नोटबंदी का असर

Submitted by cgpiadmin on शुक्र, 16/06/2017 - 20:30

संपादक महोदय,

मैं मज़दूर एकता लहर का नियमित पाठक हूं। मोदी सरकार के नोटबंदी पर झूठे दावे कितने खोखले हैं, अब पूरी दुनिया को पता चल गया है। मैं पिछले महीने उत्तर प्रदेश और बिहार के बार्डर के गांवों में गया था। वहां मैंने कस्बों, देहातों में देखा की बैंकों के बाहर आज भी लोगों को अपने रुपये निकालने के लिये हफ्तों-हफ्तों लाइनें लगानी पड़ रही हैं। करीब-करीब 100 से 500 लोग हमेशा लाइनों में खड़े रहते हैं। फिर भी कोई गारंटी नहीं है कि उनको रुपये मिलेंगे। किसी-किसी ए.टी.एम. में अगर रुपये मिलते भी हैं, तो केवल 2000 से 5000 रुपये तक ही। कई लोगों ने मुझे बताया कि पिछले 15 दिनों से लाइन लगा रहे हैं लेकिन उनको खुद के पैसे ही नहीं मिल रहे हैं।

गांव और देहातों में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी अभी तक ढर्रे पर नहीं आयी है। ऐसी हालत में लोगों को शादियांे, तीज-त्यौहारों, पूजा-पाठ के अनुष्ठानों, मौत के बाद क्रियाकर्म तक के लिये भी रुपये नहीं मिल रहे हैं।

ऐसे में हमारी अच्छी परंपरायें ही काम आ रही हैं। दुकानदार शादी-विवाह में उधार राशन दे देते हैं। कपड़े वाले कपड़े भी उधार दे देते हैं, पूजा-पाठ की सामग्री उधार

मिल जाती है। किसानों को खेती के लिये बीज या खाद भी उधार में आस-पास के दुकानदारों से मिल जाता है। कुल मिलाकर आपसी मेल-जोल से लोगों का काम चल रहा है और इन कठिन परिस्थितियों में लोग ही एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। दूसरी तरफ, सरकार नोटबंदी पर बड़ी-बड़ी डींगें मारते नहीं थकती है।

आपका पाठक,

राजबीर, दिल्ली

Tag:    नोटबंदी का असर    Jun 16-30 2017    Letters to Editor    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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