रेल चालकों और गार्डों की 36 घंटे की भूख हड़ताल

Submitted by cgpiadmin on सोम, 01/05/2017 - 15:19

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन और ऑल इंडिया गाड्र्स काउंसिल की अगुवाई में, भारतीय रेल में काम करने वाले एक लाख से अधिक रेल चालकों और गार्डों ने भीषण गर्मी का सामना करते हुए अपनी मांगों को लेकर 25-26 अप्रैल, 2017 को देश में अलग-अलग जगहों पर 36 घंटे की भूख हड़ताल की।

Railway workers

भारतीय रेल के सभी मंडलों में भूख हड़ताल 25 अप्रैल की सुबह 8 बजे से षुरू हुई। यह हड़ताल 26 अप्रैल की रात को 8 बजे खत्म हुई।

विभिन्न मंडलों से रिपोर्ट आयी है कि भूख हड़ताल के दौरान कई लोको पायलट और गार्ड बेहोश हो गये, उन्हें अस्पताल मे भर्ती करना पड़ा और ग्लूकोज़ की बोतलें चढ़ानी पड़ीं, फिर भी उन्होंने भूख हड़ताल को जारी रखा।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेषन के महासचिव कामरेड एम.एन. प्रसाद और ऑल इंडिया गाड्र्स काउंसिल के महासचिव कामरेड ए.के. श्रीवास्तव की अगुवाई में, रेल चालकों और गार्डों ने भूख हड़ताल की।

भूख हड़ताल करने वाले रेल कर्मी यह मांग कर रहे हैं कि मालगाड़ी के गार्डों को तनावपूर्ण ड्यूटी भत्ता दिया जाये, यूनिफार्म भत्ता व अन्य सुविधायें दी जायें, रनिंग स्टाफ को पर्याप्त समय का अवकाष दिया जाये, रिक्त स्थानों को भरा जाये ताकि इंजन चालकों और गार्डों के काम का बोझ कम हो, सिग्नल व्यवस्था को उन्नत किया जाये और रेल की पटरियों की नियमित जांच की जाये, लाइन रखरखाव जैसे कार्यों के लिए अकुशल और अप्रशिक्षित ठेका कर्मचारियों की जगह पर प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की स्थाई नियुक्ति की जाये। वे मांग कर रहे हैं कि रनिंग अलाउंस कमेटी 1981 के फार्मूला अनुसार रनिंग अलाउंस सुनिष्चित किया जाये, सिग्नल पास्ड एट डेंजर (स्पाड) में न्यूनतम दंड बर्खास्तगी को पूरी तरह से खत्म किया जाये, नई पेंषन स्कीम निरस्त की जाये तथा सभी रनिंग स्टाफ को रिटायरमेंट बैनिफिट 55 प्रतिशत पर सुनिश्चित किया जाये, बिना ब्र्रेकयान व बिना गार्ड के असुरक्षित ट्रेनों का संचालन बंद किया जाये और गार्ड को संरक्षा श्रेणी में शामिल किया जाये।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी रेल कर्मियों के लंबे व कठिन संघर्ष का समर्थन करती है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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