देश में बढ़ती बेरोज़गारी

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 01/06/2017 - 12:14

नई दिल्ली में स्थित सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज़ (सी.ई.एस.) के द्वारा 12 मई, 2017 को प्रकाशित की गई, इंडिया एक्सक्ल्यूशन रिपोर्ट 2016 में श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बताया गया है कि वर्ष 2015 में सिर्फ 1,35,000 नौकरियों का सृजन हुआ है जो कि वर्ष 2011 में 9,30,000 के आंकड़े की तुलना में काफी कम है। इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि खास करके आई.टी. क्षेत्र में मौजूदा नौकरियों का ख़ात्मा हो रहा है और हजारों मज़दूरों को अपनी नौकरियों से वर्ष 2016 में निकाला गया है। यह प्रवृत्ति इस साल भी जारी है। हाल के महीनों में, कॉग्निजेंट, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और कैपजीमिनी जैसी बड़ी आई.टी. कंपनियों में 20,000 से ज्यादा कर्मचारी नोटिस पर रखे गए हैं और किसी भी समय निकाले जा सकते हैं। विद्यमान प्रौद्योगिकियों में डिजिटलीकरण और बहुतायत की वजह से दो लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

New jobs createdआई.टी. क्षेत्र के इज़ारेदार पूंजीपति जो मज़दूरों को नौकरियों से निकाल रहे हैं, परन्तु वे इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं कि यह एक अभूतपूर्व छंटनी है, क्योंकि वे इस स्थिति के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। वे यह स्वीकार नहीं करना चाहते हैं कि उनके मुनाफे़ घट रहे हैं और इसलिए उन्हें इस प्रतिस्पर्धी बाज़ार में टिके रहने के लिए श्रमिकों की संख्या कम करने की मजबूरी है। इसके बजाय, वे स्थिति को छिपाने के लिए तर्क दे रहे हैं कि ये कदम ’कार्य मूल्यांकन’ और कार्य को ‘तर्कसंगत बनाने’ की वजह से लिये गये हैं। अधिकांश आई.टी. पेशेवर जिन्हें नौकरियों को छोड़ने के लिए कहा गया है, उनके पास 10 से 20 साल का अनुभव है और वे मध्य और वरिष्ठ स्तर के पेशेवर हैं। परन्तु इस स्थिति में भी हर महीने में शीर्ष प्रबंधन पेशेवर शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये कमा रहा है।

बेरोज़गारी की समस्या कई कारकों की वजह से आई.टी. क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी है। इनमें से एक कारक है कि पूंजी को हिन्दोस्तान से फिलीपींस जैसे देशों में भेजा जाता है जहां वेतन यहां से कम है। दूसरा कारक यह है कि वैश्विक व्यापार में मंदी के कारण सेवाओं के निर्यात में कटौती हो रही है और कृषि, निर्माण और उत्पादन क्षेत्र, जो रोज़गार उपलब्ध कराने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, उनमें संवर्धन बहुत कम है। दुनियाभर में सबसे ज्यादा, नौजवान आबादी हिन्दोस्तान में है, जो सालाना 1 करोड़ नए मज़दूरों को मज़दूर वर्ग में जोड़ती है।

इतने बड़े पैमान पर की गई छंटनी, पूंजीवादी व्यवस्था की क्रूर और मुनाफे पर केंद्रित प्रवृति को उजागर करती है। इस व्यवस्था में मज़दूरों को नौकरी देने और उन्हें नौकरी से निकालने की पूंजीपतियों को पूरी छूट है। ऐसा करने में इज़ारेदार और बड़े निगम कोई बाधा नहीं चाहते, इसलिए वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी क्षेत्रों के मौजूदा श्रम कानूनों में सुधार हों। इन सुधारों के ज़रिये वे कानूनी संरक्षण चाहते हैं, ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को ठेके या फिक्सड टाईम कांट्रेक्ट के आधार पर नौकरी पर रखने की अनुमति मिले।

रोज़गार की तलाश कर रहे और रोज़गार में कार्यरत मज़दूरों के लिए यह एक गंभीर स्थिति है। उनके लिये एक जोखिमभरा और अनिश्चित भविष्य दिख रहा है। रोज़गार के हक़ और सुरक्षा की लड़ाई के लिए अपने आप को तेज़ी से एक संयुक्त शक्ति के रूप में संगठित होना ही मज़दूर वर्ग की प्रतिक्रिया होनी चाहिए।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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