आईटी क्षेत्र के मज़दूरों ने संगठित होने का निश्चय किया!

Submitted by cgpiadmin on रवि, 16/07/2017 - 20:30

हिन्दोस्तान के आईटी उद्योग में 45 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। हालांकि उनको मिलने वाले वेतन-भत्ते लुभावने लगते होंगे, लेकिन उनके काम की परिस्थिति उनके शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होती है।

आजकल स्वचलिकरण, कृत्रिम बुद्धि तथा अमरीका, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि की सुरक्षात्मक नीतियों की वजह से इन कम्पनियों के मुनाफ़ों के ऊपर भारी दबाव आ रहा है। जब कभी पूंजीपति अपने मुनाफ़ों के लिए ख़तरा महसूस करते हैं, तब वे सबसे पहले अलग-अलग तरीके से अपने मज़दूरों पर हमले करते हैं। उनके वेतनों की बढ़ोतरी बंद करते हैं, उनके काम के घंटों को बढ़ा देते हैं, ज्यादा वेतन पाने वाले पुराने मज़दूरों को निकालकर, उनका काम कम वेतन पाने वाले युवा मज़दूरों से करवाते हैं, जबरन इस्तीफा या छंटनी से मज़दूरों की संख्या को घटाते हैं। ये मज़दूर प्रौद्योगिकी के आधुनिकतम क्षेत्रों में काम करते हैं। अगर वे खुद की ताक़त को महसूस कर लेंगे और यूनियन में संगठित हो जाएंगे, तो उनके पास मालिकों की योजनाओं को हराने की बहुत बड़ी क्षमता होगी। चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलूरू, कोयंबटूर, आदि में तो आईटी तथा आईटी समर्थित सेवा क्षेत्रों के मज़दूरों ने मालिकों के ख़िलाफ़ लड़ना शुरू कर दिया है। मुम्बई, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, नोयेडा, लखनऊ, जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर आईटी तथा आईटी समर्थित सेवायें प्रदान करने वाली कंपनियां हैं। वहां के मज़दूर जब संघर्ष में हिस्सा लेना शुरू करेंगे तथा यूनियनों में संगठित होने लगेंगे, तब यकीनन ही वे एक बड़ी ताक़त बतौर उभर कर आएंगे।

मज़दूर एकता लहर आईटी तथा आईटी समर्थित सेवा क्षेत्रों के मज़दूरों के संघर्ष को पूरा समर्थन देती है। बड़ी खुशी से हम आपके लिए हिन्दोस्तान के एक महत्वपूर्ण आईटी केंद्र, पुणे में हुई उस प्रकार की पहली सभा की रिपोर्ट पेश कर रहे हैं।

“अपने अधिकार जानो!” इस घोषणा के साथ पुणे में 8 जुलाई, 2017 को फोरम ऑफ आईटी एम्पलॉइज तथा लोक राज संगठन ने एक सभा का आयोजन किया था। इस महत्वपूर्ण सभा के लिए तकनीकी पेशेवर मज़दूरों के बीच आमंत्रण के पर्चों का वितरण करनेवाले कार्यकर्ताओं ने वातावरण में एक ऊर्जा महसूस की। इन युवा मज़दूरों में ज्यादातर ऐसे थे जिनको अपने अधिकारों के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। इनमें से अनेकों ऐसे थे जिन्होंने आयोजकों को आभार प्रकट किया। सोशल मीडिया द्वारा भी बड़े पैमाने पर सभा के आमंत्रण का वितरण किया गया था।

सिर्फ़ पुणे के ही नहीं बल्कि मुम्बई से भी आये हुए 100 से ज्यादा आईटी तथा आईटी समर्थित सेवा क्षेत्रों के तकनीकी मज़दूरों ने इस सभा में हिस्सा लिया। फोरम ऑफ आईटी एम्पलॉइज़ तथा लोक राज संगठन के नेताओं के अलावा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी.जी. कोलसे पाटिल, बजाज ऑटो के मज़दूरों की यूनियन, विश्व कल्याण कामगार संघटना के अध्यक्ष श्री दिलिप पवार, सेंडविक इंडिया यूनियन तथा श्रमिक एकता महासंघ (जो पिंपरी-चिंचवाड़ औद्योगिक क्षेत्र की 130 यूनियनों की कनफेडरेशन है) के अध्यक्ष संतोष कनसे तथा कई कानूनी विषेषज्ञों ने सभा का संबोधन किया।

एक के बाद एक वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कैसे इन युवा पेशेवरों को “मैनेजर”, “एक्ज़ीक्यूटिव” इत्यादि कहकर तथा इस तथ्य को नकारकर कि वे मज़दूर हैं, ये कम्पनियां उन्हें बुद्धू बनाने की कोशिश करती हैं। ये पेशेवर मज़दूर तो अपना मेहनताना कमाते हैं, अतः हिन्दोस्तानी नागरिक बतौर उन्हें अपनी यूनियन बनाने का पूरा अधिकार है। अपने अधिकारों के लिए लड़ने तथा उन पर डटे रहने के लिए यह पहला कदम उठाना लाजमी है। उच्च शिक्षाप्राप्त पेशेवर मज़दूर, जैसे कि विमान इंजीनियरों, विमान चालकों, रेल इंजन चालकों, बैंक अधिकारी तथा कर्मचारी, डॉक्टर, शिक्षक, आदि, क्या अपनी-अपनी यूनियन या ऐसोसियेशन नहीं बनाते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो अपने अधिकारों के लिए तथा उनकी हिफ़ाज़त के लिए वे कैसे लड़ते हैं? ऐसा कोई भी मज़दूर नहीं है, जिसे लड़े बिना अपने अधिकारों का फल मिलता है। हर एक अधिकार - काम के सीमित घंटे, वेतन वृद्धि, आदि के लिए उन्हें एकजुट संघर्ष करना ही पड़ता है। हर एक वक्ता को श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ने का दशकों का अनुभव था और हर एक ने इन तकनीकी मज़दूरों के लिए पूरा समर्थन तथा मार्गदर्शन देने का वादा किया।

तकनीकी मज़दूरों को अपनी ताक़त कभी नहीं भूलनी चाहिए। मिसाल के तौर पर, अपनी एकता के आधार पर वे दुनियाभर के वित्त बाज़ारों को एक दिन में ठप्प कर सकते हैं!

सभा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों का स्पष्टीकरण हुआ :

  • जब मालिक अपने यूनियन तथा एसोसिएशन बना सकते हैं, तो कर्मचारियों को यह अधिकार न होने का सवाल ही नहीं है।करीबन सभी कानून सेज़ में भी लागू होते हैं।
  • कोई भी कंपनी, चाहे वह दिवालिया ही क्यों न हो, किसी भी कर्मचारी को सीधा बाहर नहीं कर सकती है।
  • नोटिस अवधि, आदि के बारे में चाहे नियुक्ति पत्र में कुछ भी क्यों न लिखा हो, पर्याप्त कार्यपद्धति के बिना कोई भी कंपनी कर्मचारी को नहीं निकाल सकती है।
  • अगर कंपनी में 100 से ज्यादा कर्मचारी हों, तो किसी भी कर्मचारी की छंटनी करने के पहले, सरकार की अधिकृत इज़ाज़त लेनी पड़ती है।
  • ओवरटाइम के घंटों पर भी कानूनी सीमा होती है।

हर वक्ता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आईटी तथा आईटी समर्थित सेवा क्षेत्रों के मज़दूरों की सुरक्षा के लिए काफ़ी कानून हैं, लेकिन खुद को यूनियन में संगठित किये बिना उनको लागू नहीं किया जा सकेगा। कंपनियों को यह सब अच्छे तरीके से मालूम है और इसीलिए वे कर्मचारियों पर “इस्तीफा” देने का दबाव डालती हैं। लेकिन अगर कर्मचारी इस दबाव के नीचे नहीं झुकते हैं और कंपनी को अपनी छंटनी के खिलाफ़ चुनौती देते हैं, तब कंपनी को पीछे हटना पड़ेगा।

सभा में सभी ने उत्साहपूर्ण सहभाग लिया। स्पष्टीकरण पूछे जा रहे थे। कइयों ने अपने-अपने अनुभव बताये। कइयों ने यह भी बताया कि कैसे “इस्तीफा” देने से इंकार करने के बाद, कंपनी को पीछे हटना पड़ा।

एक एच.आर. कर्मचारी ने बताया कि कैसे पहले उन्हें तकनीकी मज़दूरों पर “इस्तीफा” देने का दबाव डालना पड़ता था, लेकिन एक दिन ऐसा आया जब उन्हीं पर इस्तीफ़ा देने का दबाव डाला गया! वक्तामंडल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एच.आर. मज़दूरों को भी उसी यूनियन का सदस्य बनना चाहिए तथा संगठित होना चाहिये, उनकी सुरक्षा का यही एकमात्र मार्ग है।

50 से ज्यादा भागीदारों ने यूनियन बनाने के लिए स्वेच्छा से काम करने की इच्छा प्रकट की! अनेक भागीदारों ने पुणे तथा मुम्बई में भी स्वेच्छा से ऐसी सभाएं आयोजित करने के लिये पहल करने की इच्छा प्रकट की।

इस पहल के लिए मज़दूर एकता लहर फोरम ऑफ आईटी एम्पलॉइज़ तथा लोक राज संगठन की सराहना करती है। प्रबंधंनों के सामने घुटने न टेकने के लिए तथा एकजुट होकर अन्याय के ख़िलाफ़ तथा अपने लिये काम की बेहतर परिस्थितियों के लिए लड़ने का निश्चय करने वाले सहभागियों की भी मज़दूर एकता लहर सराहना करती है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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