बैंक मज़दूर सर्व हिन्द विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं

Submitted by cgpiadmin on रवि, 16/07/2017 - 18:30

19 जुलाई को, जिस दिन प्रमुख बैंकों के राष्ट्रीयकरण की 48वीं वर्षगांठ का दिन है, उसी दिन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बचाओ’ का दिवस मनाने का निर्णय लिया है।

उस दिन सभी सदस्य स्मारक बैच पहनेंगे, सभी शाखाओं के सामने पोस्टर प्रदर्शित करेंगे, पर्चे बांटेंगे, रैलियों और प्रदर्शनों का आयोजन करेंगे।

Banks workers protest
28 फरवरी, 2017 को दिल्ली में बैंक कर्मी धरना देते हुये (फाइल फोटो)

कार्यक्रम की घोषणा करते हुए, ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (ए.आई.बी.ई.ए.) के महासचिव सी.एच. वेंकटाचलम ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी कॉर्पोरेट बकाएदारों के अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा रहा है। उन्होंने दिवालियापन और निजीकरण से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बचाने के लिए लोगों से आह्वान किया। “ये राष्ट्र निर्माण की संस्थाएं हैं, इसलिए इन्हें सार्वजनिक ही रहना चाहिए। सामाजिक बैंकिंग को ज्यादा मजबूत और विस्तारित किया जाना चाहिए।”

ए.आई.बी.ई.ए. के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है न चुकाये जाने वाले कर्ज़ के अनुपात में भारी वृद्धि, जिसको आसान शब्दों में कहा जाए तो यह गैर-निष्पादित संपत्ति के रूप में जाना जाता है। ये कर्ज़ खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं और इनकी वजह से कई बैंकों को दिवालिया हो जाने का ख़तरा है।

वेंकटाचलम ने कहा कि, “हर कोई जानता है कि इस खतरे का मुख्य हिस्सा कॉर्पोरेट कर्ज़दारों की वजह से है जो हमारे बैंकों को उल्लू बना रहे हैं”। बैंक यूनियनों ने यह बताया है कि सरकार ने इन न चुकाये गये कर्ज़ों को वसूल करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। बल्कि इन कॉर्पोरेट बकायदारों को सभी तरह की रियायतें दी जा रही हैं। जिसमें ब्याज छूट, एक बार कर्ज़ निपटान, समझौते, कॉर्पोरेट कर्ज़ का पुनर्गठन, रणनीतिक कर्ज़ का पुनर्गठन और कर्ज़ माफी शामिल हैं।

बैंकिंग सेवाओं के आम उपयोगकर्ताओं को, सभी प्रकार के सेवा शुल्कों, फीस और दंडों को बढ़ाकर ज्यादा भुगतान करने के लिये मजबूर किया जा रहा है।

बैंक मज़दूर यह मांग कर रहे हैं कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट कर्ज़दारों के द्वारा न चुकाये गये कर्ज़ का भुगतान करवाने के लिए और उनके खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और दिवालियेपन का विरोध करने के लिए देश के लोगों से आह्वान किया है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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