हिन्दोस्तानी सैनिकों के सिर काटने की घिनौनी हरकत की निंदा करें!

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 25/05/2017 - 14:44

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाने की अमरीकी साम्राज्यवाद की साजिशों के बारे में चैकन्ने रहें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 9 मई, 2017

1 मई को कश्मीर में हिन्दोस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास, दो हिन्दोस्तानी सैनिकों की सिर कटी हुयी लाशें मिलीं। इसकी वजह से, हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच बहुत ही तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गयी है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस अमानवीय बर्बर हरकत की कड़ी निंदा करती है। यह पाकिस्तान के खिलाफ़ शत्रुता की भावनाओं को भड़काने और जंग के उन्माद को फैलाने के इरादे से की गयी हरकत है। हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच स्वाभाविक संबंध स्थापित करने के लिए, एक-दूसरे की सांस्कृतिक मंडलियों का आना-जाना, इत्यादि जैसी जो भी पहलकदमियां की जा रही थीं, उन सबको काफी धक्का पहुंचा है।

हिन्दोस्तान की सरकार ने इस बर्बरतापूर्ण हरकत को आयोजित करने के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया है। रक्षा मंत्री और सेनाध्यक्ष समेत, हिन्दोस्तानी राज्य के अगुवा प्रतिनिधि इसके बदले में सैन्य जवाब देने की धमकी दे रहे हैं।

पाकिस्तान की सरकार ने साफ कह दिया है कि इस वहशी हरकत के पीछे उसकी सेना या उसके किसी और संस्थान का कोई हाथ नहीं है। पाकिस्तानी सेना ने इस आरोप को खारिज़ किया है कि उसकी बॉर्डर एक्शन टीम की एक टुकड़ी ने नियंत्रण रेखा को पार कर इस घिनौनी हरकत को किया है। पाकिस्तान ने यह मांग की है कि इन आरोपों के समर्थन में हिन्दोस्तान “ठोस सबूत” पेश करे और हिन्दोस्तानी सेना इस घटना की जांच करने के लिये खुद “अपने अंदर” झांके।

हिन्दोस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि:

मृत हिन्दोस्तानी सैनिकों के जो खून के सैंपल लिये गये हैं और रोज़ानाला पर मिली खून की बूंदों से यह स्पष्ट होता है कि कातिल नियंत्रण रेखा पार कर वापस गये थे”

खून की बूंदों से यह स्पष्ट हो सकता है कि कातिल सीमा पार कर आये थे, परन्तु इससे यह स्पष्ट नहीं होता है कि इस घिनौनी हरकत का सरगना कौन था। यह जानी-मानी बात है कि पाकिस्तान में कई ऐसे हथियारबंद गिरोह हैं जिन्हें अमरीका की खुफिया एजेंसी, सी.आई.ए. ने स्थापित किया है, प्रशिक्षण तथा धन दिया है। ये हथियारबंद गिरोह अमरीकी साम्राज्यवाद के रणनैतिक इरादों को पूरा करने के लिये, पाकिस्तान, हिन्दोस्तान और इस इलाके के अन्य देशों में तरह-तरह की ऐसी हरकतें करते रहते हैं। इसके अलावा, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी, आई.एस.आई. के लिये काम करने वाले कई गिरोह भी हैं। यह भी एक साबित तथ्य है कि हिन्दोस्तानी खुफिया एजेंसी, राॅ के कई हथियारबंद गिरोह हैं जो पाकिस्तान के अंदर काम करते हैं।

यह बहुत स्पष्ट है कि इस घिनौनी हरकत को बहुत सोच-समझकर और पूरी राजनीतिक गणना के साथ किया गया है। अतः वर्तमान भू-राजनैतिक संदर्भ जिसमें यह घटना हुई है, उसका हमें ठंडे दिमाग से विश्लेषण करना होगा।

“आतंकवाद पर जंग” के नारे के साथ अमरीकी साम्राज्यवाद ने अफगानिस्तान को तहस-नहस कर दिया है और पाकिस्तान की संप्रभुता को खतरे में डाल दिया है। अमरीका ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अपना आधार बनाकर, इस इलाके के अन्य देशों की सत्ताओं को अस्थाई करने तथा विनाश फैलाने का काम किया है। अमरीका खुद ही तरह-तरह के आतंकवादी गिरोहों और तथाकथित गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) को स्थापित करता है तथा प्रशिक्षण देता है और फिर उन्हें अलग-अलग देशों में अस्थाई हालतें व अराजकता फैलाने के लिये लामबंध करता है। ईरान, रूस, मध्य एशियाई गणराज्यों, दक्षिण एशिया, चीन आदि में उसने ऐसा ही किया है।

अमरीका की अगुवाई में नाटो द्वारा 2001 में अफगानिस्तान पर बर्बरतापूर्ण हमले के 15 से अधिक वर्ष बाद, आज यह बहुत स्पष्ट है कि अमरीकी साम्राज्यवादी अफगानिस्तान में शांति और राजनीतिक स्थिरता नहीं चाहते हैं। उनकी योजना है अफगानिस्तान के इलाके का तरह-तरह के आतंकवादी गिरोहों को स्थापित और पोषित करने के लिये इस्तेमान करते रहना और ज़रूरत होने पर अपने विरोधियों व शत्रुओं के खिलाफ़ इन गिरोहों का प्रयोग करना। हाल में अमरीका ने अफगानिस्तान पर जो महाबम गिराया था, उससे यह भी स्पष्ट होता है कि अमरीकी साम्राज्यवादी अपने जंग के हालिया हथियारों का परीक्षण करने के लिये भी अफगानिस्तान के इलाके का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान के देशभक्त लोगों ने अपने संघर्ष से यह दिखा दिया है कि वे तब तक चैन की सांस नहीं लेंगे जब तक विदेशी कब्ज़ाकारी सेनाओं को उनके देश से बाहर नहीं भगा देते।

इन हालतों में, रूस, ईरान, चीन और पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की विभिन्न राजनीतिक ताक़तों के साथ मिलकर एक पहल शुरू की है, ताकि वहां शांति और स्थिरता बहाल की जा सके। हिन्दोस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने इस पहल के हिस्सा बतौर हाल में माॅस्को में हुई एक बैठक में भाग लिया था।

परन्तु अमरीकी साम्राज्यवादी इस पहल को नष्ट करने पर तुले हुये हैं। वे इसे नष्ट करने के लिये यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि हिन्दोस्तान इस पहल में सहयोग न दे।

इन सभी घटनाओं और गतिविधियों से यह साफ हो जाता है कि हिन्दोस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास हिन्दोस्तानी सैनिकों की हत्या करने और सिर काटने की यह जघन्य हरकत इस इरादे से की गई है कि हमारे दोनों पड़ोसी देश आपस में लड़ते रहें। रूस, ईरान, चीन और पाकिस्तान द्वारा शुरू की गई, अफगानिस्तान में शांति लाने की पहलकदमी को नष्ट करने का अमरीकी इरादा इससे पूरा होता है।

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के शासकों की प्रतिक्रिया बहुत ही अदूरदर्शी है। एक-दूसरे पर इल्जाम लगाकर, वे अमरीकी साम्राज्यवादियों के दांव-पेच में खुद को फंसा रहे हैं।

हिन्दोस्तान की सरकार द्वारा पाकिस्तान को दोषी ठहराना, यह पाकिस्तान को हव्वा बनाने की राजनीति से प्रेरित है। हिन्दोस्तानी शासक वर्ग चाहता है कि सभी लोग यह मान लें कि पाकिस्तान एक दुष्ट राज्य है जो बार-बार इस प्रकार के भयानक अपराध करता रहता है। हिन्दोस्तानी शासक वर्ग उसी रास्ते पर चल रहा है, जिस पर चलकर अमरीकी साम्राज्यवादियों ने पहले इराक और लिबिया की सरकरों को हव्वा बनाया, फिर उन पर हमला किया और अब सिरिया व उत्तर कोरिया की सरकारों के साथ भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहा है।

हिन्दोस्तानी राज्य की पाकिस्तान के बारे में गलत सूचना फैलाने और उसे हव्वा बनाने की नीति हिन्दोस्तान के लोगों या इस इलाके के किसी भी देश के लोगों के हित में नहीं है। यह दक्षिण एशिया में शांति और सामाजिक प्रगति के हितों के खिलाफ़ है। यह नीति अमरीकी साम्राज्यवाद के हितों के अनुकूल है, जो एशिया पर अपना प्रभुत्व जमाने के अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिये हिन्दोस्तान के बड़े सरमायदारों की साम्राज्यवादी आकांक्षाओं का फायदा उठाना चाहता है।

हमारे देश के मज़दूर वर्ग और सभी साम्राज्यवाद-विरोधी व शांति पसंद ताक़तों को पाकिस्तान के खिलाफ़ इस शत्रुतापूर्ण जंग के उन्माद को फौरन रोकने की मांग करनी होगी। हमें खुफियाकर्म, सैनिक या भू-राजनैतिक रणनीति में अमरीका के साथ हिन्दोस्तानी राज्य के किसी भी प्रकार के सहकार्य को फौरन रोकने की मांग करनी होगी। हमें यह मांग करनी होगी कि हिन्दोस्तान की सरकार अफगानिस्तान, हिन्दोस्तानी उपमहाद्वीप और पूरे दक्षिण एशिया में शांति बहाल करने के हित में, असूलों के अनुसार जिम्मेदारी के साथ काम ले।

Tag:    सिर काटने    तनावपूर्ण    ठोस सबूत    May 1-15 2017    Statements    Communalism     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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