एक-पार्टी की तानाशाही

Submitted by cgpiadmin on बुध, 03/05/2017 - 17:24

महोदय,
मैं 17 मार्च, 2017 को हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी के बयान के विषय में लिख रहा हूं जो कि मजदूर एकता लहर के 16-31 मार्च, 2017 के अंक में प्रकाशित किया गया है। जिसका शीर्षक है “बड़े सरमायदारों के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए “जनादेश” पाने में चुनावों का इस्तेमाल।”
यह बयान तब आया है जब चुनाव के परिणाम आ चुके हैं, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में जहां भाजपा विधानसभा में भारी बहुमत के साथ जीती है और उत्तराखंड में तथा गोवा में भी भारी जीत हासिल करने का दावा कर रही है। बयान में कहा गया है कि इसका मतलब राज्यसभा में भाजपा की हिस्सेदारी में वृद्धि होगी, जबकि पहले से ही लोकसभा में उसका भारी बहुमत है। इस बात को अलग तरीके से कहा जाये तो यह अनिवार्य रूप से एक पार्टी की तानाशाही है। किसी भी पार्टी द्वारा इस तरह के भारी संसदीय वर्चस्व को कई दशकों में पहली बार देखा गया है।
भाजपा के लिए इस प्रत्याशित लोकप्रिय जनादेश के पीछे क्या सच है जो कि इस तरह की शक्ति में तब्दील हो गया है, खासकर बड़े पूंजीपतियों के समर्थन के साथ और एक शातिर राजनीतिक माहौल के साथ? इस जीत के पीछे के लोगों के उद्देश्य क्या है? यह भी ध्यान दिया जाये कि इस तरह की जीत अन्य पार्टियों के बीच लोकप्रिय वोटों को अलग करके ही संभव हो पाई है, जो कि उन शक्तियों के कहने पर विभाजित हो गई है जो एकजुट हो चुके हैं और भाजपा को समर्थन देते हैं।
आगे देखा जायेगा कि विशेष रूप से भूमि सुधार क्षेत्र में कई बिलों को पारित किया जाएगा, विभिन्न वित्तीय सुधारों के लिए जो बड़े व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय स्वार्थ के लिए फायदेमंद होंगे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब तथाकथित राष्ट्रवादियों के अत्याचार के खिलाफ़ लड़ने के लिए देशभर में विवेकशील पुरुष और महिलाएं सक्रिय हो चुके हैं, जिसमें छात्रों और महिलाओं के संगठनों के साथ-साथ मजदूर वर्ग भी गहनता से लड़ रहा है। वे अपने शोषण और साथ ही किसानों, जो अमानवीय परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं और उन इजारेदार अल्पसंख्यकों और अनेक राष्ट्रीयताओं के उत्पीड़न के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं।
बड़े पूंजीपति जो देश की सारी भूमि को और इसमें शामिल सभी लोगों को अपनी संपत्ति समझते हैं, चुनाव के परिणाम से खुश हैं, क्योंकि स्पष्ट रूप से वे इस परिणाम के पीछे हैं। वे हिन्दोस्तान की जनता के कंधों पर सवार होकर, लोगों के श्रम का उपयोग करते हुए और अपने स्वयं के संवर्धन के लिए प्राकृतिक संसाधनों को लूटते हुए साम्राज्यवादी शक्तियों में शामिल होना चाहते हैं। यह सभी बड़े व्यापारिक घरानों और उनके समर्थकों के बयान से स्पष्ट प्रतीत होता है।  
वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि लोगों के पास कोई शक्ति न हो, और चुनावों के परिणाम लोगों का जनादेश होने के बजाए और सब कुछ है। अब समय आ गया है कि हिन्दोस्तान के श्रमजीवियों की अगुवाई में वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था को खत्म किया जाये। अब कार्य है ऐसी स्थिति लाने के लिए काम को आगे बढ़ाना। हमारी लड़ाई और एकता को मजबूत बनाने और पूंजीपति वर्ग के विभाजनकारी साजिश को पलटने के लिए, मैं केन्द्रीय कमेटी के आह्वान को स्वीकार करता हूं।  
आपका पाठक

के. माथुर
पुणे

Tag:    Apr 1-15 2017    Letters to Editor    Political Process     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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