रक्षा उपकरणों के उत्पादन का निजीकरण : पूंजीपतियों की मांग पूरी हुई

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 13:30

सबसे नये हथियारों के उत्पादन में, संयुक्त उपक्रम के ज़रिये वैश्विक हथियारों के उत्पादकों के साथ हिन्दोस्तानी निजी क्षेत्र की कंपनियों की भूमिका को बढ़ाने के लिये एक नयी रणनैतिक सांझेदारी (एस.पी.) नीति तैयार की गयी है।

शुरुआती तौर पर एस.पी. नीति के तहत जेट हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, पनडुब्बियां और बख्तरबंद वाहनों (टेंक व थल सेना के लड़ाकू वाहनों) के चार क्षेत्रों को खोला जायेगा। सरकार का दावा है कि एस.पी. नीति से “मेक इन इंडिया” के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा और रोज़गार में बढ़ोतरी होगी। अप्रत्यक्ष रूप से, एस.पी. नीति से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) और उसकी 50 प्रयोगशालाओं, पांच सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उद्यमों, चार पोत कारखानों और आयुध फैक्टरी बोर्ड के तहत 41 कारखानों को, दशकों से माल को तैयार करने में असफलता के लिये दंडित किया जा रहा है। इससे इन संस्थानों के लाखों कर्मियों को भी सूचित किया जा रहा है कि उनकी नौकरियां अब से सुरक्षित नहीं हैं।

एस.पी. नीति के अंतर्गत यह समझा जा रहा है कि चारों में से हर एक क्षेत्र में केवल एक ही कंपनी को लंबे समय के लिये रणनैतिक सांझेदार माना जायेगा। ऐसी कंपनी एक बहुत बड़ी कंपनी ही हो सकती है और उसकी वार्षिक बिक्री 4000 करोड़ रुपये और संपदा पूंजी 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा होनी होगी।

देश के पूंजीपतियों की यह मांग रही है कि रक्षा उपकरणों के क्षेत्र को निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिये खोला जाए। एस.पी. नीति उसी दिशा में एक कदम है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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