निजीकरण के खिलाफ़ मज़दूरों ने अपने संघर्ष को तेज़ किया

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 16:30

केंद्र सरकार ने निजीकरण के कार्यक्रम की गति को बढ़ाने के अपने स्पष्ट इरादे की घोषणा की है। विमानन और रक्षा के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम निजीकरण के कार्यक्रम की सूची में सबसे ऊपर हैं। सड़क परिवहन का निजीकरण करके, राज्य सरकारें सुरक्षित, विश्वसनीय और सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रही हैं।

इन क्षेत्रों में कार्यरत मज़दूरों के साथ ही साथ संपूर्ण मज़दूर वर्ग सरकार के इस मज़दूर-विरोधी और समाज-विरोधी अजेंडे को और गहरी टक्कर दे रहे हैं।

रक्षा क्षेत्र

BEML workers protesting
सरकार की निजीकरण की नीतियों का विरोध करते हुए, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के मजदूर

राजग सरकार, रक्षा क्षेत्र में निजीकरण करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ रही है। जनवरी 2017 में सार्वजनिक क्षेत्र की मुनाफे़दार कंपनी भारत पृथ्वी मूवर्स लिमिटेड (बी.ई.एम.एल.) के निजीकरण का निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिया, इसे रक्षा क्षेत्र के सभी मज़दूरों द्वारा एक स्पष्ट चेतावनी के संकेत के रूप में लिया गया है। रक्षा क्षेत्र में, बी.ई.एम.एल. एक अगुवा उपकरण निर्माता कंपनी है और खनन तथा रेल और मेट्रो के डिब्बों के विनिर्माण में भी यह शामिल है। वर्तमान में सरकार इसके 54 प्रतिशत शेयरों की मालिक है और सरकार इन शेयरों का 26 प्रतिषत निजी हाथों में बेचने की योजना बना रही है।

बी.ई.एम.एल. के मज़दूर इस रणनैतिक निजीकरण का लगातार विरोध कर रहे हैं और इस कदम के समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी चरित्र का पर्दाफाश कर रहे हैं। मज़दूरों ने ध्यान दिलाया है कि रक्षा क्षेत्र को हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीपतियों को सौंपना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करना है। इसके साथ-साथ, वे कहते हैं कि अन्य देशों के अनुभव दिखाते हैं कि जहां निजी सैन्य-औद्योगिक परिसरों की स्थापना की गई है, वहां निजी इज़ारेदार इस क्षेत्र पर हावी हो गए हैं। अपने

अधिकतम मुनाफ़ों के लिए, इन निजी इज़ारेदारों ने जानबूझकर सैन्यीकरण को प्रोत्साहित किया है और अपने देश को विनाशकारी युद्धों के तरफ जबरदस्ती धकेला है। बी.ई.एम.एल. के अलावा, रक्षा क्षेत्र में आठ अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयां हैं। इन सभी को निजीकरण के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

रक्षा उपकरण बनाने वाली 41 फैक्ट्रियां, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) प्रयोगशालाओं, नौसैनिक डॉक यार्डों और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, में काम करने वाले चार लाख मज़दूर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

बुधवार, 24 मई को अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (ए.आई.डी.ई.एफ.) और भारतीय राष्ट्रीय रक्षा मज़दूर फेडरेशन (आई.एन.डी.डब्ल्यू.एफ.) के मज़दूरों ने गेट बैठकों का आयोजन किया और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खामरिया और ग्रे आयरन फाउंड्री के सामने प्रदर्शन आयोजित किये। इस प्रदर्शन को ग्रे आयरन फाउंड्री मज़दूर यूनियन ने नेतृत्व दिया था। एक दिन पहले, पूरे देश में, सभी 41 रक्षा उपकरण बनाने वाली फैक्ट्रियों और डी.आर.डी.ओ. कार्यालयों में विरोध प्रदर्शन किये गए मज़दूरों के बीच पैम्फलेट बांटे गए।

ये विभिन्न विरोध प्रदर्शन, रक्षा उत्पादन में निजीकरण को बढ़ाने के लिए सरकार के कदम के खिलाफ़ हैं। रक्षामंत्री अरुण जेटली के साथ बैठक करने के लिए ट्रेड यूनियनों के कई प्रयासों के विफल होने बाद और 60 से ज्यादा सांसदों, जिनमें रक्षा स्टेंडिंग कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं, को लिखे गए पत्रों का कोई जवाब न आने के बाद, ये प्रदर्शन आयोजित किये गए हैं।

विभिन्न रक्षा इकाइयों के मज़दूरों के प्रतिनिधियों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैलेंगे और संसद भवन के बाहर महीने भर की बड़ी भूख हड़ताल भी जुलाई में आयोजित की जाएगी।

एयर इंडिया

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में एक बयान दिया है कि निजी क्षेत्र, विमानन क्षेत्र में 100 प्रतिशत यातायात से निपटने में सक्षम है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार एयर इंडिया के निजीकरण के लिए नई योजनायें बना रही है। इससे पहले, आर्थिक सर्वेक्षण 2017 में यह भी सुझाव दिया गया था कि सरकार को एयर इंडिया का निजीकरण करना चाहिए, क्योंकि एयर इंडिया का कर्ज़ा कुल मिलाकर 50,000 करोड़ रुपए तक बढ़ गया है।

एयर इंडिया के निजीकरण के बारे में मंत्रिमंडल जल्द ही निर्णय लेने वाला है। वित्त मंत्री ने कहा है कि नीति आयोग ने जहाज कंपनी के विनिवेश की योजना पर नागर विमानन मंत्रालय को अपनी सिफारिशें दी हैं और मंत्रालय अब विनिवेश के सभी विकल्पों और तंत्रों का पता लगाएगा।

एयर इंडिया के मज़दूरों ने एयर इंडिया के निजीकरण का विरोध करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। एयर कॉरपोरेशन इम्प्लॉइज यूनियन (ए.सी.ई.यू.) ने एक बयान में कहा है कि एयर इंडिया के निजीकरण की सरकार की योजना संसद में दिए गए आश्वासनों सहित, उसके सभी पिछले आश्वासनों के विपरीत होगी। “हम मीडिया रिपोर्टों से मिली जानकारी को सुनकर चैंक रहे हैं और आश्चर्यचकित हैं कि सरकार एयर इंडिया का निजीकरण करने का एक-तरफा और मनमाना निर्णय लेने की कगार पर है।” ए.सी.ई.यू. में एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ के साथ-साथ उसके विमान कक्ष स्टाफ भी शामिल हैं।

इस संबंध में, राजग सरकार अपनी पूर्व में रह चुकी सरकारों के नक्शे-कदम पर चल रही है। जब से केंद्र सरकार ने निजी पार्टियों को हवाई कम्पनियां स्थापित करने की और हिन्दोस्तान के भीतर और विदेशों में परिचालन करने की अनुमति दी है, तब से एयर इंडिया का निजीकरण अजेंडे पर रहा है। इस दिशा में, एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस को मुनाफे़दार उद्यम से घाटे में जाने वाले उद्यम में बदलने के लिए जानबूझकर विनाशकारी कदम उठाये।

2007 में, कांग्रेस की अगुवाई में संप्रग सरकार ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय को जबरदस्ती करवाया, ये दावा करके कि इस संयुक्त इकाई से बचत और बेहतर वित्तीय कार्य-संपादन संभव होगा। उसने एक ही बार में 111 विमानों की खरीद का आदेश दिया, जिससे एयर इंडिया बड़े कर्ज़ में डूब गया। सरकार ने मुनाफ़ेदार मार्गों को निजी विमान सेवाओं के हवाले कर दिया। जब संप्रग सरकार ने एयर इंडिया के निजीकरण का प्रस्ताव किया, इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि वह घाटे में चला गया था, एयर इंडिया के मज़दूरों के बड़े पैमाने पर संघर्ष उभरे। इसकी वजह से, संप्रग सरकार को एयर इंडिया के निजीकरण की योजना को अस्थायी रूप से रोकने के लिए मजबूर किया गया।

2012 में, केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के वित्तीय पुनर्गठन और कायापलट की योजना के लिए फण्ड दिए। कायापलट योजना के तहत, एयर इंडिया को 2011-12 से 2021-22 तक 42,182 करोड़ रुपये का इक्विटी आदान मिलना था, जो कि कई कार्य-संपादन मापदंडों से जुड़ा हुआ था। 2015-16 तक, केंद्र ने 22,280 करोड़ रुपये की इक्विटी डाल दी थी। इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद से एयर इंडिया आर्थिक संकट की ओर जा रहा था। हालांकि, इसने 2015-16 में 105 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ दिखाया।

यूनियन के अनुसार, 2007 तक एयर इंडिया मुनाफ़ा कमा रहा था, “एक के बाद एक सरकारों द्वारा घोटालों और विनाशकारी प्रयोगों” के कारण यह एक घाटे में चलने वाला संस्थान बन गया।

वर्तमान में, एयर इंडिया-इंडियन एयरलाइंस विलय में निर्दिष्ट अनियमितताओं और 111 विमानों की खरीद, विमानों को किराये पर देने और एयर इंडिया द्वारा मुनाफ़ा बनाने वाले मार्गों को छोड़ने की जांच, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) द्वारा की जा रही है।

ए.सी.ई.यू. ने यह घोषणा की है कि सरकार अपना प्रस्ताव छोड़ दे इसकी मांग करने के लिए वह एक अभियान चलाएगी और यह भी बुलावा दिया है की सभी हितधारकों का एक मंच बनाया जाये।

हरियाणा रोडवेज़ मज़दूर

हरियाणा रोडवेज़ के मज़दूरों ने किलोमीटर योजना के तहत निजी बसों को शामिल किये जाने की राज्य सरकार की नई नीति के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। हरियाणा रोडवेज़ वर्कर्स यूनियन के बैनर के तले आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन पूरे राज्य - यमुना नगर, अंबाला, जींद, सिरसा, फतेहाबाद और सोनीपत - में किये गए थे। मज़दूरों ने रोडवेज़ कार्यशालाओं में बैठकों का आयोजन किया। उन्होंने नई परिवहन नीति की प्रतियां और निजी बसों को शामिल किये जाने के लिए सरकार द्वारा जारी निविदा सूचनाएं जलाईं।

जब पिछली सरकार के समय से ही हरियाणा रोडवेज़ के मज़दूर सड़क मार्गों के निजीकरण के खिलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं। हर बार, वादे किए गए थे, लेकिन सरकार का उन्हें पूरा करने का कोई इरादा नहीं था। नई परिवहन नीति को पहली बार नवंबर 2015 में घोषित किया गया था और इसके तहत निजी संचालकों को 250 से अधिक मार्गों पर बसें चलाने के लिए 1,600 परमिट दिए गए थे। इस साल 17 फरवरी को नीति को अधिसूचित किया गया था। सड़क मार्गों पर ड्राईवरों की कमी को पूरा करने के लिए नई नियुक्ति करने की बजाय, एक के बाद एक सरकारें सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का निजीकरण करने के इरादे से नहीं हट रहीं हैं।

इससे पहले अप्रैल में, मज़दूरों के एकजुट संघर्षों ने सरकार को 120 मज़दूरों को बहाल करने के लिए मजबूर किया - यह 120 मज़दूर यूनियन कार्यकर्ता थे जिन्हें संघर्ष को कमजोर करने के लिए निलंबित कर दिया गया था। उस समय, सरकार ने इस नीति को वापस लेने पर सहमति व्यक्त की थी लेकिन निजी संचालकों को पहले से दिए गए परमिट रद्द करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, नीति को वापस नहीं लिया गया था और सरकार द्वारा निविदा सूचना जारी किए जाने से यह संकेत मिलता है कि वह सड़क मार्गों के निजीकरण की दिशा में अपना काम जारी रख रही है। मज़दूरों ने घोषणा की है कि जब तक नीति पूरी तरह से वापस नहीं ली जाती है, तब तक वे अपने आंदोलन को जारी रखेंगे।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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