मारुति-सुजुकी के मज़दूरों की उम्रकैद की नाजायज़ सज़ा के खिलाफ़ व्यापक जन प्रदर्शन

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/04/2017 - 19:43
 

Kamala Nehru park-1

अनेक उद्योगों के मज़दूरों तथा उनके ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने गुड़गांव सत्रीय अदालत के 18 मार्च, 2017 के नाजायज़ फैसले के खिलाफ़ बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं। अदालत के फैसले के अनुसार, मारुति-सुजुकी लिमिटेड (मानेसर) के 13 मज़दूरों को उम्रकैद तथा 4 और मज़दूरों को पांच वर्ष की कैद की सज़ा दी गई है। मारुति-सुजुकी के इन मज़दूरों पर 2012 में कंपनी के एक प्रबंधक की हत्या का झूठा इल्जाम लगाया गया है। 148 मज़दूर बीते साढ़े चार वर्षों तक जेल में बंद रहे, जिनमें से 117 को अब निर्दोष घोषित करके रिहा कर दिया गया है। अदालत ने बिना किसी सबूत के, सिर्फ प्रबंधकों के गवाहों के झूठे बयानों के आधार पर फैसला दिया है।

28 मार्च, 2017 को गुड़गांव, रिवाड़ी, धारूहेड़ा, इत्यादि की अलग-अलग फैक्ट्रियों की ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने गुड़गांव के कमला नेहरू पार्क में, ट्रेड यूनियन कौउंसिल ऑफ गुड़गांव-मानेसर-बावल के झंडे तले, आगे के कार्यक्रमों की योजना बनाने के लिए एक सभा की। सभा में एटक, सीटू और मज़दूर एकता कमेटी के नेताओं तथा अन्य वक्ताओं ने अपनी बातें रखीं। उस सभा में ट्रेड यूनियन कौउंसिल ने फैसला किया कि मज़दूरों के सर्व हिन्द कार्यक्रमों के तहत 5 अप्रैल को गुड़गांव में कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।

31 मार्च, 2017 को कई मज़दूर संगठनों ने मारुति-सुजुकी के मज़दूरों पर हुए हमले के खिलाफ़ और उनके संघर्ष के समर्थन में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना आयोजित किया। इनमें शामिल थे - इंकलाबी मज़दूर केन्द्र, मज़दूर एकता केन्द्र, जन संघर्ष मंच हरियाणा, क्रांतिकारी नौजवान संगठन, मज़दूर एकता कमेटी, हिंदुस्तान मोटर मज़दूर यूनियन, इफ्टू (सर्वहारा), टी.यू.सी.आई., ऑल इंडिया वर्कर्स काउंसिल व अन्य।

4 अप्रैल को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर और गुड़गांव के लघु सचिवालय पर धरने आयोजित किये गये, जिनमें सैकड़ों मज़दूरों ने भाग लिया। गुड़गांव के लघु सचिवालय पर धरने को मारुति-सुजुकी वर्कर्स यूनियन की प्रोविजनल कमेटी और मारुति-सुजुकी कर्मचारी संघ ने आयोजित किया था, जिसमें ट्रेड यूनियन कौउंसिल गुड़गांव ने भाग लिया था। मज़दूर एकता कमेटी ने इन दोनों कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लिया।

Haryana Bhavan demo

4 अप्रैल को जन संघर्ष मंच हरियाणा ने मारुति-सुजुकी के मज़दूरों के समर्थन में गोहाना में तथा जिला प्रशासन कार्यालय, कैथल पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किये।

एटक, सीटू, हिन्द मज़दूर सभा, इंटक, ए.आई.यू.टी.यू.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., सेवा और एल.पी.एफ. ने मारुति के मजदूरों के समर्थन में, 5 अप्रैल को सर्व हिन्द विरोध दिवस के तहत विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया। नई दिल्ली में ट्रेड यूनियनों और अन्य मज़दूर संगठनों ने मिलकर, 5 अप्रैल को हिमाचल भवन से हरियाणा भवन तक विरोध प्रदर्शन किया, जिसके अंत में एक बड़ी सभा आयोजित की गई। सभी सहभागी संगठनों ने एक संयुक्त ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये, जिसे अधिकारियों को दिया गया। एटक, मज़दूर एकता कमेटी, इंटक, ए.आई.यू.टी.यू.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., यू.टी.यू.सी और सीटू के नेताओं ने रैली को संबोधित किया।

5 अप्रैल की शाम को ट्रेड यूनियन कौउंसिल गुड़गांव-रिवाड़ी के झंडे तले, गुड़गांव के कमला नेहरू पार्क में गुड़गांव-मानेसर के हजारों मज़दूरों ने एक विशाल रैली में भाग लिया। इलाके की विभिन्न फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने लाल झंडों और बैनरों के साथ, जुझारू नारे देते हुए और मज़दूर वर्ग की एकता और संघर्ष की भावना को दर्शाते हुए, पार्क में प्रवेश किया। इस बात को मान्यता देते हुए कि गुड़गांव-मानेसर के मज़दूर इस समय पूंजीपतियों के हमलों के खिलाफ़ विरोध संघर्ष के केन्द्र पर हैं, विभिन्न ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों के केन्द्रीय नेताओं ने इस रैली में सक्रियता से भाग लिया। एटक, सीटू, हिन्द मजदूर सभा, मज़दूर एकता कमेटी, इंटक और ए.आई.यू.टी.यू.सी. के नेता इसमें शामिल थे। मज़दूरों की मांगों का एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा गया, जिस पर सभी भाग लेने वाले केन्द्रीय संगठनों और फैक्ट्रियों के ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किये।

पूरे देश के लगभग 30 शहरों तथा दुनिया के अलग-अलग भागों के लगभग 21 देशों से मारुति के मज़दूरों के समर्थन में विरोध कार्यक्रमों की रिपोर्टें मिली हैं।

चेन्नई में जिन प्रदर्शनों की रिपोर्टें आयी हैं, उनमें कई बहुराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के मज़दूरों ने भाग लिया। मुंबई में मारुती-सुजुकी के ऑफिस के सामने सैंकड़ों मज़दूरों ने प्रदर्शन किया। ट्रेड यूनियन सॉलिडेरिटी कमेटी, अनुदानित शिक्षा बचाव समिती, मारुती मज़दूर संघर्ष एकजुटता मंच, तथा कामगार संघटना संयुक्त कृति समिति की ओर से एटक, सीटू, हिंद मज़दूर सभा, कामगार एकता कमेटी, सर्व श्रमिक, बैंक यूनियन तथा अन्य यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फरीदाबाद, भिवानी, नहान, जयपुर, अहमदाबाद, कोलकाता, भुबनेश्वर, लुधियाना, लखनऊ, रूद्रपुर, इत्यादि से भी इस प्रकार के विरोध कार्यक्रमों की खबरें आयी हैं।

3 अप्रैल को श्रीलंका की राजधानी, कोलंबो में ट्रेड यूनियनों ने हिन्दोस्तान मिशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। 24 मार्च को फ्रांस की राजधानी पेरिस में हिन्दोस्तानी दूतावास के सामने एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें मारुति के 13 मज़दूरों पर लगाये गए झूठे आरोपों को फौरन वापस लेने तथा उन्हें फौरन रिहा करने की मांग की गई।

सभी जगहों पर प्रतिरोध करने वाले मज़दूरों और उनके ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने मारुति के 13 मज़दूरों को मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर सुनाई गई उम्रकैद की सज़ा की कड़ी निंदा की और यह मांग रखी कि मज़दूरों को बिना शर्त फौरन रिहा किया जाए। उन्होंने मांग की है कि सभी मज़दूरों पर लगाए गए झूठे मामलों को वापस लिया जाए और 117 मज़दूरों, जिन्हें बीते साढ़े चार वर्ष से जेल में बंद रखने के बाद अब बेकसूर घोषित किया गया है, उन्हें फौरन काम पर वापस लिया जाए।

Kamala Nehru park-2

मारुति-सुजुकी के मज़दूरों की हिफ़ाज़त में देशभर और दुनियाभर में आयोजित किए गए तमाम विरोध कार्यक्रम मज़दूर वर्ग की बढ़ती एकता के प्रतीक हैं। “एक पर हमला, सब पर हमला”, यह इस बढ़ती एकता को बांधने का नारा बन रहा है। अधिक से अधिक हद तक मज़दूर यह महसूस करने लगे हैं कि पूंजीपतियों और उनके राज्य द्वारा हमलों के खिलाफ़़ मज़दूरों के एकजुट विरोध को मजबूत करना बेहद ज़रूरी है।

मज़दूरों ने इस बात पर ध्यान दिया है कि इस मामले में अभियोजक पक्ष हरियाणा राज्य सरकार है। बीते साढ़े चार वर्षों के दौरान, हरियाणा की सरकार मारुति-सुजुकी प्रबंधन के पक्ष में खुलेआम काम करती रही है और कंपनी के मज़दूरों के नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर, उन्हें जेल में बंद करके और प्रताड़ित करके, उन पर अत्याचार करती रही। हरियाणा की सरकार ने इन मज़दूरों के लिए मृत्युदंड की मांग की है और यह दावा किया है कि ऐसा करना आवश्यक है ताकि विदेशी पूंजीपतियों को यह संदेश दिया जा सके कि हिन्दोस्तान की सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में “सही वातावरण “बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। मज़दूरों ने देखा है कि इसमें हरियाणा राज्य सरकार को केन्द्र सरकार से पूरा-पूरा समर्थन मिला है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार, चाहे किसी भी पार्टी की हों, दोनों ने लगातार मज़दूर-विरोधी, पूंजीपति-परस्त रवैया अपनाया है।

 

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मज़दूर इस निष्कर्ष पर पहुंच रहे हैं कि वे इंसाफ के लिए राज्य के संस्थानों पर निर्भर नहीं हो सकते हैं। मज़दूर अधिक से अधिक हद तक यह समझ रहे हैं कि उन्हें अपनी फैक्ट्रियों और काम की जगहों पर, औद्योगिक क्षेत्रों में तथा राज्यीय व सर्व हिन्द स्तर पर, मज़दूर एकता समितियां बनानी होंगी और उन्हें मजबूत करना होगा।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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