आतंकवाद का मुखिया ‘आतंकवाद से मुकाबले’ का उपदेश दे रहा है और ईरान को बदनाम कर रहा है

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 01/06/2017 - 12:27

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब में 21 मई को राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान 50 इस्लामिक राज्यों के नेताओं को संबोधित किया। अमरीकी साम्राज्यवाद जो कि आज दुनिया में आतंकवाद का मुख्य स्रोत है, उसके नेता के रूप में, ‘आतंकवाद का मुकाबला करने‘ पर ट्रम्प का भाषण पाखंड, झूठ और झूठे दावों से भरा था। इसका उद्देश्य इस वास्तविकता को छुपाने का प्रयास करना था कि अमरीकी साम्राज्यवाद दुनिया पर अपना कब्ज़ा जमाने की अपनी भू-राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी समूहों को संगठित करने, धन देने, प्रशिक्षण देने और आतंकवाद का स्रोत अमरीकी साम्राज्यवाद है।

ईरान के खिलाफ़ अमरीकी साम्राज्यवादी झूठ और अपराध

लगभग 38 साल पहले जब ईरान की क्रांति हुई थी, तब से अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनके सहयोगियों ने ईरान को हमले का निशाना बना रखा है। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इराक को ईरान के खिलाफ़ खूनी युद्ध शुरू करने के लिए उकसाया था, जिसमें लाखों लोग घायल हुए और मारे गए तथा ईरानी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा। ईरान ने सैनिक घेराबंदी और गंभीर आर्थिक नाकेबंदी का सामना किया है, केवल इसलिए कि उसने ऐसी शासन व्यवस्था बरकरार रखने की हिम्मत की है जो अमरीका को पसंद नहीं है। इसलिए भी क्योंकि ईरान की सरकार ने लूट की गतिविधियों और एंग्लो-अमरीकी साम्राज्यवादियों तथा उनके सहयोगियों की अफगानिस्तान, इराक, लिबिया, सिरिया और अन्य जगहों में बेशर्म हस्तक्षेप का विरोध किया है। 

ईरान के परमाणु सुविधाओं में चल रहे कंप्यूटरों पर साइबर हमलों की शुरुआत करते हुए और इज़ारेदार मीडिया में ईरान के बारे में झूठ और धोखे का प्रचार करने में अमरीकी साम्राज्यवादी और उनके सहयोगियों ने ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी है। साथ ही अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ़ प्रस्तावों को पारित करवाया, ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की निरंतर हत्या करवाई, कठोर वित्तीय प्रतिबंधों को लागू करवाया और हमले तथा युद्ध की धमकी भी दी। हिन्दोस्तान सहित अन्य देशों पर ईरान के साथ व्यापार के संबंध को तोड़ने का दबाव भी डाला गया है।

हालांकि ईरान असंख्य कठिनाइयों के सामने भी लगातार अपने मार्ग पर अडिग रहा है, और उसे अलग-थलग करने और दुनिया के मामलों में अपनी भूमिका अदा करने से वंचित करने के हर प्रयास का उसने मुकाबला किया है। 2012 में, ईरान सरकार ने सिरिया में हस्तक्षेप का विरोध करने के लिए लगभग 30 देशों की एक बैठक की मेजबानी की पहल की थी। 2015 में अमरीकी नेतृत्व को अंततः ईरान पर लगाए गए कुछ बहुत कठोर प्रतिबंधों को हटाने के लिए सहमति देनी ही पड़ी। इन प्रतिबंधों को हटाने का मतलब ओबामा प्रशासन द्वारा यह स्वीकार करना था कि अमरीका ईरान को अलग-थलग करने और अपने घुटने टेकने के लिये मजबूर करने में असफल रहा है।

यह महत्वपूर्ण है कि “आतंकवाद का मुकाबला करने” पर ट्रम्प द्वारा यह भाषण सऊदी अरब से दिया गया, जिसका अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ निकट सैन्य और रणनीतिक संबंध है। आतंकवादी संगठनों को गठित करने, पोषित करने और धन देने की अमरीकी साम्राज्यवादी रणनीति में सऊदी अरब की सक्रिय भूमिका रही है। जिनको ट्रम्प ने संबोधित किया, उनमें उन देशों के प्रमुख शामिल थे जो पश्चिम एशियाई क्षेत्र में अमरीकी साम्राज्यवाद के सबसे करीबी रणनैतिक सहयोगी हैं, जिनमें कतर, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और मिस्र शामिल हैं। ये ऐसे शासक हैं, जिनसे उनके अपने ही लोग नफ़रत करते हैं क्योंकि येे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं और काम करने वाले लोगों का क्रूर शोषण तथा महिलाओं का क्रूर दमन करते हैं।

इस यात्रा के दौरान अमरीकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि जो ट्रम्प के साथ आये थे, उन्होंने सऊदी अरब, कुवैत, कतर और बहरीन के प्रतिनिधियों के साथ सैकड़ों अरब डॉलर के सैन्य और अन्य सौदे किये। इन देशों की संपदा का उपयोग अमरीकी सैन्य उद्योग के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। जो हथियार खरीदे जायेंगे उनका इस्तेमाल साम्राज्यवाद-विरोधी और प्रतिक्रियावादी शासकों के खिलाफ़ उस इलाके में संघर्ष करने वाले लोगों को कुचलने के लिए किया जायेगा।

दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी तथा युद्ध को बढ़ावा देने वाले राज्य के मुखिया ने बेशर्मी से घोषित किया कि “हमारा नज़रिया इस क्षेत्र में और दुनिया में शांति, सुरक्षा और समृद्धि का है। ...हमारा लक्ष्य उन राष्ट्रों का गठबंधन बनाना है जो उग्रवाद को जड़ से खत्म करने का उद्देश्य रखते हैं”। उन्होंने घोषणा की कि सऊदी अरब में “उग्रवादी विचारधारा का मुकाबला करने के लिए एक नया वैश्विक केंद्र” खोला जायेगा। ये कदम विभिन्न देशों में नए आतंकवादी हमलों की शुरुआत, अस्थिरता और शासन में परिवर्तन करने और पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रामकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, अमरीकी साम्राज्यवाद और पश्चिम एशिया में उसके सहयोगियों के बीच अधिक संयोजित समन्वय का संकेत हैं।

दुनिया के वर्चस्व के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद की रणनीति में इस क्षेत्र के महत्व को उजागर करते हुए, ट्रम्प ने जोर दिया कि “पूरा क्षेत्र स्वेज़ नहर, लाल सागर और हार्मूज के जलडमरूमध्य के नौ-परिवहन के प्रमुख रास्ते में है। नौ-परिवहन में इस क्षेत्र की बहुत बड़ी क्षमता है।” ट्रम्प ने “आई.एस.आई.एस. के लिए धन को खत्म करने” की कसम खाई। उसने आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने के लिये एक समझौते की घोषणा की जिसके तहत, “अमरीका और सऊदी अरब की सह-अध्यक्षता में टेरेरिस्ट फाईनेंसिंग टारगेटिंग सेटर स्थापित किया जायेगा, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सभी सदस्य शामिल होंगे।” यह अच्छी तरह से जाना जाता है कि सऊदी अरब और कतर सहित पश्चिम एशिया में अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी आई.एस.आई.एस. और अन्य आतंकवादी समूहों के प्रमुख वित्तपोषक और संगठक रहे हैं। ट्रम्प की घोषणा “आई.एस.आई.एस. के लिए धन को खतम करना” एक संकेत हो सकता है कि अमरीकी साम्राज्यवाद अपने द्वारा स्थापित आतंकवादी समूहों के वित्तपोषण के नए तरीकों के तलाश रहा है।

ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ़ अपने गुस्से को प्रकट किया, जिसने अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी दलों के दबावों, प्रतिबंधों और ब्लैकमेलों का लगातार डटकर सामना किया है।

ट्रम्प ने ईरान पर आतंकवादियों के लिए “सुरक्षित बंदरगाह, वित्तीय सहायता और सामाजिक प्रतिष्ठा” प्रदान करने का आरोप लगाया। सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुये उसने कहा कि “लेबनान से, इराक से, यमन तक, ईरान आतंकवादियों और अन्य उग्रवादी समूहों को धन और हथियार देता है और प्रशिक्षित करता है, जो पूरे क्षेत्र में विनाश और अराजकता फैलाते हैं। दशकों तक, ईरान ने सांप्रदायिक संघर्ष और आतंक की आग को बढ़ावा दिया है। यह एक ऐसी सरकार है जो खुलेआम सामूहिक हत्या करवाने की बात करती है, इस्राइल के विनाश का वादा करती है, अमरीका के लिए मौत और इस कमरे में कई नेताओं और राष्ट्रों के विनाश की बात करती है”। वास्तविकता यह है कि ईरान पश्चिम एशिया के कई देशों के लोगों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है, जो अपने देश में साम्राज्यवाद द्वारा समर्थित दमनकारी राज से मुक्त होने की इच्छा रखते हैं। इन शासकों ने ईरान की क्रांति को नष्ट करने के लिए अमरीकी साम्राज्यवादियों का सहयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन असफल रहे हैं। ट्रम्प इन प्रतिक्रियावादी शासकों को ईरान के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अमरीका के नेतृत्व में एक साथ आने का खुला निमंत्रण दे रहा था।

ट्रम्प ने ईरान को अलग-थलग करने, अस्थिर करने और उस देश में शासन परिवर्तन करने की अमरीकी सरकार की धमकी की घोषणा की। ट्रम्प ने कहा “जब तक ईरानी शासन शांति के लिए भागीदार बनने के लिए तैयार नहीं है (अर्थात अमरीका के अनुसर चलने को तैयार नहीं है), ईरान को अलग-थलग करने के लिए ज़मीर वाले सभी राष्ट्रों को मिलकर काम करना चाहिए। उसने कहा कि ईरान द्वारा आतंकवाद के लिए वित्तपोषण बंद करवाना होगा और उस दिन की प्रार्थना करनी होगी, जब ईरानी लोगों को एक सही और उचित सरकार मिलेगी, जिसके वे हक़दार हैं”।

ईरान के खिलाफ़ ट्रंप के आरोपों को खारिज़ करते हुए ईरानी राष्ट्रपति हसन रोहानी ने 22 मई को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि “जो आतंकवादियों से लड़े हैं वे सिरियाई और इराकी लोग हैं। ईरान अपनी तरफ से उनके साथ खड़ा रहा है और खड़ा रहेगा।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि, “जो आतंकवादियों को धन देते हैं वे दावा नहीं कर सकते कि वे उनके खिलाफ़ लड़ रहे हैं”। ईरानी सरकार को अस्थिर करने के लिए ट्रम्प की धमकियों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि “सैन्य शक्ति, शक्ति का केवल एक हिस्सा है ...लेकिन सत्ता की नींव राष्ट्रीय शक्ति है”।

सऊदी अरब में ट्रम्प का भाषण एशिया के लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अमरीकी साम्राज्यवाद ने एशिया पर अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, अपने आक्रामक जंगफरोश रास्ते को नहीं बदला है। उसने यह घोषणा की कि अमरीका ईरानी शासन को खत्म कर देगा। उसके भाषण में सिरिया पर मिसाइल हमलों का संदर्भ, सऊदी अरब के शासकों द्वारा यमन पर आक्रमण और कब्ज़ा करने के लिए खुला समर्थन, पश्चिम एशिया में सैन्य कदम बढ़ाना - हमारे क्षेत्र के सभी लोगों के लिए आने वाले खतरों का संकेत है। उत्तर कोरिया को नष्ट करने के लिए खुली धमकियों के साथ, एशिया धुर्री नीति के कार्यान्वयन के द्वारा अमरीकी साम्राज्यवाद अपने नेतृत्व में चीन को घेरने और धमकाने के लिये एक सैन्य गठबंधन बना रहा है। इन सबसे यह स्पष्ट है कि अमरीकी साम्राज्यवाद अपने रास्ते में आने वाली सभी रुकावटों को नष्ट करना चाहता है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, अमरीकी साम्राज्यवाद एशिया के देशों और लोगों को एक दूसरे के खिलाफ़ लाड़वा रहा है।

Tag:    ईरान की क्रांति    खूनी युद्ध    आतंकवाद का मुखिया    Jun 1-15 2017    World/Geopolitics    War & Peace     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)