चेन्नई में राज्य परिवहन मज़दूरों की ज़ोरदार हड़ताल

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 01/06/2017 - 12:02

14 मई, 2017 से तमिलनाडु में लगभग डेढ़ लाख राज्य परिवहन मज़दूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये मज़दूर राज्य में करीबन 23,000 बसें चलाते हैं और रोज 2.25 करोड़ यात्रियों को लेकर चलते हैं। वे वेतन और सेवानिवृत्ति की बकाया राशि न मिलने का विरोध करते हुए हड़ताल पर गए हैं। 

Striking Transport workers in Chennai

तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम ने मज़दूरों के वेतन से वैधानिक कटौती के रूप में 4500 करोड़ रुपए काट लिए थे, लेकिन निगम ने इस राशि को भविष्य निधि, क्रेडिट सोसाइटी और अन्य संस्थानों के खातों में जमा नहीं किया था, जिसके लिए ये कटौती की गई थी। इसके बजाय मज़दूरों के वेतन से कटौती की गई राशि का इस्तेमाल निगम के अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया। इस वजह से वे भविष्य निधि, क्रेडिट सोसाइटी और अन्य फंड, मज़दूरों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर रहे हैं। मज़दूर मांग कर रहे हैं कि उनकी चोरी की गई धनराशि, जिसका अवैध रूप से दुरुपयोग किया गया, इस राशि को तुरंत वैधानिक निकायों को जमा कराया जाये ताकि वे सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

निगम ने पिछले कई सालों से, यह कहकर कि उनके पास भुगतान करने के लिए धन नहीं है इन मज़दूरों के सेवानिवृत्ति लाभ भी नहीं जमा किये हैं, जैसे कि भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, अवकाश वेतन, पेंशन आदि। कुल 1700 करोड़ रुपए इस प्रकार से सेवानिवृत्त मज़दूरों को दिए जाने बाकी हैं। वर्तमान में सेवारत मज़दूरों को वेतन और देयराशि का भुगतान नहीं किया गया है जो कि करीब 300 करोड़ रुपए है। तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम के मज़दूरों के लिए 12वां वेतन समझौता सितंबर 2013 से लागू होना था। हालांकि मज़दूरों को समझौते के अनुसार उनकी मज़दूरी और भत्तों के एक बड़े हिस्से भुगतान नहीं किया गया था, जबकि प्रबंधन द्वारा इनपर हस्ताक्षर किए गए थे और यह सहमति हुई थी कि नए वेतन संशोधन (13वां समझौता) पर बातचीत होने के बाद, यह सितंबर 2016 से लागू होना चाहिए था। अब तक किसी भी तरह का समझौता करने की ओर कोई प्रगति नहीं हुई है। परिवहन मज़दूर और अन्य सरकारी सेवाओं के मज़दूरों के वतनों में कई विसंगतियां हैं।

तमिलनाडु में कार्यरत और सेवानिवृत्त मज़दूर धरना, भूख हड़ताल और अन्य कई प्रकार के विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों उतर आए हैं । ताकि उनकी समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके, लेकिन सरकार की ओर से उनको कोई जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने अपनी शिकायतों के निवारण के लिए कानूनी साधनों का उपयोग किया है लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ है। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प न होने की वजह से, मज़दूरों ने अपनी मांगों के साथ इस अनिश्चितकालीन राज्य व्यापी हड़ताल की शुरुआत की, यह जानते हुये कि इससे जनता को गंभीर रूप से असुविधा होगी। अपनी ओर से, सरकार ने वार्ता का बहाना बना रखा है, जबकि उसने हड़ताली मज़दूरों पर हिंसक कार्रवाई की है और हड़ताल के लिए घोषित की गई तारीख की पूर्व संध्या पर ही यूनियन के प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। इन हमलों के जवाब में, परिवहन मज़दूरों ने 14 मई की दोपहर से कार्य करना बंद कर दिया है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में परिवहन सेवाओं को ठप्प कर दिया है।

मज़दूरों को बांटने में सरकार असफल रही, क्योंकि वे अलग-अलग ट्रेड यूनियनों और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर एकजुट हुए। यहां तक कि सत्ताधारी पार्टी ए.आई.ए.डी.एम.के. की यूनियन के कार्यकर्ताओं और सदस्यों को बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से हड़ताल में भाग लेते हुए देखा गया। केवल चेन्नई में ही, सरकार द्वारा अवैध घोषित की गई इस हड़ताल को तोड़ने के लिए 15,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। सरकार ने हड़ताली मज़दूरों को धमकी दी कि वह उनकी जगह पर अस्थायी मज़दूरों की भर्ती करने जा रही है।

“हड़ताल के गंभीर प्रभाव” के जवाब में, उच्च अदालत की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि “ट्रेड यूनियनों के सदस्यों को सार्वजनिक परिवहन की नियमित सेवा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत काम शुरू करना होगा। यदि सदस्य काम को फिर से शुरू करने में असफल रहे, तो मुख्य सचिव और परिवहन सचिव को अनुशासनात्मक कार्रवाई की शक्ति है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ़ दंड कार्रवाई को लागू करने के लिए आवश्यक सेवाओं के रखरखाव अधिनियम (एस्मा) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।” यह न्यायपालिका का पर्दाफाश करता है जो कि, भारतीय राज्य का एक अंग है। मज़दूरों के कानून द्वारा निर्धारित फंड से अवैध तरीके से पैसे निकालने और मज़दूरों के लिए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफलता पर सवाल नहीं उठा रहा है। दूसरी ओर न्यायपालिका ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे उन मज़दूरों पर काला कानून लागू करें जो लंबे समय से अपने हक़ों की मांग कर रहे हैं।

हड़ताली परिवहन मज़दूरों के लड़ाकू समर्थन में कई मज़दूर और कर्मचारी यूनियनें जैसे कि बैंक कर्मचारी यूनियनें सरकारी कर्मचारी यूनियनें, आगे आई हैं और उन्होंने समर्थन में नोटिस और पोस्टर भी जारी किए हैं। ए.आई.ए.डी.एम.के. जो कि सत्ता में है को छोड़कर सभी कम्युनिस्ट और मज़दूरों की पार्टियों, संगठनों और सभी राजनीतिक दलों ने हड़ताल का पूरा समर्थन किया है। 

परिवहन मज़दूरों पर अन्यायपूर्ण हमलों के बढ़ते विरोध और हड़ताली मज़दूरों के लिए सब तरफा समर्थन देखते हुए, सरकार ने आंशिक रूप से कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया है। सेवानिवृत्त मज़दूरों को देय राशि का भुगतान करने के लिए, तत्काल 1250 करोड़ रुपए प्रदान करने और बकाया राशि का भुगतान सितंबर 2017 के अंत तक करने के लिए सरकार सहमत हो गयी है। जहां तक उचित खातों में वैधानिक कटौती के भुगतान का सवाल है, सरकार ने अगले तीन महीनों में “नीतिगत फैसला” लेने का वादा किया है। सरकार ने 13वें वेतन समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता को जारी रखने का भी वादा किया है। फिलहाल, इन वादों के आधार पर, परिवहन मज़दूरों ने अभी के लिए अपनी हड़ताल वापस ले ली है।

Tag:    राज्य परिवहन    अनिश्चितकालीन हड़ताल    सेवानिवृत्ति    Jun 1-15 2017    Voice of Toilers and Tillers    Privatisation    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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