मज़दूरों की भविष्य निधि में कटौती : मज़दूर वर्ग पर एक और हमले की योजना

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 10:30

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ई.पी.एफ.ओ.) एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिससे मज़दूर और मालिक, दोनों के योगदान को 12 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत कर दिया जायेगा। ई.पी.एफ.ओ. का दावा है कि इस प्रस्ताव से मज़दूरों को फायदा होगा क्योंकि इससे उनकी घर ले जाने वाली आय बढ़ जायेगी। ई.पी.एफ.ओ. इसके असली कारण को छुपाने की कोशिश कर रहा है, जो है कि मज़दूरों की भविष्य निधि में पूंजीपतियों के योगदान को कम करना।

श्रम मंत्रालय ने ई.पी.एफ.ओ. से मांग की है कि वह मज़दूरों की भविष्य निधि में मालिकों के योगदान को कम करने पर गौर करे। ई.पी.एफ.ओ. को लगा कि अगर सिर्फ मालिक के योगदान को कम किया जायेगा तो यह बहुत साफ़ तरीके से पूंजीपतियों के हित में दिखेगा। अतः उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि दोनों, मालिकों व मज़दूरों के योगदान को कम किया जायेगा और उसे मज़दूरों द्वारा अधिक घर ले जाने वाली आय के आधार पर उचित बताया जायेगा।

सेवानिवृत्त होने के बाद, अधिकांश मज़दूरों के लिये भविष्य निधि ही आय का एक प्रमुख, और बहुत मज़दूरों के लिये एकमात्र स्रोत होता है। इस प्रस्ताव का मतलब है कि सेवानिवृत्ति के बाद मज़दूरों की आय में करीब 16 प्रतिशत गिरावट आएगी।

एटक, इंटक और यहां तक कि भाजपा से जुड़ी, भारतीय मज़दूर संघ जैसे सभी सर्व हिन्द ट्रेड यूनियनों ने इस प्रस्ताव का जायज़ विरोध किया है। मज़दूर वर्ग ऐसी फर्ज़ी सफाई से गुमराह नहीं हो सकता कि उसकी घर ले जाने वाली आय में बढ़ोतरी होगी। उसे इसके असली मकसद का पर्दाफाश करना होगा कि यह पूंजीपति को मदद करने के लिये है। मज़दूर-विरोधी प्रस्ताव का डटकर विरोध करना होगा और सरकार के पूंजीपति-हितैषी चेहरे को सामने लाना होगा।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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