सहारनपुर में जातीय हिंसा के खिलाफ़ धरना

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 21:30

5 जून, 2017 को सात कम्युनिस्ट व वामंपथी पार्टियों की राज्य स्तरीय कमेटियों ने सहारनपुर में राज्य द्वारा आयोजित जातीय हिंसा को खत्म करने और गुनहगारों को सज़ा दिलाने की मांग को लेकर, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया।

इस धरने में बड़ी संख्या में पार्टियों के कार्यकर्ता और छात्र शामिल हुए।

communal violenceगौरतलब है कि बीते महीने में 5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में भयानक जातीय हिंसा की मुहिम आयेाजित की गई थी जिसके दौरान, दलितों के घरों और संपत्तियों को निषाना बनाया गया। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर जानलेवा हमले किये गये। राज्य प्रशासन और पुलिस व सुरक्षाबल पहले तो मूक दर्शक बने रहे और अब पीड़ितों को ही सताने में लगे हुये हैं। आज तक उस क्षेत्र में जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है।

एस.यू.सी.आई. (कम्युनिस्ट) से का. आर.के. षर्मा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम-एल) लिबरेषन से का. संतोष राय, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से का. नत्थू, रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से का. निजाम, आल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक से का. धर्मेन्द्र कुमार और कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से का. संतोष कुमार ने धरने को संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने सहारनपुर में दलितों पर किये गये हमलों की कड़ी निंदा की।

वक्ताओं ने कहा कि सहारनपुर की घटना, न तो पहली ऐसी घटना है और न ही अंतिम। जाति, धर्म, भाषा, इलाका आदि के आधार पर लोगों को बांटना और खास समुदाय को निशाना बनाकर उसके खिलाफ़ अफवाहें फैलाना और झूठा प्रचार करना और कत्लेआम आयोजित करना - यह हमारे शासकों का परखा हुआ और बार-बार दोहराये जाने वाला, राज करने का तरीका है, सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो। देशी और विदेशी बड़े-बड़े इज़ारेदार पूंजीपतियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने की खातिर, हमारे शासक मज़दूरों के अधिकारों पर हमले बढ़ा रहे हैं। कर्जे़ में डूबे किसान आज सरकार की गोलियों का सामना कर रहे हैं। हजारों-हजारों नौजवान रोज़गार से निकाले जा रहे हैं। इन्हीं समस्याओं से मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों का ध्यान हटाने के लिए हमारे शासक वर्ग सांप्रदायिक और जातीय हिंसा के कांड आयोजित कर रहे हैं। झूठी अफवाहें फैलाने में पूंजीपतियों की मीडिया की सक्रिय भूमिका है। यह सब राज्य तथा उसके संस्थानों और सुरक्षाबलों की निगरानी में होता रहा है। 1984 में सिखों का कत्लेआम, 1992-93 में बाबरी मस्जिद के ध्वंस के बाद सांप्रदायिक खून-खराबा और 2002 में गुजरात में मुसलमानों का कत्लेआम - ये इसके कुछ उदाहरण हैं।

देश के तमाम इलाकों में आयोजित किये जा रहे इस प्रकार के हिंसक कांडों की निन्दा करते हुये, वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि समाज में एकता और अमन को तोड़ने वाला मुख्य कारक शासक इज़ारेदार पूंजीपति वर्ग ही है। लोगों को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय, राज्य अपने इस दायित्व का सरासर हनन कर रहा है। समाज में सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये हमें एक ऐसे नये राज्य और राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करनी होगी, जो लोगों के प्रति जवाबदेह होगी।

आंदोलित पार्टियों की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि घायलों का इलाज करने, उन्हें मुआवज़ा देने और उनके घरों को बनाने, जातीय खून-खराबा आयोजित करने वालों को फौरन कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाये और इलाके में शांति बहाल करने के लिए फौरी कदम उठाये जायें।

Tag:    सहारनपुर    जातीय हिंसा    सात कम्युनिस्ट व वामंपथी    Jun 16-30 2017    Struggle for Rights    Communalism     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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