रेल कर्मी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल करेंगे

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:10

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन तथा ऑल इंडिया गार्ड्स कौंसिल, संयुक्त रूप से, सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों और रनिंग कैडर के कर्मचारियों के उत्पीड़न सहित कई अन्य मांगों को लेकर, 25 अप्रैल से 36 घंटे की भूख हड़ताल करने जा रहे हैं। दोनों संगठनों की केन्द्रीय कार्यकारिणी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर और सभी मण्डल मुख्यालयों पर वहां की कार्यकारिणी भूख हड़ताल में भाग लेंगी।

25 जुलाई, 2016 में 7वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद से ही, भारतीय रेल के रनिंग स्टाफ (गार्ड और इंजन चालक) सरकार की भेदभाव करने वाली नीतियों के खिलाफ़ संघर्ष करते आ रहे हैं। रेल कर्मियों समेत अलग-अलग क्षेत्रों के सरकारी कर्मचारियों के विरोध संघर्षों के बाद, सरकार ने उनकी शिकायतों की जांच करने के लिए, दो समितियां गठित की थीं। ये दो समितियां थीं अलाउंस (भत्ता) समिति और अनोमलिस (विसंगतियां) समिति।

रेलवे रनिंग स्टाफ ने दोनों समितियों के सामने अपनी शिकायतें पेश की हैं। इनमें यह शिकायत शामिल है कि मालगाड़ी के गार्डों को तनावपूर्ण ड्यूटी भत्ता नहीं दिया जाता है और यूनिफार्म धोने के लिए पर्याप्त भत्ता नहीं दिया जाता है। रनिंग स्टाफ ने बताया है कि मालगाड़ियों के गार्डों को अपने कक्ष में अकेला काम करना पड़ता है और उन्हें लाइट और पंखा जैसी मूल सुविधाएं भी नहीं दी जाती हैं।

रनिंग स्टाफ की कई और लम्बे समय से चली आ रही समस्याएं हैं। उन्हें बिना अवकाश, लम्बे घंटों तक काम करना पड़ता है। रेलवे रिक्त स्थानों को भरने के लिए नए कर्मचारियों को भर्ती करने से इंकार रहा है, जिसकी वजह से, इंजन चालकों और गार्डों के काम का बोझ बहुत बढ़ गया है और उनके काम की हालतें बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गयी हैं। इन हालतों में, दुर्घटनाओं और दुर्घटनाओं से बाल-बाल बचने के हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। रेलवे के रनिंग स्टाफ बहुत समय से यह मांग करते आ रहे हैं कि यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए, सिग्नल व्यवस्था को बहुत उन्नत होना चाहिए और रेल की पटरियों की नियमित जांच होनी चाहिए। इसके आलावा, इंजन चालकों और गार्डों के कार्यभार को निर्धारित करते समय यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि उनका काम बहुत तनावपूर्ण है। रनिंग स्टाफ की यूनियनों ने लाइन रखरखाव जैसे कार्यों के लिए अकुशल और अप्रशिक्षित ठेका कर्मचारियों को रखने के खतरों के बारे में भी चेतावनी दी है।

बहरहाल, आल इंडिया गार्ड्स कौंसिल के लगातार संघर्ष की वजह से, रेलवे बोर्ड को सेवानिवृत्त गार्डों और इंजन चालकों के सेवानिवृत्ति भत्तों को बढ़ाना पड़ा है।

ए.आई.एल.आर.एस.ए. और ए.आई.जी.सी. की अगुवाई में भारतीय रेल के गार्डों और इंजन चालकों के जायज़ संघर्षों का मज़दूर एकता लहर समर्थन करता है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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