कश्मीर में सेना द्वारा युवक का “मानव ढाल” के रूप में इस्तेमाल :

Submitted by cgpiadmin on सोम, 01/05/2017 - 15:01

कश्मीर समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है!

9 अप्रैल को श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के गांवों में उप-चुनावों के दौरान चलने वाली एक सेना की जीप के सामने बंधे युवक के वीडियो ने देशभर में ज़मीर के अधिकार को मानने वाले महिलाओं और पुरुषों को इसके विरोध में अपनी आवाज़ को उठाने के लिए उत्तेजित किया है। यह घटना एक झटके में हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा कश्मीरी लोगों के साथ बर्बर और अमानवीय व्यवहार को स्थापित कर देती है।

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 9 मार्च की सुबह को कश्मीर में चिलगांव के दार नामक एक युवक, को एक सैन्य गश्तीदल द्वारा तब उठा लिया गया, जब वह अपना वोट डालने के बाद अपने परिवार में एक उत्सव के लिए जा रहा था। उसे राइफल की बट से निर्दयतापूर्वक पीटा गया और उसको अर्ध-बेहोशी की अवस्था में सेना की जीप के सामने बांधा गया तथा तीन से चार घंटे तक कई गांवों में उसका जुलूस निकाला गया। कई स्थानों पर गांव वालों ने सेना से उसे रिहा करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस पूरी दर्दनाक यात्रा के दौरान, सैनिकों ने हिंदी में लाउडस्पीकर पर घोषणा की कि “पत्थर फेंकने वालों का यही हश्र होगा।”

यह घटना याद दिलाती है कि कब्ज़ाकरी सेना कैसे शिकार बने इंसानों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करती है। यह घटना हिन्दोस्तानी राज्य के चरित्र को दिखाती है जो ऐसे व्यवहार को पूरी तरह से मान्यता प्रदान करता है और इसकी पुष्टि हिन्दोस्तानी सरकार के मुख्य अधिवक्ता के खुलेआम समर्थन होती है। यह घटना उस समय हुई थी जब हिन्दोस्तानी राज्य श्रीनगर में “लोकतांत्रिक” चुनावों के ढोंग का आयोजन कर रहा था, जिसमें 7 प्रतिशत से भी कम लोगों ने मतदान किया था।

कश्मीर के लोग हिन्दोस्तानी राज्य से पूरी तरह उदासीन हैं। वे हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा जहरीले प्रचार का शिकार बने हुए हैं, जो उन्हें और उनके अधिकारों के संघर्ष को बदनाम करता है। उन्हें हिन्दोस्तान के अन्य हिस्सों में लोगों की आंखों में लगातार “आतंकवादी”, “पाकिस्तानी एजेंट”, “एकता और अखंडता” के दुश्मन के रूप में चित्रित किया जाता है। कश्मीर के बाहर, हिन्दोस्तान के अन्य राज्यों में, कश्मीरी छात्रों को कश्मीरी होने के अपराध में नियमित रूप से कालेज परिसरों और बाज़ारों में परेशान किया जाता है और भीड़ द्वारा पीटा जाता है। 

हिन्दोस्तानी राज्य नहीं चाहता कि मज़दूर वर्ग और देश के बाकी हिस्सों में ज़मीर के अधिकार को मानने वाले महिला और पुरुष कश्मीर के लोगों पर राज्य द्वारा हो रहे राजकीय आतंकवाद के खिलाफ़ आवाज़ उठायें। कश्मीरी लोगों और उनके संघर्ष के बारे में हिन्दोस्तानी राज्य ने इतना झूठ फैलाया है कि जब एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने युवाओं को “मानव ढाल” के रूप में इस्तेमाल करने पर सेना के प्रति अपनी घृणा और विरोध व्यक्त किया तब उन पर बहुत ही उग्र रूप से राष्ट्र के दुश्मन का अरोप लगाया गया। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के बारे में कहा गया कि सेना के लिए उनकी सेवा, सेना का “अपमान” थी। 

हिन्दोस्तानी राज्य अपने सशस्त्र बलों के माध्यम से कश्मीरी लोगों पर शासन करता है। सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (आफ्स्पा), जो पिछले 27 सालों से कश्मीर में लागू है, सशस्त्र बलों और सुरक्षाकर्मियों को किसी भी तरह के कानूनी अभियोजन से पूरी तरह से प्रतिरक्षा प्रदान करता है, जिससे उन्हें अत्याचार, हत्या, महिलाओं का बलात्कार और लूट करने की पूरी छूट मिलती है। कश्मीर में नागरिक सरकारें, सेना की बंदूक की छाया में “निर्वाचित” होती हैं और उनके पास लगभग कोई शक्ति नहीं होती है। अपने भविष्य को निर्धारित करने की कश्मीरी लोगों की आकांक्षा को कुचलने के लिए पाश्विक बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कश्मीर के लोगों की राजनीतिक समस्याओं को “कानून और व्यवस्था की समस्या” के रूप में हल नहीं किया जा सकता है। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की मांग है कि आफ्स्पा को तुरंत रद्द किया जाए, सेना को अपनी बैरकों में वापस बुलाया जाए और कश्मीरी लोगों के खिलाफ़ हिन्दोस्तानी राज्य के अमानवीय आतंक को समाप्त किया जाए। यही एक शर्त है कश्मीरी लोगों की समस्या का जायज़ समाधान निकालने के लिए।

Tag:    कश्मीर में सेना    मानव ढाल    May 1-15 2017    Struggle for Rights    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)