हिन्दोस्तान के किसानों - अपने जायज संघर्ष में आगे बढ़ो! मज़दूर वर्ग आपके साथ है!

Submitted by cgpiadmin on बुध, 02/08/2017 - 01:30

मज़दूर वर्ग आपके साथ है!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का आह्वान, 12 जुलाई, 2017

किसान भाइयों,

आप हिन्दोस्तान के कोने-कोने से दिल्ली आये हैं, पूरे देश को यह घोषणा करने के लिये कि आप अन्याय के खिलाफ़ और अपने अधिकारों के लिये लड़ेंगे।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी दृढ़ता से आपके संघर्ष का समर्थन करती है।

अपने देश के शासकों की किसानों के प्रति बेहद बेरुख़ी ने आपको यहां आने के लिये मजबूर किया है। अब यह घड़ा लबालब भर गया है।

आप मांग कर रहे हैं कि राज्य आपके प्रति, जो अन्न पैदा करते हैं, अपनी ज़िम्मेदारी निभाकर अपने राजधर्म का पालन करते हैं। पूरे देश के लिये अन्न उपजाकर आप समाज के प्रति अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। परन्तु कड़वी सच्चाई तो यही है कि अपने देश के शासक अपना राजधर्म निभाने से इनकार कर रहे हैं। वे धरती जोतने वालों की सुख और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं।

आप मांग कर रहे हैं कि कृषि के सभी उत्पादों के लिये लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा क़ीमत पर खरीद की गारंटी सरकार दे। आप मांग कर रहे हैं कि बुआई के पहले फसल की शुरुआत में ही सरकार खरीदी मूल्य घोषित करे। आप मांग कर रहे हैं कि बिना किसी शर्त के सरकार किसानों के सभी कर्ज़ माफ़ करे। ये सभी बिल्कुल जायज़ मांगें हैं, जिन्हें पूरा करना राज्य की ज़िम्मेदारी है।

आप बच्चों सहित अपने परिवार के श्रम से धरती को सोने में बदल देते हैं। लोगों के उपभोग के लिये अन्न, दलहन, तिलहन, गन्ना, फल, सब्ज़ियां, दूध, घी व अन्य खाद्य सामग्रियां आपके खून-पसीने की कड़ी मेहनत का फल हैं। आप कपास उगाते हैं जिससे लोगों के लिये कपड़े और वस्त्र बनते हैं। परन्तु देश के लिये आपकी सेवा के बदले आपको क्या इनाम मिलता है?

अगर किसी वजह से आपकी फसल खराब हो जाती है तो आप दिवालिया हो जाते हैं। अगर भरपूर फसल होती है, तब आपको अपनी उपज को सड़कों पर फेंकना पड़ता है या खेतों में ही सड़ने के लिये छोड़ देना पड़ता है क्योंकि आपको अपनी उपज की क़ीमत इतनी भी नहीं मिलती कि उसको मंडी तक पहुंचाने का खर्चा भी पूरा हो सके। आप अधिकारियों की हिदायतों को सुनकर, लाभ की आशा से, खास फसलें लगाते हैं, परन्तु आशाएं मिट्टी में मिल जाती हैं। समाज के प्रति अपना दायित्व निभाने के लिये फसल के कटने पर आपको बैंकों व साहूकारों की भयानक दस्तक ही इनाम में मिलती है जो आपकी ज़मीन को ज़ब्त करने की धमकी देते हैं। हर दिन हम ऐसी भयानक खबरें सुनते हैं कि हमारे मेहनती किसान खुदकुशी कर रहे हैं क्योंकि अपने देश के शासकों को किसानों की खुशहाली की कोई चिंता नहीं है।

अगले महीने, अपने देश के शासक अंग्रेजों से आज़ादी की 70वीं सालगिरह मनाएंगे। देशभर के किसान पूछ रहे हैं - क्या हम सचमुच आज़ाद हैं?

उपनिवेशवादियों का प्रत्यक्ष शासन तो अवश्य ही ख़त्म हो गया है। परन्तु शासन की शोषक और दमनकारी व्यवस्था कायम है। हर स्तर पर अधिकारियों के जन-विरोधी रवैये का हर किसान को सीधा अनुभव है। वे आपको एक जगह से दूसरी जगह दौड़ाते रहते हैं, चाहे आपको अपनी उपज की गुणवत्ता प्रमाणित करानी हो या बैंक से कर्ज़ लेना हो या सरकार द्वारा किये गये वादों की कुछ चीज प्राप्त करनी हो। कुछ भी करवाने के लिये आपको घूस देनी पड़ती है। जब सरकार किसी फसल का दाम निर्धारित भी करती है तब भी आपको अलग-अलग अधिकारियों से मिन्नतें करनी पड़ती हैं, जैसे कि आप कोई भिखारी हैं और कोई एहसान मांग रहे हैं।

राज्य का किसान-विरोधी और जन-विरोधी स्वभाव उस समय साफ-साफ दिखा, जब सरकार ने यह दावा करके नोटबंदी की कि भ्रष्टाचार का अंत हो जायेगा। हरेक किसान साक्षी होगा कि इससे भ्रष्टाचार में कुछ फर्क नहीं पड़ा है। इससे अनेक किसान परिवारों की सिर्फ बरबादी हुई है। इससे लाखों छोटे कारोबारों का विनाश हुआ है, जिससे लाखों मज़दूर अपनी रोज़ी-रोटी खो बैठे हैं। सिर्फ सबसे बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इज़ारेदारों को ही इससे फायदा हुआ है।

उपनिवेश काल की तरह ही, आज भी हिन्दोस्तानी राज्य किसानों को लूटने का साधन है। यह सबसे बड़े हिन्दोस्तानी और विदेशी इज़ारेदारों के हाथों में, मज़दूरों और किसानों के श्रम का वहशी शोषण करके और देश के प्राकृतिक संसाधनों को लूटकर, अपने लिये अधिकतम मुनाफ़ों को बनाने की गारंटी का साधन है। राज्य किसानों की ज़मीन का जबरदस्ती अधिग्रहण करके हिन्दोस्तानी और विदेशी इज़ारेदारों को देता आया है। किसानों के एकजुट संघर्ष ने मनमोहन सिंह की पिछली सरकार को उपनिवेशवादी भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द करने के लिये मजबूर कर दिया था। मोदी सरकार ख़तरनाक तरीके से एक नये कानून को पास करना चाहती है जिसके ज़रिये किसानों की ज़मीनें, उनकी स्वीकृति के बिना, जबरदस्ती छीनी जा सकें और पूंजीवादी इज़ारेदारों को सौंपी जा सकें।

किसान भाइयों,

संसद या विधानसभाओं के हर चुनाव में पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां किसानों के लिये धरती पर स्वर्ग लाने के वादे करती हैं। वे ऐसे दिखाती हैं जैसे कि उनके दिल में आपके लिये प्यार ही प्यार भरा हो। असलियत में वे जैसे ही सत्ता में आती हैं, आपसे किये गये वादों से मुकर जाती हैं और पूंजीवादी इज़ारेदारों का काम करती हैं। ज़िन्दगी का अनुभव सभी चुनावों और सभी पूंजीवादी पार्टियों के बारे में यही सिखाता है।

अब समय आ गया है कि हम एक नया रास्ता चुनें। हमें पूंजीवादी पार्टियों के पीछे नहीं जाना चाहिये, चाहे वो भाजपा या कांग्रेस पार्टी जैसी, बड़े पूंजीपतियों की पार्टियां हों या राज्य के स्तर के पूंजीपति वर्ग की पार्टियां हों। किसानों के अधिकारों के लिये संघर्ष करने के लिये, सैकड़ों किसान संगठन एक झंडे तले, एक साथ आये हैं। यह एक बहुत सकारात्मक प्रगति है। हमें एकजुटता से संघर्ष के अपने खुद के संगठनों का निर्माण करना होगा।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी संघर्षरत किसानों को आह्वान देती है कि पूंजीपति वर्ग से पूरी तरह से नाता तोड़ दें, जो राज्य सत्ता पर अपने नियंत्रण से अधिकतम मुनाफे़ के लिये किसान जनसमुदाय को जानबूझकर बरबाद कर रहा है।

आपका असली और पक्का दोस्त, अपने देश का मज़दूर वर्ग है। शासक पूंजीपति वर्ग का मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और समाज-विरोधी रास्ता, जिस पर चलने से अपने पूरे समाज की बरबादी हो रही है, उसके खिलाफ़ मज़दूर वर्ग बहादुरी से संघर्ष कर रहा है।

मौजूदा राज्य और राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था केवल 150 बड़े इज़ारेदार घरानों के लिये काम करती है जो व्यापक जनसमुदाय के हितों को दबाते हैं। हिन्दोस्तान को राज्य व्यवस्था और समाज में एक गहरे नव-निर्माण की ज़रूरत है। हमें एक नयी राज्य व्यवस्था स्थापित करने की ज़रूरत है जो सभी की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी मज़दूरों, किसानों तथा सभी शोषितों व दबे-कुचले लोगों को संगठित कर रही है ताकि संघर्ष के ज़रिये, हम इज़ारेदार पूंजीपतियों के नेतृत्व में चल रही शोषण की मौजूदा राज्य व्यवस्था की जगह पर एक नयी राज्य व्यवस्था स्थापित कर सकें।

ऐसा राज्य जो एक सार्वजनिक खरीद की व्यवस्था स्थापित करेगा, सभी कृषि उत्पादों के लिये लाभकारी मूल्यों की गारंटी देगा और सभी किसानों के लिये खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। वह ग्रामीण इलाकों में सिंचाई और अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिये पैसे का निवेश करेगा। वह निजी पक्षों के बीच कृषि भूमि की बिक्री व खरीद पर रोक लगायेगा ताकि किसानों को पूंजीवादी भू-माफियाओं से सुरक्षित रखा जा सके। छोटी जोत वाले किसानों को वह स्वेच्छा से सहकारी खेती करने के लिये मदद करेगा और ऐसी खेती के लिये मुफ्त में बीज, खाद, कीटनाशक, तकनीकी जानकारी, ट्रेक्टर तथा अन्य कृषि लागत वस्तुएं उपलब्ध करायेगा।

160 साल पहले 1857 के महान ग़दर में, हिन्दोस्तान के हर हिस्से में, अन्य देशभक्त ताक़तों के साथ, किसान एक तूफान की तरह उठे थे। उनका लक्ष्य उपनिवेशवादियों को बाहर निकालकर अपने देश को अंग्रेजी उपनिवेशवादी शासन से मुक्त करना था। उन ग़दरियों का नारा था ”हम हैं इसके मालिक, हिन्दोस्तान हमारा“। उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलन का इतिहास उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम, देश के कोने-कोने से किसानों के वीरतापूर्ण संघर्षों से भरा हुआ है। अपने देश का दुर्भाग्य यह है कि मज़दूरों और किसानों ने आज़ादी के लिये खून बहाया, परन्तु इज़ारेदारों के नेतृत्व में पूंजीपति वर्ग ने 70 साल पहले राज्य सत्ता हड़प ली।

हिन्दोस्तान के मालिक मज़दूर, किसान और अपने देश के व्यापक जनसमुदाय हैं। इसे बड़े इज़ारेदारों की निजी सम्पत्ति नहीं बनने दिया जा सकता है। मज़दूरों और किसानों को इसका मालिक बनना होगा क्योंकि यह उनका ही है। जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं होता, किसानों की परिस्थिति बद से बदतर ही होती जायेगी।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी संघर्षरत किसानों के नेतृत्व से आग्रह करती है कि इस लक्ष्य के लिये किसानों के एकजुट आंदोलन को मजबूत करें। चलो, हम अपने देश में मज़दूरों और किसानों के राज को स्थापित करने के लक्ष्य से संघर्ष करें ताकि हम अर्थव्यवस्था की दिशा को सबकी खुशहाली सुनिश्चित करने की दिशा में बदल सकें।

हम हैं इसके मालिक, हम हैं हिन्दोस्तान, मज़दूर, किसान, औरत और जवान!

मज़दूरों-किसानों की एकता ज़िन्दाबाद!

मज़दूरों किसानों की है यह मांग, हिन्दोस्तान का नव-निर्माण!

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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