अमरीका ने अफगानिस्तान पर महाबम गिराया :

Submitted by cgpiadmin on बुध, 19/04/2017 - 17:42

अमरीका और सभी विदेशी ताक़तें अफगानिस्तान से बाहर निकलो!

अफगानिस्तान को बड़े युद्ध के लिये परीक्षण भूमि की तरह इस्तेमाल करना बंद करो!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 16 अप्रैल, 2017

13 अप्रैल को अमरीकी सशस्त्र बलों ने अपने सबसे तबाहकारी और घातक गैर-परमाणु हथियार “मास्सिव आर्डिनेंस एयर ब्लास्ट बम (एम.ओ.ए.बी.)” को अफगानिस्तान में अचिन जिले के नंगरहार में गिराया। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी अमरीका की इस कार्यवाही की निंदा करती है। अमरीका की यह कार्यवाही अफगानिस्तान की संप्रभुता का और सभी अंतर्राष्ट्रीय नियमों का सरासर उल्लंघन है।

एम.ओ.ए.बी. जिसे “सभी बमों की मां” कहा गया है, असली मायने में जनसंहार का एक हथियार है। इसका वजन 21600 पौंड, लगभग 10,000 किलोग्राम है और इसे जी.पी.एस. तकनीक से संचालित किया जाता है। इसका वजन इतना ज्यादा है कि यह ज़मीन के भीतर धातु और कंक्रीट की बनी परतों को भी भेद देता है और फिर अपने विस्फोट से बहुत बड़े भू-भाग में जीवन और इमारतों को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। इससे भी उसी प्रकार की गगनधूलि का बादल बनता है जैसे कि परमाणु विस्फोट से बनता है।

अमरीकी सेना ने एम.ओ.ए.बी. को 2003 में इराक युद्ध से कुछ ही समय पहले विकसित किया था। उस वक्त अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इस हथियार से सद्दाम हुसैन की सरकार को धमकाया भी था। अब 2017 में उन्होंने अफगानिस्तान पर इस बम को गिराकर इसका परीक्षण किया है।

अमरीकी साम्राज्यवादी यह दावा कर रहे हैं कि 13 अप्रैल को जो महाबम उन्होंने गिराया था उसका निशाना वह जगह थी “जहां पर शक था कि आई.एस.ई.एस. के लड़ाके कई सुरंगों और इमारतों में छुपे थे”। अमरीकी हुक्मरानों के कारनामों के इतिहास को देखते हुए इस बात पर कोई भी विश्वास नहीं करेगा। अपनी मर्ज़ी से किसी भी दूसरे देश पर बम गिराने और उस पर हमला करने के लिए खुफिया जानकारी के नाम पर बार-बार झूठ फैलाने का, अमरीकी साम्राज्यवादियों का लंबा इतिहास रहा है। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अफगानिस्तान का इस्तेमाल जनसंहार के सबसे खतरनाक और घातक हथियारों के परीक्षण के लिए किया है, अब इस गुनहगारी कार्यवाही को सही साबित करने के लिए वे एक बार फिर सरासर झूठ फैला रहे हैं।  

इस बात के ठोस सबूत हैं कि दुनियाभर में अपने दबदबे को आगे बढ़ाने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद ने “इस्लामी आतंकवाद” को अपने एक हथियार बतौर खड़ा करके उसका इस्तेमाल किया है। अमरीका और उसकी खुफिया एजेंसियों ने अफगानिस्तान में तमाम तरह के आतंकवादी गुटों को पैदा किया था और 80 के दशक में सोवियत कब्ज़ाकारी सेना के खिलाफ़ लड़ने के लिए हथियार और धन दिया था। विदेशी सेना के कब्जे़ के खिलाफ़ अफगानी लोगों के जायज़ संघर्ष को अमरीका ने अपने ही साम्राज्यवादी लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इन तथाकथित इस्लामिक आतंकवादी गुटों को अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में पुनः गठित किया और पुनः तैनात किया, जिसकी मदद से वह दुनिया पर अपना दबदबा कायम करने के लिये अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ा सके।

अल-कायदा और आई.एस.आई.एस. इनमें से कुछ जाने-पहचाने गुटों के नाम हैं। अमरीका ने इराक व लिबिया को बर्बाद करने और उनको दबाने के लिए तथा सिरिया, यमन, सोमालिया व नाइजीरिया में अस्थिरता फैलाने के लिए इन आतंकवादी गुटों का इस्तेमाल किया है। पूरे पश्चिम एशिया में गुटवादी और नस्लवादी हिंसा को भड़काकर इस क्षेत्र का नक्शा बदलने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद ने आई.एस.आई.एस. को पैदा किया था। 

“आतंकवाद पर जंग” चलाना तो दूर, अमरीकी साम्राज्यवादी अफगानी और उन अन्य देशों के लोगों के खिलाफ़ युद्ध कर रहे हैं, जो अपनी संप्रभुता की हिफाज़त के लिये लड़ रहे हैं।

अमरीका ने बड़े ही मानवद्वेशी तरीके से जनसंहार के हथियारों के परीक्षण के लिए, अफगानिस्तान का इस्तेमाल किया। वह वैसी ही धमकी उन सभी देशों और राज्यों को भी दे रहा है, जो उसके रास्ते में रुकावट बन रहे हैं। अमरीका की सेना ने कभी भी इस बात को नहीं छुपाया है कि उन्होंने एम.ओ.ए.बी. का विकास “गंभीर खतरे वाली जगहों पर गहराई में छुपे हुए निशानों को खत्म करने के लिए किया है”। ईरान और डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तरी कोरिया) के परमाणु और सरकारी तंत्र को भविष्य में निशाना बनाने की चर्चा खुलेआम की जाती है।

अफगानिस्तान पर एम.ओ.ए.बी. का गिराया जाना, इस बात का एक और संकेत है कि अमरीकी साम्राज्यवादी पूरे एशिया पर अपने दबदबे को कायम रखने के लिए बड़े ही खतरनाक और तबाहकारी रास्ते पर चल रहे हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद उत्तरी कोरिया को खुलेआम धमकी दे रहा है। हालात को और भड़काने के लिए उन्होंने कोरिया के आसपास के समंदर में अपनी पेसिफिक फ्लीट को तैनात किया है। दक्षिण कोरिया में उन्होंने थाड मिसाइल रक्षा कवच की तैनाती की है। 10 अप्रैल को अमरीकी साम्राज्यवादियों ने सिरिया पर क्रूज़ मिसाइल से हमला किया।

अमरीकी साम्राज्यवादी सिरिया पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने अपने ही देश के लोगों पर रासायनिक हमला किया है। ये सारे आरोप पूरी तरह से झूठे साबित हुए हैं। अमरीकी खुफिया एजेंसियों और सशस्त्र बलों के कई लोगों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया है कि सिरियाई सेना ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है। बल्कि कुछ बागी गुटों ने जो भंडारन टैंकों में रासायनिक हथियार जमा कर रखे थे, उन पर हवाई हमले से विस्फोट हो गया।

सभी तथ्य यह दिखाते हैं कि सिरिया में अमरीकी साम्राज्यवादी, अपने द्वारा प्रायोजित आई.एस.आई.एस. और अन्य आतंकवादी गुटों को सीरियाई सरकार के हाथों हारने से बचाने के लिए वे अंधाधुंध कोशिश कर रहे हैं। अमरीका सिरिया को बर्बाद करके उसके टुकड़े-टुकड़े करना चाहता है और इन टुकड़ों पर उन आतंकवादी गुटों का कब्ज़ा चाहता है जो अमरीका के आदेशों पर काम करते हैं।   

दुनिया में हालात बेहद खतरनाक बनते जा रहे हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद जिस रास्ते पर चल रहा है वह एशिया के तमाम देशों व लोगों तथा पूरी दुनिया में शांति के लिए बहुत ही खतरनाक है। अमरीकी साम्राज्यवाद के इस आक्रामक अभियान के खिलाफ़ दुनियाभर के राष्ट्रों और लोगों की व्यापक राजनीतिक एकता बनायी जा सकती है और बनायी जानी चाहिए।  

अमरीकी साम्राज्यवाद को अफगानिस्तान के मामले में किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने का कोई भी अधिकार नहीं है, जैसे कि सोवियत सेना को भी उस देश में घुसने का काई अधिकार नहीं था। अफगानिस्तान के भविष्य का फैसला करने का अधिकार केवल अफगानिस्तान के लोगों को है, किसी और को नहीं।

हिन्दोस्तान के लोगों को यह मांग करनी चाहिए कि अमरीकी और तमाम विदेशी शक्तियों को अफगानिस्तान से तुरंत निकल जाना होगा। हमें हिन्दोस्तान की सरकार से यह मांग करनी चाहिए कि वह अमरीका द्वारा की जा रही आपराधिक बमबारी और खतरनाक जंग की तैयारी की निंदा करे और दक्षिण एशिया तथा दुनियाभर के सभी राष्ट्रों, लोगों और देशों की संप्रभुता की हिफ़ाज़त में आवाज़ उठायें।  

Tag:    Against Imperialist War    May 1-15 2017    Statements    War & Peace     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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