जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन का विशाल विरोध

Submitted by cgpiadmin on रवि, 16/07/2017 - 21:30

जी-20 शिखर सम्मेलन, जो कि 7 जुलाई को शुरू हुआ, उसकी पूर्व संध्या पर पूरे जर्मनी और यूरोप के विभिन्न हिस्सों से लगभग 1,20,000 लोग जर्मनी के हैम्बर्ग में लड़ाकू विरोध प्रदर्शन करते हुए इकट्ठा हुए थे। इस शिखर सम्मेलन से लगभग दो हफ्ते पहले हैम्बर्ग में कई विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इन विरोध प्रदर्शनों ने साम्राज्यवाद, पूंजीवादी व्यवस्था, राष्ट्रों की लूट और तबाही, सैन्यीकरण और युद्ध के खिलाफ़ विश्व के लोगों के आक्रोश को प्रदर्शित किया।

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हैम्बर्ग, जर्मनी में जी-20 शिखर सम्मेलन के खिलाफ़ प्रदर्शन
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प्रदर्शनकारियों ने शासक वर्ग और जी-20 के देशों के नेताओं की निंदा वाले नारे लिखे हुए बैनर और प्लाकार्ड उठाए हुये थे। जिस व्यवस्था में मेहनतकश लोगों के लिए शोषण, दुःख और असुरक्षा बढ़ती जाती है, उन्होंने उस पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ़ यूरोप और अन्य देशों के मेहनतकश लोगों के विरोध को व्यक्त किया, वे निजीकरण व भूमंडलीकरण, नौकरियों में कटौती और “मितव्ययिता-विरोधी” उपायों के नाम पर सरकार द्वारा सामाजिक व्यय में गंभीर कटौती का विरोध कर रहे थे। उन्होंने अमरीका की अगुवाई में साम्राज्यवादी शक्तियों की साम्राज्यवादी रणनीतियों का, उनके आक्रामक युद्धों का, बढ़ते सैन्यीकरण का, अराजकता और हिंसा के फैलने का और मेहनतकश लोगों के अधिकारों और आज़ादियों पर बढ़ते फासीवादी हमलों का विरोध किया। उन्होंने अमरीका और अन्य साम्राज्यवादी शक्तियों की गतिविधियों का विरोध किया, जिनकी वजह से राष्ट्रों और लोगों का विनाश हो रहा है और जिससे लाखों लोगों को अपने घरों और देशों से भागकर अन्य जगहों में शरण लेनी पड़ रही है।

मेहनतकश लोगों के बड़े पैमाने पर हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों को बदनाम करने और उनके खिलाफ़ किए गए आतंक के असभ्य शासन को न्यायसंगत बनाने के लिए, साम्राज्यवाद द्वारा नियंत्रित मीडिया ने प्रदर्शनकारियों को अराजकतावादी और हिंसक रूप से चित्रित करने के लिए एक सोचा-समझा अभियान चलाया है।

वास्तव में, जर्मनी की सरकार ने लगभग एक सम्पूर्ण प्रमुख शहरी केंद्र को पुलिस नियम के तहत रखने की तैयारी में, जी-20 के अवसर का इस्तेमाल किया था। इस विशेष उद्देश्य के लिए - लगभग 20,000 पुलिसकर्मी और 3,000 वाहन पूरे देश से इकट्ठे करके हैम्बर्ग में तैनात किये गए थे, जिसकी आबादी लगभग 17 लाख है और जो कि जर्मनी का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। भारी-सशस्त्र अर्धसैनिक विशेष इकाइयों जैसी निशानेबाज टुकड़ियों को उन जगहों के आसपास तैनात किया गया था जहाँ जी-20 के कार्यक्रम होने वाले थे। ऐसे क्षेत्रों तक सभी प्रकार की पहुंच बंद कर दी गई थी। हेलीकॉप्टर निरंतर हवाई निगरानी कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन करने के लिए जो लोग यूरोप के विभिन्न शहरों से हैम्बर्ग आ रहे थे, उनकी पूरे समय तक पुलिस द्वारा सख्त निगरानी की जा रही थी।

जब लोगों ने अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया, तब जर्मन राज्य और हैम्बर्ग की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर क्रूर हमले का औचित्य साबित करने के लिए, उन्हें उकसाने के कई कदम उठाये। प्रदर्शनकारियों ने केवल 300 मीटर की ही दूरी तय की थी, तभी दर्जनों पुलिस वाहनों और दंगा रोधी पुलिस की कई लाइनों ने उनके मार्ग को रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को “चेतावनी” दी कि “यदि हिंसा हुई” तो वे “विरोध करने के अपने कानूनी अधिकार को खो देंगे”। आगजनी की कुछ मनगढ़ंत घटनाओं का उपयोग करते हुए, प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारों वाली तोपों और आंसू गैस के गोलों से हमला किया गया और फिर ढाल और डंडा पकड़े हुए दंगा रोधी पुलिस की टुकड़ियों द्वारा घेर लिया गया। उन्हें बहुत ही निर्दयातापूर्वक पीटा गया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

घटना के बाद, प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन के अधिकार पर हमले की निंदा की। कई लोगों ने इस तथ्य पर गुस्सा जाहिर किया कि जर्मनी राज्य ने जी-20 शिखर सम्मेलन के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन के अवसरों का इस्तेमाल किया था ताकि वे एक प्रमुख शहरी इलाके को लगभग पुलिस के कब्जे़ में लाने के लिए पूर्वाभ्यास कर सकें।

प्रदर्शनकारियों पर राज्य द्वारा ऐसा क्रूर दमन और पूरे शहरों को सशस्त्र शिविरों में बदल देना, ये पिछले एक दशक में जी-20 शिखर सम्मेलनों की विशेषता रही है। यह पूंजीवादी राज्य की उस क्रूरता को दर्शाता है, जब वे लोगों के क्रोध से अपने शोषणकारी और अन्यायपूर्ण व्यवस्था का बचाव करने के लिए, “लोकतंत्र” के सभी दिखावों को भी दरकिनार कर देते हैं।

हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन में विरोध प्रदर्शनों से पता चलता है कि दुनियाभर के लोग अपने रोज़गार और अधिकारों पर बढ़ते हमलों का, साम्राज्यवादी युद्ध का, सैन्यीकरण और राष्ट्रों के विनाश का लगातार विरोध कर रहे हैं। वे शोषण, दमन और लूट की इस व्यवस्था के अंत की मांग कर रहे हैं। दुनियाभर में लोग एक ऐसी व्यवस्था की आकांक्षा रखते हैं, जिसमें उनकी सुख और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि सबसे बड़े इज़ारेदार पूंजीपतियों और साम्राज्यवादी युद्ध भड़काने वालों के मुनाफ़ों को।

Tag:    जी-20    शिखर सम्मेलन    विरोध प्रदर्शन    Jul 16-31 2017    Struggle for Rights    War & Peace     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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