आइसन के मज़दूर संघर्षरत

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 14:30

7 जून, 2017 को हरियाणा के आई.एम.टी. रोहतक स्थित आइसन ऑटोमोटिव हरियाणा प्राइवेट लिमिटेड के संघर्षरत मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर, रोहतक के मानसरोवर में एक विशाल जनसभा की। इसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों, छात्रों और महिला संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

गौरतलब है कि आइसन ऑटोमोटिव हरियाणा प्राइवेट लिमिटेड में 700 से ज्यादा मज़दूर काम करते हैं। यह जापानी पूंजीपतियों की अगुवाई वाली आइसन ग्रुप की एक कंपनी है। आइसन ग्रुप गाड़ियों के कल-पुर्जें बनाने वाली दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। इस कंपनी की आधारशिला अप्रैल, 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा ने रखी थी।

AISIN-Worker-Protesting
धरने पर बैठे हुए आइसन के मजदूर

यह कंपनी अपनी शुरुआत से ही मज़दूरों को न्यूनतम मज़दूरी तक नहीं देती है। इसमें हक़ की मांग करने पर काम से बाहर निकालने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा, प्रबंधन मज़दूरों से गाली-गलौच के साथ पेश आता है। शोषण और लूट के खिलाफ़, अपने हक़ों की हिफाज़त में मज़दूरों ने यूनियन का पंजीकरण करने के लिए आवेदन किया, तो सरकार ने उसे खारिज़ कर दिया। प्रबंधन

ने 3 मई को 20 यूनियन कार्यकर्ताओं को कंपनी से बाहर कर दिया और कंपनी के गेट पर ताला लगा दिया। प्रबंधन द्वारा गेट पर एक नोटिस लगाया गया है जिसमें कहा गया है कि केवल वे मज़़दूर ही काम पर रखे जायेंगे, जो यूनियन में शामिल न होने का शपथपत्र देंगे।

3 मई, 2017 से ही मज़दूर अपने साथियों को काम पर वापस लेने की मांग को लेकर गेट पर धरना दे रहे हैं।

इसी बीच, 1 जून, 2013 को हरियाणा सरकार और प्रबंधन ने मिलकर धरने पर बैठे मज़दूरों पर हमला किया। 425 मज़दूरों को, जिनमें 35 महिलाएं भी थीं, गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

मज़दूर एकता लहर, आइसन मज़दूरों द्वारा यूनियन बनाने के अधिकार के लिए और निकाले गये मज़दूरों को काम पर वापस लेने के लिए चलाए जा रहे जायज़ संघर्ष का समर्थन करती है। अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे आइसन के मज़दूरों पर हरियाणा सरकार और प्रबंधन के हमले की घोर निंदा करती है।

Tag:    आइसन    न्यूनतम मज़दूरी    Jun 16-30 2017    Voice of Toilers and Tillers    Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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