कोरियाई प्रायद्वीप में अमरीका की जंगफरोश नीति : “दुष्ट” राज्य कौन है?

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:29

मार्च के मध्य में, अमरीका और दक्षिण कोरियाई सशस्त्र बलों ने उत्तर कोरिया, यानी कि डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डी.पी.आर.के.) को निशाना बनाते हुए, कोरियाई प्रायद्वीप में सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया। 17,000 अमरीकी सैनिक हवा, समुद्र और भूमि पर युद्ध के खेल में तीन लाख से अधिक दक्षिण कोरियाई सैनिकों के साथ शामिल हुए। उन्होंने परमाणु हथियारों के साथ उत्तर कोरिया पर हमला करने का अभ्यास किया। विशेष अमरीकी सेना (एस.ई.ए.एल.एस.) ने उत्तरी कोरिया के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की हत्या करने और सत्ता परिवर्तन के अपने मिशन के लिए अभ्यास किया।

कोरियाई लोगों के खिलाफ़ अमरीका के भड़काऊ कारनामों का लंबा इतिहास

द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होने से कुछ वर्ष पहले, जापानी साम्राज्यवादियों ने कोरिया और मंचूरिया (उत्तर चीन) पर अपना कब्ज़ा जमाया और कोरिया व चीन के लोगों के खिलाफ़ भयंकर जुर्म किये। 

कोरिया के लोगों ने, चीनी लोगों के साथ मिलकर बहादुरी से संघर्ष किया और द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में अपने दोनों देशों को जापानी साम्राज्यवादियों से मुक्त किया। लेकिन अमरीकी साम्राज्यवादियों ने कोरिया के लोगों की इस जीत को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उसने सभी समझौतों की धज्जियां उड़ाते हुए कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी इलाके में जबरदस्ती अपने पैर जमाने शुरू किये। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इस इलाके में सिंगमन रीह की कठपुतली फौज़ी सत्ता को बढ़ावा दिया और अपनी फौज़ों को बड़े पैमाने पर तैनात किया। उस वक्त अमरीका के राष्ट्रपति हेनरी ट्रूमैन ने इसे “कम्युनिज़्म को पीछे धकेलने” के नाम पर सही बताया, क्योंकि उस वक्त 1949 में चीन में लोगों की क्रांति की जीत हुई थी और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ और समाजवादी खेमे की महान ताक़त और उनका रुतबा दुनियाभर में चरम पर था।

1950 से 1953 के बीच अमरीकी साम्राज्यवादियों ने डी.पी.आर.के. के खिलाफ़ अब तक की सबसे रक्त-रंजित और बर्बर जंग छेड़ दी। उसने पूरे देश के खिलाफ़ एक ऐसी तबाहकारी नीति अपनाई, जिससे पूरा देश बर्बाद हो गया। लेकिन इसके बावजूद वह डी.पी.आर.के. को हराने में असमर्थ रहा और 1953 में उसे युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़े।

पिछले 60 वर्षों से अमरीकी साम्राज्यवाद दक्षिणी कोरिया में अपनी स्थायी फौज़ी मौजूदगी बनाये हुए है। अमरीका द्वारा हथियारबंद और प्रशिक्षित दक्षिणी कोरिया की फौज़, अमरीकी सेना के हुक्म तले काम करती है। दक्षिणी कोरिया में अमरीकी फौज़, दक्षिणी कोरिया की फौज़ के साथ मिलकर, उत्तरी कोरिया के खिलाफ़ भड़काऊ हवाई, ज़मीनी और समुद्री अभ्यास लगातार करती रहती है।  इन भड़काऊ अभ्यासों के खिलाफ़ खुद को सुरक्षित रखने के अपने अधिकार की उत्तरी कोरिया ने हरदम हिफाज़त की है।

2003 में उत्तरी कोरिया, दक्षिणी कोरिया, अमरीका, जापान, रूस और चीन, इन छः देशों के बीच कोरियाई संकट को हल करने के लिए बातचीत शुरू हुई थी। इस बातचीत को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ा रोड़ा है, अमरीका की हेकड़बाजी, जिसके चलते वह उत्तरी कोरिया के अस्तित्व को स्वीकार करने से इंकार कर रहा है। इसका खुलासा इस बात में होता है कि वह उत्तरी कोरिया के साथ सीधे बातचीत करने और उसके साथ शांति समझौता करने को तैयार नहीं है।

हाल के दशकों में, उत्तरी कोरिया और दक्षिणी कोरिया। इन दोनों देशों के बीच शांति और अंत में पुनर्मिलन के पक्ष में आंदोलन मजबूत हुआ है। यह बात हर दिन और अधिक साफ होती जा रही है कि कोरिया के लोग अपनी मातृभूमि को फिर से एक करने के लिए तरस रहे हैं। यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि अमरीका को यह बात बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है कि यह सिलसिला आगे बढे़ और कोरिया के लोग एक हो जाएं। क्योंकि ऐसा होने से, इस रणनैतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रायद्वीप में अपनी फौज़ी मौजूदगी बनाये रखने के लिए अमरीका के पास कोई औचित्य नहीं रहेगा। अमरीकी साम्राज्यवाद दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ी बेदर्दी के साथ हस्तक्षेप करता है और उन राजनीतिक ताक़तों पर हमले करता है, उन्हें बदनाम करने की कोशिश करता है, उनको “उत्तरी कोरिया का एजेंट” करार देता है, जो उत्तरी कोरिया के साथ शांति और कोरिया के पुनर्मिलन की पैरवी करते हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद लगातार तनाव को बढ़ावा देता है और फिर पलटवार करते हुए उत्तरी कोरिया के खिलाफ़ जंगफरोश उन्माद फैलाता है, ताकि दोनों देशों के बीच शांति के प्रयास कभी कामयाब न हो पाएं।

एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, “अभ्यास में विशेष सेना की भागीदारी ... एक संकेत हो सकती है कि दोनों पक्ष: अमरीका और दक्षिण कोरिया, किम जोंग उन की हत्या का अभ्यास कर रहे हैं।” एक अमरीकी अधिकारी ने दक्षिण कोरिया के योनहैप न्यूज एजेंसी को बताया कि “इस वर्ष होने वाले अभ्यास में अमरीका के विशेष परेशन सैन्यबलों का हिस्सा और अधिक विविध और इससे भी बड़े पैमाने पर होगा... उत्तर कोरिया में घुसपैठ करने के लिए मिशन का अभ्यास करने, उत्तरी कोरिया के फौज़ी नेतृत्व को ख़त्म करने और उसकी प्रमुख सैन्य सुविधाओं को ध्वस्त करने के लिए।”

सैन्य अभ्यास के बीच में, अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने दक्षिण कोरिया के सोल में, उत्तर कोरिया के बारे में भड़कीली घोषणा करते हुए कहा कि अमरीका हमला-पूर्व सैनिक कार्यवाही” करने का निर्णय ले सकता है और उत्तर कोरिया के साथ “रणनीतिक संयम” की अमरीकी नीति ख़त्म हो चुकी है। 

अमरीकी प्रचार तंत्र, उत्तरी कोरिया को एक “दुष्ट राज्य” के रूप में चित्रित करके सच को उल्टे तरीके से पेश कर रहा है और यह झूठा प्रचार फैलाता रहा है कि उत्तरी कोरिया के नेता परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे हैं। वास्तव में सत्य इसके बिल्कुल विपरीत है। दरअसल, वह अमरीकी साम्राज्यवाद ही है, जिसने न केवल परमाणु हथियारों के भंडारों का निर्माण किया है, जो पूरे विश्व को कई बार नष्ट कर सकते हैं। इसके साथ ही अमरीका उत्तरी कोरिया को लगातार धमकी देता रहा है कि अगर वह घुटने टेकने से इंकार करता है तो, उसको परमाणु विनाश का सामना करना पडे़गा।

दुनिया में कोरियाई प्रायद्वीप को सबसे अधिक सैन्य क्षेत्र में बदलने के लिए अकेला अमरीका पूरी तरह ज़िम्मेदार है। उसने कभी भी डी.पी.आर.के. के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है। (बॉक्स देखें)

उत्तर कोरिया ने अमरीकी साम्राज्यवाद के दबाव के आगे झुकने से इंकार कर दिया है और वह खुद का बचाव करने के लिए कदम उठा रहा है, जिसमें परमाणु हथियार और मिसाइल दागने की प्रणाली का उत्पादन भी शामिल है। साथ ही, उत्तर कोरिया ने बार-बार कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को कम करने के प्रस्ताव पेश किए हैं।

इस प्रकार, 2015 और फिर 2016 में, उत्तर कोरिया ने प्रस्ताव किया था कि वह इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों के उत्पादन को रोक देगा, यदि इसके बदले में अमरीका अपने सैन्य अभ्यासों को रोक दे। दोनों बार ही, अमरीकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अमरीका ने चीन द्वारा प्रस्तुत इसी तरह के प्रस्तावों को पहले भी खारिज किया है। 

अमरीका ने इस तरह के प्रस्तावों को लगातार खारिज कर दिया है क्योंकि वह कोरियाई प्रायद्वीप में रणनीतिक सैन्य मौजूदगी के लिए औचित्य खोना नहीं चाहता है, जहां से वह रूस, चीन और जापान को निशाना बना सकता है। विदेश संबंधों पर अमरीकी परिषद ने एक टास्क फोर्स की रिपोर्ट जारी की है, जो उत्तर कोरिया के साथ एक शांति संधि के खिलाफ़ वाशिंगटन को खुलेआम सलाह देता है। इस टास्क फोर्स को लगता है कि उत्तर कोरिया अमरीका से यह उम्मीद करता है कि अमरीका अपने सैनिकों को इस प्रायद्वीप से वापस बुला लेगा। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि अमरीका ने कोरियाई प्रायद्वीप को सैन्य रूप से छोड़ दिया, तो चीन और रूस के मुकाबले अमरीका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। रिपोर्ट ने अमरीकी सरकार को सलाह दी है कि कोरियाई प्रायद्वीप में, अमरीकी सैन्य उपस्थिति में कमी करने का चीन से कोई वायदा न करे!

दक्षिण कोरिया में थाड (टर्मिनल हाई आल्टीट्यूड एरिया डिफेन्स) मिसाइल रक्षा तंत्र की तैनाती, इस क्षेत्र में अमरीकी साम्राज्यवादियों द्वारा नवीनतम भड़काऊ कार्यवाही है। इसे न केवल उत्तर कोरिया के लोगों द्वारा, बल्कि दक्षिण कोरिया के लोगों के साथ-साथ, चीन और रूस की सरकारों द्वारा भी खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

थाड प्रणाली का समर्थन करने वाले यह तर्क देते हैं कि यह केवल “बचाव” के लिए है। थाड प्रणाली इज़राइल की आयरन-डोम प्रणाली पर आधारित है। यह प्रणाली इस क्षेत्र में अमरीका की आक्रामक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से बनी है। यह अमरीका और दक्षिण कोरियाई सैन्य बलों को ढाल प्रदान करेगा, जिससे उन्हें उत्तरी कोरिया, रूस या चीन पर हमला करने की क्षमता मिलेगी और फिर वे आने वाले किसी भी हमले को रोक पायेंगे। इसके अलावा, सिस्टम में एक ऐसा भेदक रडार शामिल है, जो अमरीकी सेना को न सिर्फ कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी भाग पर नज़र रखने में सहायता देगा, बल्कि साथ ही उत्तरी चीन में भी गहरी नज़र रखने में सक्षम बनायेगा।

दक्षिण कोरिया के लोगों ने अपने देश में थाड की तैनाती का सख्ती से विरोध किया है और वे इसके खिलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करते आ रहे हैं। चीन ने भी उन दक्षिण कोरियाई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आर्थिक बहिष्कार की घोषणा की है, जिन्होंने थाड कार्यक्रम का समर्थन किया है। साथ ही चीन ने इस परियोजना को छोड़ने के लिए दक्षिण कोरिया से आह्वान किया है। इस बीच रूस अपने बचाव के लिए, चीन के साथ सहयोग को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। उसने ध्यान दिलाया है कि वह दक्षिण कोरिया में थाड की तैनाती को अमरीकी रणनीति का हिस्सा मानता है, जिससे अमरीका रूस को सैनिकी रूप से घेरने की तैयारी कर रहा है। 

कोरिया प्रायद्वीप में होने वाली घटनायें, इस इलाके में जंग के खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद लगातार फौज़ीकरण और जंग की तैयारी में लगा हुआ है और पूरे इलाके के देशों और लोगों को इस तबाहकारी जंग में घसीटने की धमकी दे रहा है।

हिन्दोस्तान के लोगों को अमरीकी साम्राज्यवाद के इस झूठे प्रचार को ठुकरा देना चाहिए कि, उत्तरी कोरिया मौजूदा तनाव को बढ़ाने लिए ज़िम्मेदार है, जिससे पूरे इलाके और पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाने और उसे अलग-थलग करने की तमाम कोशिशों का विरोध व पर्दाफाश किया जाना चाहिए। 

यह निहायत ज़रूरी है कि कोरियाई प्रायद्वीप में मौजूद सभी अनसुलझे मसलों का हल, शांतिपूर्वक और बंटवारे की सीमा रेखा के दोनों तरफ के देशों और लोगों का मान-सम्मान बरकरार रखते हुए किया जाना चाहिए। इनमें से कई मसले ऐसे हैं जिनका हल पिछले 60 वर्षों से अधर में लटका हुआ है। यह बहुत ज़रूरी है कि इन मसलों पर चर्चा का नतीजा डी.पी.आर.के. और अमरीका के बीच शांति समझौते और पूरे कोरियाई प्रायद्वीप से अमरीकी सेना की मौजूदगी को पूरी तरह से खत्म करने में होना चाहिए। उत्तर और दक्षिण कोरिया के लोगों में लम्बे समय से पुनर्मिलन की इच्छा है और उनके बीच समाधान के लिये अनेक मसले लंबित हैं। इन मसलों को शांति से, बिना किसी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप के, हल करने के लिए कोरियाई लोगों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

Tag:    जंगफरोश नीति    दुष्ट” राज्य कौन है    Apr 16-30 2017    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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