दवा विक्रेताओं की देशव्यापी हड़ताल

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 18:30

देशभर में लगभग 9 लाख दवा विक्रेताओं ने 30 मई को अपनी मांगों के समर्थन में एक दिन की हड़ताल की। हड़ताल का बुलावा ऑफ इंडिया आर्गनाईजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (ए.आई.ओ.सी.डी.) ने दिया था। हड़ताल के समर्थन में, देशभर के लगभग सभी हिस्सों में खुदरा दवा विक्रेताओं की दुकानें बंद रहीं। उन्होंने हड़ताल के दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन भी आयोजित किया ।

खुदरा दवा विक्रेता लंबे समय से खुदरा दवा विक्रेताओं के कमीशन में वृद्धि की मांग कर रहे हैं, जो कि वर्तमान में 16 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। वे यह तर्क दे रहे हैं कि निर्धारित कमीशन मुनाफे़ के रूप में अपर्याप्त है, क्योंकि सरकार और प्रबंधनकर्ता चाहते हैं कि खुदरा दवा विक्रेता अपनी दुकानों में एयर कंडीशन सहित कुछ अन्य ढांचागत बुनियादी सुविधाओं को बनाए रखें।

हड़ताल कर रहे दवा विक्रेता, अभी हाल ही में सरकार द्वारा नियमों में किए गए बदलावों का विरोध कर रहे हैं, जिसके अनुसार उन्हें ई-पोर्टल पर दवाओं की बिक्री से संबंधित सभी सूचनाओं को घोषित करना होगा। उन्हें लगता है कि उन्हें मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके ऐसा करने में कठिनाई होगी। वे ऑनलाइन दवाखानों का भी विरोध कर रहे हैं, जो उनके व्यापार के लिए खतरा बन गये हैं और दवाओं के तर्कहीन उपयोग और नकली दवाओं की बिक्री को प्रोत्साहित करेंगे।

जैसा कि प्रमुख समाचार पत्रों में बताया गया है, दवा विक्रेताओं ने सरकार को अपनी चिंताओं के बारे में और हड़ताल के बारे में जानकारी देने के लिए अग्रिम नोटिस भी जारी किया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया था कि अस्पतालों में और आस-पास के आपातकालीन सेवा के दवाखाने खुले रहें, ताकि लोग उनकी हड़ताल के कारण परेशान न हों।

रिटेल डिस्ट्रिब्यूटर्स केमिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मीडिया से कहा कि उन्होंने बार-बार सरकार के सामने अपनी समस्याएं उठाई हैं, लेकिन उन्हें अधिकारियों के साथ मिलने का मौका भी नहीं दिया गया है। हड़ताल से कुछ घंटे पहले, उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने हड़ताल को रोकने से मना कर दिया।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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