राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अफ्रीकी विद्यार्थियों पर नस्लवादी हमले

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:26

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 27 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में, लोगों का एक गिरोह ग्रेटर नोएडा में रह रहे नाइजीरियाई विद्यार्थियों के घर में बलपूर्वक घुस गया। उन्होंने विद्यार्थियों के फ्रिज की तलाशी के लिये जबरदस्ती की। उन्होंने आरोप लगाया कि नाईजीरियाई विद्यार्थी नरभक्षी हैं और यह भी आरोप लगाया कि इन विद्यार्थियों ने एक स्थानीय युवक की हत्या की है। पुलिस ने भी उन विद्यार्थियों की रक्षा करने की बजाय, उनके खिलाफ़ ही एफ.आई.आर. दर्ज़ की।

NOIDA protest हालांकि युवक की मौत और नाईजीरियाई विद्यार्थियों के हत्या से जुड़े होने के कोई सबूत पुलिस को नहीं मिले हैं। उनके खिलाफ़ तरह-तरह की झूठी अफवाहें फैलाई गईं। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के दो विश्वविद्यालयों के कम से कम 7 छात्रों को एक मॉल में लगभग 100 गुंडों की भीड़ ने बहुत ही बुरी तरह पीटा। जब उनकी पिटाई हो रही थी, पुलिस मूकदर्शक बनी रही। विद्यार्थियों को इतनी बुरी तरह से पीटा गया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। उसके बाद से अफ्रीका के विभिन्न देशों से आए लड़के व लड़कियां जो ग्रेटर नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पढ़ाई या काम कर रहे हैं वे घेराबंदी के माहौल में जी रहे हैं।

क्योंकि ग्रेटर नोएडा में रहने वाले, अफ्रीकी देशों से आये सैकड़ों विद्यार्थी नस्लवादी हमलों के शिकार बने हैं, यह तथ्य दिखाता है कि ये हमले योजनाबद्ध तरीके से आधिकारिक समर्थन के साथ किये गये हैं। इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस प्रकार के हमले पहली बार नहीं हुए हैं। पिछले कुछ सालों में नई दिल्ली, बेंगलूरू, जालंधर और गोवा सहित हिन्दोस्तान के विभिन्न भागों में अफ्रीकी देशों के विद्यार्थियों पर बर्बर नस्लवादी हमले किये गये हैं। पिछले साल दिल्ली में कांगों से आये एक विद्यार्थी, जो कि पढ़ाने का काम भी करता, उसे एक मामूली विवाद के कारण पीट-पीटकर मार डाला गया। तीन साल पहले दिल्ली सरकार के एक पूर्व मंत्री की अगुवाई में भीड़ ने दक्षिण दिल्ली की एक कालोनी में नाइजीरिया और युगांडा की महिलाओं पर हमला किया और उन पर वेश्या होने का आरोप लगाया।

हिन्दोस्तानी इज़ारेदारों से नियंत्रित मीडिया ने नाइजीरिया और अन्य अफ्रीकी देशों के विद्यार्थियों पर नशीले पदार्थ बेचने, वेश्यावृत्ति करने, नकली मुद्रा बदलने का काम करने वाले, आदि होने के झूठे आरोप लगाए हैं। उन्हें कदम-कदम पर पुलिस और अधिकारियों द्वारा परेशान किया जाता है। अब तो उन पर नरभक्षी होने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

हिन्दोस्तान में रहने वाले अफ्रीकी विद्यार्थियों पर इन बढ़ते हमलों के खिलाफ़ उनका गुस्सा जायज़ है, क्योंकि अधिकतर मामलों में पुलिस हमलों की अनदेखी करके, पीड़ितों को ही दोषी ठहराती है और परेशान करती है। हमलावरों को कोई सज़ा नहीं दी जाती है।

द एसोसियेशन ऑफ अफरिकन स्टूडेंट्स इन इंडिया (ए.ए.एस.आई.) ने बताया कि हिन्दोस्तान में अफ्रीका से आये लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं और उन्हें अलग-अलग तरीके से सताया जाता है, जिसमें मकान मालिकों द्वारा रहने के लिए आवास देने से इंकार करना, आदि शामिल है। उन्होंने मांग की है कि राज्य उन्हें सुरक्षा प्रदान करे और हमलावरों को सज़ा दे। ए.ए.एस.आई. ने अफ्रीकी छात्रों के जीवन को सुरक्षित करने में विफल रहने के लिए सरकार को दोषी ठहाराया है और साथ ही हिन्दोस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार को रद्द करने के लिए अफ्रीकी संघ को लिखने की धमकी दी है। इस एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे हिन्दोस्तान में रह रहे अफ्रीकी विद्यार्थियों पर बढ़ते नस्लवाद का ब्योरा अपने-अपने देशों के स्थानीय मीडिया को भेजेंगे। इसमें कहा गया है कि एसोसिएशन यह विस्तृत रिपोर्ट सभी अफ्रीकी सरकारों के उच्च अधिकारियों और राज्य के प्रमुखों को भेजना सुनिश्चित करेगी। यह घोषणा की गई है कि अफ्रीकी विद्यार्थी अपने-अपने देशों में यह सुनिश्ति करेंगे कि वहां के विद्यार्थी शिक्षा के लिये हिन्दोस्तान आना तुरंत बंद कर दें। उन्होंने घोषणा की है कि वे पूरे हिन्दोस्तान में विरोध प्रदर्शनों की योजना बना रहे हैं।

इस एसोसिएषन के द्वारा उठाए गए इस कदम से पता चलता है कि अफ्रीकी विद्यार्थी अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं और हिन्दोस्तान में रोज़ाना अपमान सहते हैं। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, नाइजीरियाई सरकार ने हिन्दोस्तानी सरकार से दोषी लोगों के खिलाफ़ मुकदमा चलाने की मांग की है और अफ्रीकी लोगों के खिलाफ़ बार-बार हो रहे अपराधों पर चिंता व्यक्त की है।

हिन्दोस्तान में अफ्रीकी लोगों पर हो रहे हमलों के लिए हिन्दोस्तानी राज्य पूरी तरह से जिम्मेदार है। हिन्दोस्तानी राज्य जिम्मेदार है, सभी तरह के नस्लवादी हमलों को फैलाने के लिए, हिन्दोस्तान में बस्तीवादी और अश्वेत विदेशी नागरिकों के खिलाफ़ साम्राज्यवादी विचारों का प्रचार करने के लिए। अफ्रीकी महाद्वीप के लोगों और देशों के प्रति हिन्दोस्तानी राज्य का बर्ताव, बर्तानवी बस्तीवादियों की तरह ही है। यह उन सबूतों का एक हिस्सा है, ये साबित करते हैं कि वर्तमान राज्य बस्तीवादी विरासत है।

आधिकारिक तौर पर नस्लवादी हमलों के खिलाफ़ अफ्रीकी विद्यार्थियों का संघर्ष, सभी प्रगतिशील और जनवादी ताक़तों से बिना शर्त समर्थन का हक़दार है। बर्तानवी राज और उसकी नस्लवादी नीति के नक्षे कदम पर चलने के लिए हिन्दोस्तानी सरकार की निन्दा की जानी चाहिए।

Tag:    अफ्रीकी विद्यार्थियों    नस्लवादी हमले    Apr 16-30 2017    Political-Economy    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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