ज़मीर के अधिकार पर हमले के खिलाफ़ छात्रों का विरोध प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:13

इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के छात्रों द्वारा आयोजित वार्षिक नुक्कड़ नाटक उत्सव “मुखातिब नुक्कड़ नाटक”, दिल्ली विश्वविद्यालय के तमाम कॉलेजों के छात्रों के लिए, अधिकारियों द्वारा छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर लगाये जा रहे प्रतिबंधों के खिलाफ़ अपना रोष व्यक्त करने और अपनी आवाज़ बुलंद करने का अवसर बन गया।

30 मार्च को आयोजित उत्सव में विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने, केवल दो कॉलेजों - किरोड़ी मल कॉलेज और मिरांडा हाउस के छात्रों को थियेटर में अपना नाटक पेश करने की अनुमति दी। लेडी श्री राम कॉलेज (एल.एस.आर.) की टीम ने इस उत्सव में भाग तो लिया, लेकिन इस टीम के कलाकारों में से एक ने भाषण देते हुए कहा कि जब “अभिव्यक्ति के अधिकार को दबाने के लिए असामान्य बाधाएं खड़ी की जा रही हों ऐसी हालत में वे अपना नाटक पेश नहीं करेंगे।“ एल.एस.आर. के छात्र ने कहा कि “ऐसे नुक्कड़ नाटकों का उपयोग ही क्या है - जिनका इरादा तो क्रांतिकारी है - लेकिन जिसको सेंसर किया गया हो? यह बहुत निराशा की बात है कि जो भी बात अधिकारियों को चुनौती देती है, उस बात पर सवाल उठाये जा रहे हैं। हम अपना नाटक पेश नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह सेंसरशिप न केवल हमें बल्कि रामजस कॉलेज को, और थिएटर को ही बाधित करती है।”

रामजस थिएटर सोसाइटी के अध्यक्ष ने बताया कि 17 कॉलेजों ने 28 मार्च को आयोजित ऑडिशन में भाग लिया था। इन सत्रह में से सात को 30 मार्च को प्रदर्शन करने के लिए चुना गया था। इन सात में से, चार के प्रदर्शन करने की अनुमति 29 मार्च को रद्द कर दी गयी। इन नाटकों को खारिज़ कर दिया गया जबकि ये नाटक पहले अन्य कॉलेजों में आयोजित किये गये जा चुके हैं। उन्होंने विचार व्यक्त करने के छात्रों के अधिकार पर इस हमले की कड़ी निंदा की।

जिन चार कॉलेजों के नाटक रद्द किये गये थे उनके छात्रों ने इस बात की कड़ी निंदा की कि ऑडिशन के दौरान पुलिस मौजूद थी और पुलिस व ए.बी.वी.पी. द्वारा उठाई गई आपत्तियों के कारण इनमें से कुछ नाटक रद्द कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस और ए.बी.वी.पी. व्यवस्था के खिलाफ़ विरोध की अभिव्यक्तियों को दबाने के लिए मिलकर काम कर रहे थे।

छात्रों ने बताया कि अधिकारियों और पुलिस ने किसी भी नाटक को अनुमति नहीं देने का फैसला किया, जिसमें “आज़ादी” या “राष्ट्र-विरोधी” जैसे शब्द शामिल थे। प्रेस को संबोधित करते हुए, रामजस थिएटर उत्सव की आयोजक समिति के सदस्यों ने कहा कि उन्हें प्रिंसिपल ने कार्यक्रम से एक दिन पहले शाम को बुलाया और उनसे नुक्कड़ नाटकों की विषय वस्तु के बारे में पूछताछ की। छात्रों के सातों चुने गए नाटकों के सारांशों को पढ़ने के लिए कहा। चार नाटक, जिनमें असहमति के अधिकार पर हमले के, और सभी प्रकार की असहमति पर “राष्ट्र-विरोधी” होने का ठप्पा लगाये जाने के मुद्दे दिखाए गए थे, उन्हें रद्द कर दिया। छात्रों को इसे लिखित रूप से देने के लिए बाध्य किया गया कि उनकी स्वीकृत की गयी पटकथा को नहीं बदलेंगे। ए.बी.वी.पी. का एक छात्र नेता, जिसने एक महीने पहले गुंडों के साथ कॉलेज के छात्रों पर हमले को अगुवाई दी थी, वह इस बैठक में एक पुलिस अधिकारी के साथ मौजूद था।

इन परिस्थितियों का सामना करते हुए, छात्रों ने सामूहिक रूप से इस उत्सव को विरोध बैठक में परिवर्तित करने का निर्णय लिया। कई प्रतिभागियों व दर्शकों ने अपना विरोध दिखाने के लिए अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधी और मुंह पर काले टेप चिपकाकर बैठे। इस विरोध के दौरान, उन्होंने सक्रिय रूप से हमारे देश और विश्व में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर, ज़मीर के अधिकार के साथ लोगों के अधिकारों पर बढ़ते हुए हमलों पर और इनका विरोध करने के लिए संगठित होकर लड़ने की ज़रूरत पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने अपने विरोध को उजागर करने के लिए प्रतिरोध आंदोलनों के गीत भी गाए।

Tag:    ज़मीर के अधिकार    Apr 16-30 2017    Political-Economy    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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