बड़े सरमायदारों के लिए अच्छे दिन

Submitted by cgpiadmin on सोम, 01/05/2017 - 15:03

कुछ ही दिन पहले फोब्र्स पत्रिका ने हिन्दोस्तान के अरबपतियों की अपनी वार्षिक सूची जारी की, इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनकी कुल संपत्ति 2016 में 6500 करोड़ से ज्यादा थी। फोब्र्स की सूची के अनुसार इस वर्ष हिन्दोस्तान में अरबपतियों की संख्या 20 प्रतिशत से बढ़ी और अब हिन्दोस्तान में 101 अरबपति हैं। दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोगों की आबादी वाला देश अब अमीरों की संख्या के मामले में चौथे नंबर पर आ गया है। इन 101 अरबपतियों की दौलत 300 बिलियन डॉलर है (करीब 20 लाख करोड़ रुपये)। यदि यह संपत्ति हिन्दोस्तान में 25 करोड़ परिवारों में बांट दी जाय तो, हर एक परिवार के हिस्से में 80,000 रुपये आयेंगे। इन पूंजीपतियों के पास इतनी संपत्ति है कि 50 करोड़ लोगों को बाकायदा घर मिल सकते हैं। इसके अलावा इतना धन प्रत्येक परिवार के लिए पाइप से स्वच्छ जल और शौच की सुविधा देने के लिए पर्याप्त है।

जबकि देश के अधिकांश मज़दूर और किसान स्थिर तथा गिरते वेतन के स्तर के खिलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं, 2016 में देश के 25 बड़े पूंजीपतियों की संपत्ति सकल घरेलू उत्पाद की बढ़ोतरी दर के मुकाबले तीन गुना दर से बढ़ी है। इसका मतबल यह है कि मज़दूरों और किसानों के खून और पसीने से पैदा किये गए बेशी मूल्य का बहुत बड़ा हिस्सा इन बड़े पूंजीपतियों की जेबों में गया है।

संप्रग और राजग की सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती आई हैं जिसके चलते गरीबों को और गरीब करके अमीर और अधिक अमीर हुए हैं। ऑक्सफेम द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 50 सबसे अमीर हिन्दोस्तानियों के पास इतनी संपत्ति है जितनी कि 70 प्रतिशत हिन्दोस्तानियों के पास है। क्रेडिट सुइस द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सन 2000 से 2016 के बीच 70 प्रतिशत हिन्दोस्तानियों की संपत्ति 13.9 प्रतिशत से घटकर क्रमशः केवल 7 प्रतिशत पर आ गई है। मज़दूरों और किसानों का और अधिक शोषण करते हुए, मोदी सरकार ने बेशक बड़े पूंजीपतियों के लिए अच्छे दिन सुनिश्चित किये हैं।  

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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