हरियाणा में निर्माण मज़दूरों का संघर्ष

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 01/06/2017 - 12:05

9 मई को कुरुक्षेत्र में निर्माण कार्य मज़दूर मिस्त्री यूनियन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हरियाणा सरकार व श्रम कल्याण बोर्ड की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ़ डी.सी. कार्यालाय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ये मज़दूर मुख्यतः असंगठित क्षेत्र के हैं और उन्हें सरकारी श्रम कानूनों के दायरे से बिल्कुल बाहर रखा गया है। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में थे - यूनियन के जिला प्रधान कुलदीप सिंह, प्रांतीय प्रधान करनैल सिंह तथा जिला सचिव देवी दयाल, प्रांतीय सचिव सुरेश कुमार, जिला उप प्रधान चांदीराम, प्रचार सचिव ईश्वर गुहना और उषा कुमारी।

Workers march in Kurukshetra

Construction workers marching in Kurukshetra, Haryana

वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार की घोषणाओं का पिटारा खोल दिया गया है, जैसा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार भी करती थी। लेकिन ज़मीनी स्तर पर ये घोषणाएं कहीं नज़र नहीं आतीं। पंजीकृत मज़दूरों को निःशुल्क सोलर होम लाईट सिस्टम उपलब्ध कराने, स्मार्ट कार्ड दिलाने, बच्चों की पढ़ाई जैसे आई.टी.आई., मेडिकल, कानूनी पढ़ाई का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा दिलवाने, श्रमिकों का आॅनलाइन पंजीकरण कराने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत श्रमिक और उनके परिवार के सदस्यों को 50,000 रुपये तक का इलाज मुफ्त करवाने, आदि की बहुत सी घोषणायें की गई हैं, लेकिन ये घोषणाएं सफेद झूठ के अलावा कुछ नहीं हैं। कुरुक्षेत्र जिला में तो 6 माह से भी ज्यादा समय से श्रमिकों का पंजीकरण ही नहीं किया गया है। योजनायें और घोषणाएं कागजों तक ही महदूद हैं इनका ज़मीनी स्तर पर वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है।

अधिसूचित योजनाओं के लाभ प्राप्त करने के लिये भी श्रमिकों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं पर इसके बावजूद कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें ये लाभ वास्तव में मिलेंगे।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि श्रमिकों को समझना होगा कि इस पूंजीवादी व्यवस्था में तमाम सरकारें पूंजीपतियों के हितों का प्रबंधन करने वाली कमेटियों के अलावा और कुछ नहीं हैं। सभी वक्ताओं का यही आह्वान था कि श्रमिकों की मुक्ति का रास्ता एकजुट होकर समाजवादी समाज की स्थापना के लिए संघर्ष का रास्ता है। उन्हें अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए भी सतत संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा।

यूनियन की ओर से कुरुक्षेत्र के डी.सी. को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से यूनियन ने चेतावनी देते हुए कहा कि श्रमिकों के साथ यह धोखाधड़ी बंद की जाए, उनकी मांगों व समस्याओं का जल्द समाधन किया जाए वरना इसके लिए यूनियन को मजबूरन बडे़ स्तर पर आंदोलन चलाना पड़ेगा।

Tag:    श्रम कल्याण बोर्ड    असंगठित क्षेत्र    Jun 1-15 2017    Voice of Toilers and Tillers    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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