राष्ट्र-विरोधी, जंग-फरोश हिन्दोस्तान-अमरीका सैनिक रणनीतिक गठबंधन का विरोध करें!

Submitted by cgpiadmin on सोम, 17/07/2017 - 03:30

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 4 जुलाई, 2017

हिन्दोस्तान के प्रधानमंत्री मोदी की अमरीका यात्रा के अंत में हिन्दोस्तान और अमरीकी सरकार द्वारा जारी संयुक्त बयान, दोनों देशों के बीच मज़बूत हो रहे ख़तरनाक सैनिक रणनीतिक गठबंधन का पर्दाफाश करता है। दुनिया की सबसे बड़ी लुटेरी, जंग-फरोश साम्राज्यवादी ताक़त, सभी देशों और लोगों की आज़ादी तथा संप्रभुता और दुनिया में शांति के सबसे बड़े दुश्मन, अमरीका को गले लगाने के लिए मोदी सरकार यह दिखा रही है कि वह सभी सावधानियों को नज़रंदाज करने के लिए तैयार है।

Modi-Trumpअमरीका की रणनीति यह है कि एशिया के तमाम देश और लोग आपसी जंग में उलझ जाएं। इस तरह से पूरे एशिया पर बिना किसी चुनौती के वह अपना दबदबा जमाना चाहता है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमरीका हिन्दोस्तान को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और दूसरे देशों की लूट में हिस्सेदारी की संभावना का लालच दे रहा है। वह जानबूझकर हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्गों को चीन, पाकिस्तान और एशिया के अन्य देशों के खिलाफ़ जंग छेड़ने के लिए उकसा रहा है।

अमरीका के साथ मिलकर अपने बाज़ार और प्रभाव वाले क्षेत्रों का विस्तार करने की संभावना के नशे में हिन्दोस्तान का हुक्मरान वर्ग तेज़ी से इस खतरनाक रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्ग का यह रास्ता हमारे देश की संप्रभुता को खतरे में डाल रहा है। हुक्मरान वर्ग हिन्दोस्तान के लोगों को तबाहकारी जंग में घसीटने की धमकी दे रहा है। हमारे देश और पूरे एशिया के लोगों के लिए बेहद खतरनाक हालात पैदा किये जा रहे हैं।

संयुक्त बयान यह ऐलान करता है कि हिन्दोस्तान और अमरीका एक सांझी रणनीति के तहत, जिसे वे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र कहते हैं, वहां मिलकर काम करेंगे। इसका मतबल है एशिया के सभी देश और अफ्रीका के पूर्वी तट के देश।

अमरीका चाहता है कि चीन की घेराबंदी में हिन्दोस्तान उसके साथ सक्रिय रूप से शामिल हो जाये। चीन का सामना करने के लिए वह हिन्दोस्तान को अत्याधुनिक हथियार बेचने का प्रस्ताव कर रहा है। इसके अलावा, अमरीका की सबसे बड़ी हथियार कंपनियां हिन्दोस्तान में अत्याधुनिक हथियारों का उत्पादन करने के लिए, हिन्दोस्तान की सबसे बड़ी इज़ारेदार कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने को भी राजी हो गयी हैं। उनकी शर्त है कि हिन्दोस्तानी राज्य इन हथियारों की खरीदी की गारंटी दे। हिन्दोस्तानी राज्य पर नियंत्रण करने वाली सबसे बड़ी इज़ारेदार कंपनियां इस संभावना से बेहद खुश हैं। हिन्दोस्तान की ये बड़ी इज़ारेदार कंपनियां हथियार प्रणाली और लड़ाकू विमान, इत्यादि बनाने वाली अमरीकी कंपनियों के साथ सांझेदारी करने के लिए दौड़ लगा रही हैं।

अमरीकी राज्य-दुनियाभर में लोगों के खिलाफ़़ गुनाह के लिए ज़िम्मेदार है

अमरीकी राज्य ने दुनियाभर में लोगों के खिलाफ अनगिनत आतंकवादी हमले किये हैं। उनकी तादाद इतनी ज़्यादा है की उनकी गिनती भी नहीं की जा सकती। अमरीकी राज्य के हाथ एशिया, अफ्रीका और लातिन अमरीका के हजारों लाखों लोगों के खून से रंगे हुए है। अमरीकी राज्य ने हजारों बहाने देकर कई देशों में “सत्ता परिवर्तन” का नाटक रचा, बेशर्मी से दूसरे देशों की प्रभुसत्ता का उल्लंघन किया, गृहयुद्ध भड़काए, जिसमें हजारों लाखों लोग मौत के घाट उतारे गए और, पूरे-पूरे देशों को सुनियोजित तरीके से तबाह कर दिया गया।

6 अगस्त और 7 अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराकर अमरीका ने दुनिया भर में यह ऐलान कर दिया कि उसने हिटलर की फासीवादी विरासत को अपना लिया है। इस हमले में जापान के दसों हजारों बेगुनाह नागरिक मारे गए या जीवन भर के लिए विकलांग हो गए।

1950-60 के दशक में, अमरीकी राज्य ने अपनी खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. का इस्तेमाल करते हुए घाना, इंडोनेशिया, चिले, और ईरान में चुनी हुई सरकारों का तख़्ता पलट आयोजित किया। कई देशों में अमरीकी राज्य ने चुने हुये नेताओं की हत्या का षडयंत्र रचा और हत्या को अंजाम दिया, इस आधार पर की वे कम्युनिस्ट थे या फिर कम्युनिस्ट समर्थक थे, और उनकी जगह पर तानाशाहों और फासीवादियों को गद्दी पर बिठाया, जिन्होंने कांगो, चिले, हैती, ईरान और इंडोनेशिया में लोगों के संघर्षों को कुचलने का काम किया।

1950 के दषक की शुरुआत में अमरीका ने कोरिया के खिलाफ वहशी जंग छेड़ दी, और लाखों करोड़ों कोरियाई लोगों का कत्लेआम किया। अमरीका कोरिया देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार है। इस समय अमरीका ने कोरियाई प्रायद्वीप में अपनी नौसेना की मौजूदगी के चलते दक्षिण कोरिया में खतरनाक मिसाइल तैनात की हैं, और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि उत्तर और दक्षिण कोरिया का पुनः मिलन ना हो जाय। 60 के दशक में अमरीका ने “देश को कम्युनिज़्म से बचाने” के नाम पर वियतनाम पर हमला किया और एजेंट ऑरेंज नाम के घातक रासायनिक हथियारों से पूरे इलाके में कारपेट बमबारी करे हुये लाखों करोड़ो वियतनामी को मौत के घाट उतार दिया, और वियतनामी लोगों के खिलाफ कई वर्षों तक सबसे वहशी आक्रामक अभियान चलाया। अंत में 1975 में वियतनामी लोगों ने अमरीकी सेना को खदेड़ बाहर भगाया।

कई दशकों से अमरीकी राज्य ने क्यूबा के खिलाफ प्रचार अभियान चलाया ताकि वह उस देश को अकेला कर सके। इसके अलावा अमरीकी राज्य ने कई बार क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का कत्ल करने की कोशिश की, और उनपर हमला किया।

अमरीका ने यूगोस्लाविया में गृहयुद्ध भड़काया और विभिन्न गुटों को हथियार देकर बड़े पैमाने पर लोगों की जिन्दगी और ज़मीन बर्बाद की।

इसके अलावा अमरीकी राज्य ने अफगानिस्तान, लीबिया, इराक, और सीरिया जैसे कई देशों पर हमला किया और उनको पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। अपने रणनैतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वहां आंतकवादी गुटों को संगठित किया और उन्हें हथियार और पैसे दिए। उसके बाद “आतंकवाद पर जंग” के नाम पर इन देशों पर बमबारी की और उन्हें बर्बाद कर दिया। अमरीकी राज्य ने बार-बार झूठ दोहराने के नाजी तरीके का इस्तेमाल करने में माहारत हासिल की है। दुनिया भर में अपना दबदबा कायम रखने के लक्ष्य से उसने तमाम झूठे प्रचार चलाये जैसे इराक के खिलाफ “जनसंहार के हथियार” होने का दावा, और ईरान में “इस्लामी कट्टरवाद” का दावा।

अमरीकी राज्य के ये सारे गुनाह झूठ के पर्दों के पीछे छुपकर किये जाते है जैसे “जनतंत्र की रखवाली”, “आतंकवाद पर जंग”, “लोगों को तानाशाह हुक्मरानों से बचाना”, इत्यादि, जबकि इसी अमरीकी राज्य नें दुनिया भर में सबसे बड़े तानाशाह, और लोगों का कत्लेआम करने वालों का समर्थन किया और उनको देश की गद्दी पर बैठाया। आज यह अमरीकी राज्य दुनियाभर में आतंकवाद का स्त्रोत है और दुनियाभर में लोकतान्त्रिक और मानव अधिकार, और दुनिया भर में शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

हिन्दोस्तान और चीन की सीमा पर दोनों देशों की सेना के बीच तनाव की परिस्थिति पैदा हो रही है। हिन्दोस्तान-पाकिस्तान सीमा पर युद्ध जैसी स्थिति तो पहले से ही मौजूद है। हिन्दोस्तान के सेना प्रमुख यह दावा कर रहे हैं कि हिन्दोस्तानी फौज़ अढ़ाई सीमा पर एक साथ जंग लड़ने की काबिलियत रखती है। इसका मतलब है कि एक चीन और एक पाकिस्तान के अलावा “आतंरिक गड़बड़ी” के खिलाफ़, यानी हिन्दोस्तानी लोगों के खिलाफ़। उनका यह दावा हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्ग की खतरनाक सोच का पर्दाफाश करता है। हिन्दोस्तान का हुक्मरान वर्ग लोगों के अधिकारों के संघर्षों को कुचलने के लिए बढ़ते पैमाने पर सशस्त्र बलों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।

हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच संयुक्त बयान “पश्चिम की ओर देखो” की नीति की बात करता है। संयुक्त बयान ऐलान करता है कि हिन्दोस्तान और अमरीका पश्चिम एशिया में अन्य “सहयोगियों” के साथ मिलकर अपनी रणनीति का संयोजन करेंगे। पश्चिम एशिया में अमरीकी साम्राज्यवाद के प्रमुख “सहयोगी” इस्राइल और सऊदी अरब हैं। पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में आक्रामक जंग और गृहयुद्ध को उकसाकर अमरीका इस क्षेत्र का नक्षा बदलने की कोशिश कर रहा है, जैसे कि उसने पहले लिबिया में किया और अब वैसा ही सिरिया में करने की कोशिश कर रहा है। अमरीका ने अपने सहयोगियों को खुले तौर से कहा है कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमरीका के साथ सैन्य गठबंधन में एकजुट हो जायें।

यह संयुक्त बयान अफगानिस्तान के मसले पर हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच सहयोग की भी बात करता है। अमरीकी और अन्य साम्राज्यवादी देशों ने अफगानी लोगों के खिलाफ़ सबसे वहशी गुनाह किये हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद की रणनीति है अफगानिस्तान में अराजकता और अस्थिरता फैलाना और इस तरह से उसे हमेशा अपने कब्जे़ में रखना। वह अफ़गानिस्तान को अन्य देशों पर हमला करने के लिए अड्डे के रूप में, साथ ही साथ जनसंहार के हथियारों का परीक्षण करने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।

हर रोज़ अमरीका उत्तर कोरिया पर परमाणु बम गिराने और उस देश में सत्ता परिवर्तन करने के लिए हमला करने की धमकी देता रहता है। उत्तर कोरिया ने कभी भी, किसी भी देश पर हमला नहीं किया है। उत्तर कोरिया को निशाना बनाते हुए, अमरीका कोरियाई प्रायद्वीप में भड़काऊ सैनिक अभ्यास आयोजित करता रहता है, कोरियाई प्रायद्वीप को वहशी जंग की कगार पर खड़ा करने के लिए अमरीका ही पूरी तरह से ज़िम्मेदार है। हिन्दोस्तान और अमरीकी सरकार द्वारा जारी संयुक्त बयान दिखाता है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ़ अमरीका द्वारा जंग की योजना का मोदी सरकार समर्थन करती है।

हिन्दोस्तान की सरकार के प्रवक्ता यह दावा कर रहे हैं कि इस संयुक्त बयान से हिन्दोस्तान ने “एक बड़ी जीत हासिल की है” क्योंकि इस बयान में सार्वजनिक तौर से यह कहा गया है कि पाकिस्तान को दूसरे देशों पर आतंकवादी कार्यवाही करने के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने पर रोक लगानी चाहिए। अमरीका दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी राज्य है। अमरीकी साम्राज्यवाद के अजेंडे को अमल में लाने के लिए अमरीका की खुफिया एजेंसी सी.आई.ए. ने हिन्दोस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई अन्य देशों में अनगिनत आतंकवादी गुट संगठित किये हुए हैं। क्या हिन्दोस्तानी राज्य सचमुच में इस बात पर यकीन करता है कि अमरीकी साम्राज्यवाद अपने रणनीतिक हितों को हासिल करने के लिए आतंकवादी गुटों का इस्तेमाल करना बंद कर देगा? यह बिल्कुल साफ है कि हिन्दोस्तानी राज्य का असलियत में आतंकवाद को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है। वह खुद अपने रणनीतिक हितों को छुपाने के लिए “आतंकवाद पर जंग” का इस्तेमाल कर रहा है, जिस तरह से अमरीका इतने वर्षों से करता आया है। हिन्दोस्तान और पाकिस्तान को हमेशा के लिए एक दूसरे का दुश्मन बनाये रखने की अमरीका की योजना में हिन्दोस्तानी राज्य सक्रिय तरीके से हिस्सा ले रहा है, ताकि ये दोनों देश किसी भी वक्त एक दूसरे पर जंग छेड़ सकें।

हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच सैनिक रणनीतिक सांझेदारी का मजबूत होना बिल्कुल भी खुशी की बात नहीं है। इसके विपरीत यह हमारे देश के लोगों की संप्रभुता के लिए बेहद खतरनाक है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कई दशकों तक पाकिस्तान का अमरीका के साथ रणनीतिक गठबंधन रहा है। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने इस इलाके में अपने साम्राज्यवादी हितों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया। अमरीकी खुफिया एजेंसियों की पैठ पाकिस्तानी राज्य में गहराई तक है। सी.आई.ए. द्वारा गठित आतंकवादी गुट पाकिस्तान में अराजकता और मार-काट मचाते रहते हैं। किसी भी तरह की सज़ा से बेख़ौफ अमरीका पाकिस्तान पर ड्रोन द्वारा हमले करता रहता है। पाकिस्तान की संप्रभुता बुरी तरह से खतरे में पड़ गयी है। अमरीका के साथ पाकिस्तान के रणनीतिक गठबंधन के लिए पाकिस्तान के लोग बहुत बड़़़ी कीमत चुका रहे हैं।

अमरीका और हिन्दोस्तान के बीच सैनिक रणनीतिक गठबंधन का मजबूत होना पूरी तरह से हिन्दोस्तान और एशिया के सभी लोगों के हितों के खिलाफ़ है। हिन्दोस्तान की सरकार इज़ारेदार पूंजीपतियों की अगुवाई में मुट्ठीभर तबकों के संकुचित हितों के लिए काम कर रही है, जो सैनिकीकरण और जंग से फायदा कमाना चाहते हैं। ये इज़ारेदार घराने हिन्दोस्तान में अमरीका की सहायता से सैनिकी औद्योगिक परिसर का निर्माण करने के लिए अपना पूरा जोर लगा रहे हैं। इस रास्ते से हिन्दोस्तान की संप्रभुता को बहुत खतरा है। अधिकतम मुनाफ़ों की लालच में ये इज़ारेदार घराने हिन्दोस्तान की सेना को दूसरे देशों और लोगों के खिलाफ़ प्रतिक्रियावादी जंग में तोप का चारा बनाना चाहते हैं। हिन्दोस्तान के सभी देशभक्त और शान्ति-पसंद लोगों को हुक्मरान वर्गों की इन खतरनाक योजनाओं को हराना होगा। पश्चिम एशिया के देशों और लोगों को बर्बाद करने में अमरीका को किसी भी तरह से राजनीतिक और सैनिक समर्थन देने के हिन्दोस्तान की सरकार के हर एक कदम के खिलाफ़ हम हिन्दोस्तानियों को आवाज़ उठानी होगी। अफगानिस्तान में हिन्दोस्तानी सशस्त्र बलों को भेजने के हर एक कदम का जबरदस्त विरोध करना होगा। हिन्दोस्तान की सरकार से हमें यह मांग उठानी होगी कि वह कोरिया के खिलाफ़ अमरीकी कार्यवाही का साथ देने से इनकार करे।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हिन्दोस्तान के प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच हुए तमाम खुले और छुपे समझौतों की निंदा करती है। हिन्दोस्तान-अमरीका सैनिक रणनीतिक गठबंधन एशिया के सभी देश और लोगों की संप्रभुता के खिलाफ़ है, और जिसमें हिन्दोस्तान के लोग भी शामिल हैं! हिन्दोस्तान के देशभक्त और शान्ति-पसंद लोग अमरीकी योजना को सफल नहीं होने दे सकते, जिसके मुताबिक एक एशियाई को दूसरे एशियाई के खिलाफ़ लड़़ाया जायेगा ताकि, अमरीका हम सभी के देशों पर अपना दबदबा बना पाए। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी देश के सभी लोगों से यह आह्वान करती है कि हम सब हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच सैनिक रणनीतिक गठबंधन को रद्द करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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