “तांबे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मज़दूरों के वेतनों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है”।

ब्राजील में सरकार की मितव्ययिता अभियान के खिलाफ़ नवंबर 2016 के अंत में ही मज़दूरों के लड़ाकू विरोध प्रदर्शन फूट पड़े। 1930 के दशक के बाद ब्राजील अपनी सबसे बुरी आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है। 12 लाख से अधिक लोग अपनी नौकरियां खो चुके हैं। ये विरोध प्रदर्शन छात्रों, भूमिहीन किसानों और मज़दूर यूनियन कार्यकर्ताओं को एक साथ ले आये हैं।

दक्षिण कोरिया ने सितंबर 2016 में सभी क्षेत्रों में बड़ी हड़तालें देखीं। ह्युंडाई मोटर्स के मज़दूर यूनियन के 50,000 मज़दूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर, 26 सितंबर को अपनी पहली राष्ट्रव्यापी, पूर्ण-दिवसीय हड़ताल सफलता पूर्वक आयोजित की। उसी सप्ताह, कोरियाई लोक सेवा और ट्रांसपोर्ट मज़दूर यूनियन ने सरकार की वेतन-व्यवस्था के विरोध में एक सर्वव्यापी हड़ताल शुरू की। सार्वजनिक और वित्तीय क्षेत्रों में भी अन्य मज़दूरों ने “योग्यता” आधारित वेतन योजना को लागू करने के सरकार के प्रयासों के खिलाफ़ हड़ताल की। सरकार इस योजना का इस्तेमाल वेतन को 40 प्रतिशत से भी अधिक काटने के लिए करेगी। इससे सरकार को “कम काम करने वाले” मज़दूरों को नौकरी से बाहर निकालने का बहाना भी मिलेगा।

27 सितंबर, 2016 को, कोरियाई रेलवे मज़दूर यूनियन (के.आर.डब्ल्यू.यू.) के मज़दूर और सोल शहर के दो भूमिगत रेल की यूनियनों के मज़दूर, जो 1 से 8 की रेल लाइनों की देखरेख करते हैं, 22 साल में पहली बार संयुक्त रूप से हड़ताल पर गये। भूमिगत रेल के कुल 2,380 मज़दूरों ने, यानी कुल में से 30 प्रतिशत मज़दूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। इतनी ही तादाद में रेलवे मज़दूरों ने भी काम रोक दिया। 23 सितंबर को कोरियाई वित्तीय उद्योग यूनियन (के.एफ.आई.यू.) के बैनर तले संगठित 65,000 बैंक मज़दूरों ने एक हड़ताल आयोजित की।

जुलाई 2016 में, दक्षिण अफ्रीका के केमिकल, एनर्जी, पेपर, प्रिंटिंग, वुड, एंड अलाईड वर्कर्स यूनियन से जुड़े मज़दूरों ने जीवन निर्वाह के लिए ज़रूरी वेतन की मांग को लेकर हड़ताल की। पेट्रोलियम क्षेत्र के 15,000 से अधिक मज़दूर रासायनिक उद्योग में वेतन समझौते के मुद्दे को लेकर मालिकों के खिलाफ़ हड़ताल पर गये।

संक्षेप में, सभी पूंजीवादी देशों में मज़दूर वर्ग और बहुसंख्यक शोषित लोग पूंजीवादी संकट का बोझ अपने कंधों पर उठाने से इंकार कर रहे हैं। वे इज़ारेदार पूंजीपतियों के वहशी आक्रामक हमले को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। मुट्ठीभर अल्पसंख्यक मालिकों के अधिकतम मुनाफ़ों की रक्षा करने के लिए, मेहनतकश बहुसंख्यक लोगों की रोज़ी-रोटी और हक़ों पर हमले करने के उनके देश की सरकारों के प्रयासों के खिलाफ़ मज़दूरों का क्रोध आक्रामक होता जा रहा है।

Tag:    स्वास्थ्य सेवाओं    सामाजिक सेवा    Apr 16-30 2017    Struggle for Rights    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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