राजस्थान में मजदूर, किसान, महिला और युवा राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए संघर्ष में एकजुट हुए

Submitted by cgpiadmin on गुरु, 01/06/2017 - 12:43

शिक्षकों, किसानों, सरकारी मज़दूरों, महिलाओं और युवाओं के संगठनकर्ताओं को संयुक्त राजनीतिक चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए देखना साधारण बात नहीं है। हाल ही में इस तरह की बैठक का आयोजन लोक राज संगठन की राजस्थान परिषद की पहल पर किया गया। लोक राज संगठन एक गैर-पार्टीवादी राजनीतिक संगठन है जो लोगों को सत्ता में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

A view of the LRS meeting in Hanumangarh

मीटिंग का एक दृश्य

राजस्थान में हाल ही में कई संघर्ष और प्रदर्शन हुए हैं। शिक्षक संघ शिक्षा के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। किसानों के संगठन सिंचाई के पानी की उपलब्धता, सस्ती कीमत पर कृषि में उपयोग होने वाली वस्तुओं की उपलब्धता तथा स्थिर व लाभकारी कीमतों के साथ समय पर फसल की खरीद की मांग कर रहे हैं। राजस्थान राज्य सरकार के मज़दूर पिछले कई महीनों से ठेका प्रणाली और निजीकरण के खिलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं, समान काम के लिए समान वेतन और अस्थायी मज़दूरों के नियमितिकरण के लिए। सस्ती उच्च शिक्षा और सभी के लिए सुनिश्चित रोज़गार की मांग करते हुए युवाओं ने आंदोलन चलाये हैं। महिलाओं के संगठन सामाजिक जीवन में महिलाओं की बढ़ती असुरक्षा के खिलाफ़ युद्ध के रास्ते पर उतर आए हैं।

इस विषय पर चर्चा करने के लिए विचार गोष्ठी की गयी थी कि: “1857 के महान स्वतंत्रता संग्राम की 160वीं वर्षगांठ व महान अक्तूबर समाजवादी क्रांति के शताब्दी वर्ष पर हिन्दोस्तानी राज्य के पूंजीवादी वर्ग चरित्र में लोगों को सत्ता में लाना एक चुनौति”। बैठक का आयोजन हनुमानगढ़ नगर में 21 मई, 2017 को किया गया था।

बैठक में न्यायाधीश, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, पत्रकार, प्रोफेसर, महिला, युवा और किसान जैसे कई प्रतिभागियों की भागीदारी थी। चर्चा के दौरान, एक स्पष्ट संदेश बार-बार दोहराया गया कि ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता ने वर्ग, जाति और धार्मिक पहचान के आधार पर शोषण, असुरक्षा और उत्पीड़न से स्वतंत्रता नहीं दिलाई है। एक और महत्वपूर्ण संदेश यह था की मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को एकजुट होकर शोषण और उत्पीड़न के सभी रूपों से मुक्ति के लिए एक सांझे संघर्ष की आवश्यकता है। कई वक्ताओं ने इस तथ्य को संदर्भित किया कि रूस की अक्तूबर क्रांति में, मज़दूरों और किसानों ने सत्ता को अपने हाथों में लिया था। आज हिन्दोस्तान में भी समय की यही मांग है।

लोक राज संगठन के प्रतिनिधियों ने उन सभी लोगों में एकता के महत्व को दोहराया, जो वर्तमान प्रणाली के खिलाफ़ लड़ रहे हैं, जिसमें उन्हें सत्ता से बाहर रखा जाता है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में किसानों के संगठनों ने तमिलनाडु के किसानों को प्रेरित किया है। तमिलनाडु में शिक्षकों के संघर्ष ने दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र में शिक्षकों को प्रेरित किया है। यह एक संघर्ष है, यह हिन्दोस्तान के मालिक बनने के लिए मेहनतकश लोगों का संघर्ष है।

इस चर्चा के दौरान बताया गया कि 1857 के ग़दर ने इस मांग को जन्म दिया था कि लोगों को हिन्दोस्तान का मालिक बनना चाहिए। विद्रोहियों ने अपनी परिषद की स्थापना की और बहादुर शाह जफर को अपनी नई लोक शक्ति का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना। 2017 में वर्तमान स्थिति, एक लोकतंत्र नहीं है बल्कि एक पूंजीतंत्र है यानी पूंजी के मालिकों के लिए लोकतंत्र है। पूंजीवादी वर्ग द्वारा समर्थित दलों ने बहुमत के लोगों को सत्ता से बाहर रखा है। समय की मांग लोकतंत्र को फिर से परिभाषित करना और राज्य का पुनर्निर्माण करना है, ताकि संप्रभुता लोगों के हाथों में हो, न कि संसद में कैबिनेट जैसे अन्य संस्थानों में हो।

लोक राज संगठन के प्रमुख केंद्रीय और राज्य स्तर के पदाधिकारियों के अलावा, इस महत्वपूर्ण बैठक में सक्रिय सहभागियों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव, कर्मचारी महासंघ के पूर्व जिला अध्यक्ष, जन स्वास्थ्य अभियान विभाग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिला मंत्री और महिला संगठनों और युवा संगठनों के कई कार्यकर्ता शामिल थे।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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