महाराष्ट्र के किसानों द्वारा लाभकारी मूल्य और कर्ज़ माफ़ी की मांग

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 11:30

अहमदनगर, नाशिक, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, नांदेड़ और जलगांव, आदि महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के करीबन 5-7 लाख किसानों ने जून 1 से आंदोलन शुरू किया है। वे अपने उत्पादों के लिए लाभकारी भुगतान, गारंटीकृत विपणन और कर्ज़ माफ़ी की मांग कर रहे हैं।

जिन जिलों में किसान आंदोलन कर रहे हैं वे पश्चिमी महाराष्ट्र, मुंबई, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के लिए सब्ज़ियों, फलों, दूध, मुर्गी उत्पादों और मांस के मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं। विरोध के दौरान किसानों ने मुंबई, पुणे, नासिक और औरंगाबाद जैसे शहरों तक सब्ज़ियों, फलों, दूध, मुर्गी उत्पादों और मांस की आपूर्ति करने वाले वाहनों को रोक दिया।

डेयरी किसान भी आंदोलन में शामिल हो गये हैं। आंदोलनकारी किसानों ने विरोध में अहमदनगर जिले में विभिन्न स्थानों की सड़कों पर दूध को बहाया। अकेले अहमदनगर जिले में ही 3,500 दूध संग्रह केंद्र हैं और ये केंद्र मिलकर मुंबई और पुणे सहित महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में लगभग 10 लाख लीटर दूध उपलब्ध कराते हैं। कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, नांदेड़, जलगांव और नासिक जिलों में, सब्ज़ी उत्पादकों और सहकारी दुग्ध किसानों ने भी सड़कों पर अपना उत्पादन फेंककर विरोध प्रकट किया।

किसान संगठनों को विभाजित करने की ओर एक कदम लेते हुए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने हड़ताल से एक दिन पहले, आंदोलनकारी किसानों के कुछ नेताओं से मुलाकात की और कृषि में अधिक निवेश और साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक समाधान के वादे किये। हालांकि, आंदोलनकारी किसानों ने ऐसे वादों से इनकार कर दिया जो उन्होंने कई बार सुने हैं और जो कभी भी लागू नहीं होते हैं। उन्होंने अपनी हड़ताल को जारी रखते हुए अपने उत्पादों के बेहतर मूल्य और कर्ज़ माफ़ी की मांगों को दोहराया।

किसानों के समूहों ने राज्य सरकार के सामने 18 मांगों का एक चार्टर पेश किया। इनमें शामिल हैं: संपूर्ण कर्ज़ माफ़ी और बिजली के बिलों में छूट; जो किसान आत्महत्या कर चुके हैं उनके परिवारों के लिए बैंकों और साहूकारों से लिये गये कर्ज़ों की माफी; स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का कार्यान्वयन; कृषि उत्पादों के लिए उचित लाभकारी मूल्य का भुगतान; दूध की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की जाये; 55 साल की उम्र के बाद किसानों के लिए पेंशन; टपक (ड्रीप) सिंचाई के लिए 100 प्रतिशत का अनुदान दिया जाये; और जल प्रबंधन को स्कूली पाठ्îक्रम का हिस्सा बनाया जाये।

दो साल के सूखे के कारण, महाराष्ट्र के किसानों की दीर्घकालिक समस्याएं बढ़ गई हैं। इसके साथ-साथ, नवंबर 2016 में किए गए नोटबंदी के परिणामस्वरूप किसानों को बहुत नुकसान हुए हैं। अन्य राज्यों के किसानों की तरह, महाराष्ट्र के किसानों को भी बहुत तकलीफ हुई। नये नोटों की कमी के कारण वे अपने उत्पादों को बेच नहीं पा रहे थे या व्यापारियों से पुराने नोटों में भुगतान स्वीकार करने के लिए मजबूर थे। हजारों किसान, फलों और सब्ज़ियों जैसे अत्यधिक खराब होने वाले अपने उत्पादों को फेंकने के लिए मजबूर हुए हैं। वे अपने उत्पादों को बैंकों से लेन-देन के माध्यम से भी नहीं बेच पा रहे थे, भले ही उनके पास बैंक खाते थे। ज्यादातर मामलों में वे उन्हीं बैंक खातों से लेन-देन करते थे जिनसे उन्होंने ऋण लिये थे, जिन कर्ज़ों को वे चुका नहीं पा रहे थे। इसलिए उनके उत्पादों की बिक्री के माध्यम से जो कुछ भी कमाई होती थी, उसके खो देने का खतरा उन्हें रहता था, क्योंकि उनके बैंक खातों में आए पैसे को अपने पिछले ऋणों को चुकाने के लिए बैंक द्वारा ज़ब्त कर लिया जाता था। इसके कारण अगले कृषि मौसम में निवेश करने के लिए उनके पास कोई पैसे नहीं बचते थे। इससे किसानों का संकट और भी गहरा हो गया है।

इसके अलावा नासिक जिले में, जो मुंबई और ठाणे के लिए मुख्य आपूर्ति बाज़ार है, किसान प्रस्तावित 800 किमी लंबी मुंबई-नागपुर के “समृद्धि कॉरिडोर” (प्रोस्पेरिटी कॉरीडोर) परियोजना के लिए कृषि भूमि का जबरदस्ती से अधिग्रहण किये जाने का विरोध कर रहे हैं।

किसानों के आंदोलन ने एक बार फिर से उनकी भीषण स्थिति को उजागर कर दिया है, जिसमें वे कर्ज़ से निचोड़े गए हैं, अपनी भूमि और परंपरागत व्यवसायों से जबरदस्ती हटाए गए हैं, आजीविका नहीं कमा पा रहे हैं और बर्बाद होते जा रहे हैं।

Tag:    लाभकारी मूल्य    कर्ज़ माफ़ी    दूध संग्रह    Jun 16-30 2017    Struggle for Rights    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)