सरकार ने कर्ज़ न चुकाने वाले बड़े पूंजीपतियों के नामों को सार्वजनिक करने से किया इंकार

Submitted by cgpiadmin on सोम, 01/05/2017 - 14:58

17 अप्रैल को केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत को कर्ज़ वापस न करने के वालों के नामों की सूची सौंपी। इस सूची में उन सभी पूंजीपतियों की कंपनियों के नाम हैं, जिन पर बैंकों का 500 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज़ बकाया है। हिन्दोस्तानी सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक दोनों ने ही यह दलील दी है कि तथाकथित रूप से “देश के आर्थिक हितों को सुरक्षित” रखने के लिए कर्ज़ा न चुकाने वालों के नामों को गुप्त रखा जाना चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने इस बात को मान लिया है। जनवरी में दिए गए सर्वोच्च अदालत के आदेश का हवाला देते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री ने एक शपथ पत्र दायर किया है जिसमें पूंजीपति कर्ज़दारों की सूची शामिल की गयी है। इसे केवल अदालत की जानकारी के लिए पेश किया गया है। वित्त मंत्रालय ने इस बात का खुलासा किया है कि कर्ज़ वसूली न्यायाधिकरण के पास कर्ज़ा न चुकाने वालों के 2277 मामले हैं, जिन्होंने पिछले 10 साल से कर्ज़ वापस नहीं किया है। ऐसे कर्जे़ की रकम 5 लाख करोड़ रुपये आंकी जाती है।

हिन्दोस्तान की बैंकिंग व्यवस्था पर “नॉन-परफोर्मिंग असेट” यानी न चुकाये गये कर्जे़ का बहुत बड़ा बोझा है। पिछले कुछ वर्षों में इस न चुकाये गये कर्ज़े का बढ़ता पैमाना चर्चा और सबतरफा चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसी हालत में सरकार और रिज़र्व बैंक का यह दावा कि कर्ज़ वापस न करने वालों के नाम का खुलासा करना देश के हित के खिलाफ़ है और इस बात पर सर्वोच्च अदालत की सहमति, इन सभी संस्थानों के वर्ग चरित्र को उजागर करती है। 

इन सभी गुनहगारों की पहचान को सार्वजनिक करना और उनसे न चुकाये गये कर्ज़ की पूरी वसूली करना, निश्चित रूप से मज़दूर वर्ग और सारे जन समुदाय के हित में है। पिछले कुछ सालों में बढ़़ते न चुकाये गये कर्ज़ो की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में संकट चर्चा का विषय बन चुका है। इस संदर्भ में केन्द्र सरकार तथा रिज़र्व बैंक का दावा कि इन बड़े पूंजीपति कर्ज़दारों के नामों का खुलासा करना राज्य के हित के खिलाफ़ जाता है और सर्वोच्च अदालत द्वारा इस दावे को मान लेना इन सभी संस्थानों के वर्ग चरित्र को दर्शाता है।

गुनहगारों की पहचान तथा न चुकाये गये कर्जे़ की वजह से होने वाले संकट के लिए कर्ज़दारों से भुगतान करवाना मज़दूर वर्ग और देश की बहुसंख्यक जनता के हित में है। लोगों में यह मांग बढ़ती जा रही है कि कर्ज़ वापस न करने वालों के खिलाफ़ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए और इसके साथ उनकी सारी संपत्ति को जब्त कर लिया जाना चाहिए। यही वजह है कि जिन बड़े सरमायदारों ने लोगों के धन को लूटा है, वे नहीं चाहते हैं कि उनके नामों का सबके सामने खुलासा हो। इसलिए कर्ज़ वापस न करने वालों की सूची को सार्वजनिक करना, बड़े सरमायदारों के हितों के खिलाफ़ है। 

“देश के आर्थिक हितों” की हिफ़ाज़त करने के नाम पर कर्ज़ वापस न करने वाले बड़े पूंजीपतियों को बचाया जाना, यह साफ दिखाता है कि हिन्दोस्तानी राज्य पूंजीपति वर्ग की हुकूमत का साधन है, जिसकी अगुवाई इज़ारेदार घराने करते हैं। राज्य के तमाम संस्थान जिनमें केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक और सर्वोच्च अदालत शामिल हैं, ये सब जनहित का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। ये सब संस्थान और तंत्र सार्वजनिक धन के लुटेरों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी अगुवाई इज़ारेदार घराने करते हैं।

जब प्रधानमंत्री और कुछ अन्य मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी “देश के आर्थिक हितों” की बात करते हैं, तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि वे पूंजीपति वर्ग के हितों की बात कर रहे हैं, जिसकी अगुवाई इज़ारेदार घराने करते हैं।

Tag:    May 1-15 2017    Political-Economy    Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)