मारुति मज़दूरों के बचाव में चेन्नई में विशाल रैली

Submitted by cgpiadmin on सोम, 01/05/2017 - 15:13

13 अप्रैल, 2017 को चेन्नई के चेलपॉक में स्थित सरकारी विश्राम गृह के पास हजारों मज़दूरों ने एक जोशीला विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य गुड़गांव की सत्रीय अदालत के फैसले के खिलाफ़ मज़दूर वर्ग का विरोध प्रकट करना था जिसमें मारुति के 13 मज़दूरों को उम्रकैद की सज़ा दी गई है।

मज़दूरों ने मांग की कि गिरफ्तार किये मारुति-सुजुकी, प्रिकोल व अन्य कारखानों के मज़दूरों को तुरंत रिहा किया जाये। मज़दूरों ने तमिलनाडु के किसानों की परिस्थिति पर भी चिंता व्यक्त की जो सौ वर्षों में सबसे बुरे सूखे का सामना कर रहे हैं और केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों से मांग की कि वे किसानों की जायज़ मांगों को पूरा करें।

TN Photo 3विरोध प्रदर्शन का बुलावा एटक, सीटू, ए.आई.सी.सी.टी.यू., एल.पी.एफ., डब्ल्यू.पी.टी.यू.सी., एच.एम.एस. और ए.आई.यू.टी.यू.सी. ने दिया था। तमिलनाडु के वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट ने इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसमें बैंक मज़दूर, औद्योगिक मज़दूर, परिवहन मज़दूर, ऑटो मज़दूर तथा विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं के मज़दूरों ने जोश से भाग लिया। अन्य लोगों के साथ, अशोक लेलैंड इंजन वाल्व्स, राज्य परिवहन, राने, यूकैल, कल्पाकम परमाणु ऊर्जा संयंत्र, रेलवे, ऑटो कारखानों, चैक पोईंट और एयरपोर्ट के मज़दूर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

रैली में वक्ताओं ने ध्यान दिलाया कि मज़दूरों पर हमले करने और उन्हें न्याय से वंचित रखने में हिन्दोस्तानी राज्य और पूंजीपति एकजुट हैं। जबकि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो साबित करता है कि मज़दूरों ने प्रबंधक की हत्या की या कारखाने में आग लगाई जिससे प्रबंधक की मौत हुई, फिर भी बड़े पूंजीपतियों के आदेश पर अदालत ने 13 मज़दूरों को आजीवन कारावास, चार मज़दूरों को पांच साल कारावास और 14 मज़दूरों को तीन साल कारावास की सज़ाएं दीं। वक्ताओं ने मांग की कि सभी मज़दूरों को कारावास से तुरंत रिहा किया जाये नौकरी से निकाले गये सभी मज़दूरों को मारुति प्रबंधन वापस नौकरी पर ले।

वक्ताओं ने ध्यान दिलाया कि कोयम्बटूर में प्रिकोल के मज़दूरों की भी यही कहानी है। सत्रीय अदालत ने एक ऐसे अपराध के लिये आठ मज़दूरों को दोहरे आजीवन कारावास की सज़ा दी जिससे उनका कोई ताल्लुक नहीं था। बाद में उच्च अदालत ने उनमें से 6 को निर्दोष पाया और रिहा कर दिया। अब बाकी दो मज़दूर नेताओं का मामला सर्वोच्च अदालत में है।

वक्ताओं ने मज़दूरों के अधिकारों पर पूंजीपतियों के हमलों के खिलाफ़ लड़ने के लिये मज़दूर वर्ग की एकता मज़बूत करने की अविलंब ज़रूरत पर जोर दिया।    

Tag:    उम्रकैद    विरोध प्रदर्शन    मारुति-सुजुकी    प्रिकोल    May 1-15 2017    Struggle for Rights    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)