“ग़दरियों की पुकार – इंकलाब!” देश भगत यादगार हॉल, जालंधर में पुस्तक का विमोचन

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देश भगत यादगार हॉल, जालंधर में पुस्तक का विमोचन
Com Naunihal Singh
कामरेड नौनिहाल सिंह 
Comrade Gurmeet Singh
कामरेड गुरमीत सिंह
Prof Ominder Singh
प्रोफेसर ओमिंदर सिंह
Comrade Gurmeet
कामरेड गुरमीत

 

 Com Naunihal Singh-Com Gurmeet and Harjinder Singh Atwal
कामरेड नौनिहाल सिंह, कामरेड गुरमीत, हरजिंदर सिंह अटवाल

 

 

Comrade Hanuman Prasad Sharma
कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा

 

Comrade Prakash Rao
कामरेड प्रकाश राव
 

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी द्वारा प्रकाशित पुस्तक “ग़दरियों की पुकार - इंक़लाब! के पहले संस्करण का विमोचन 15 जुलाई, 2017 को पंजाब में जलंधर के देश भगत यादगार हॉल में आयोजित एक शानदार कार्यक्रम में किया गया। यह पुस्तक तीन भाषाओं में एक साथ प्रकाशित की गयी है।

इस पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम का आयोजन पंजाबी लेखक सभा और देश भगत यादगार समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में प्रगतिशील अध्यापकों और अध्ययनकर्ताओं, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, विद्यार्थियों तथा कई पार्टियों और संगठनों से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

दोआबा कॉलेज के प्रोफेसर ओमिंदर सिंह जोहल ने पंजाबी लेखक सभा की ओर से पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी के इतिहास को पेश करती है बल्कि, मौजूदा वक्त में ग़दर पार्टी के कार्यों के औचित्य को भी सामने लाती है। यह सभी हिन्दोस्तानी क्रांतिकारियों को आगे का रास्ता दिखाती है।

पुस्तक का विमोचन संयुक्त रूप से कामरेड गुरमीत (महासचिव, देश भगत यादगार कमेटी और महासचिव, पंजाबी लेखक सभा), हरजिंदर सिंह अटवाल (अध्यक्ष, पंजाबी लेखक सभा), कामरेड गुरमीत सिंह ढोढा (अध्यक्ष, देश भगत यादगार कमेटी), कामरेड नौनिहाल सिंह (संचालक, इतिहास उप-कमेटी, देश भगत यादगार कमेटी), कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा (भूतपूर्व अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक मंच और उपाध्यक्ष लोक राज संगठन), प्रोफेसर ओमिंदर सिंह जोहल (दोआबा कॉलेज) और कामरेड प्रकाश राव (प्रवक्ता, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी) ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए कामरेड गुरमीत ने कहा कि यह पुस्तक इतिहास के एक बेहद नाजुक मोड़ पर प्रकाशित की गयी है। आज बढ़ते फासीवाद पर जोरदार बहस चल रही है तो ऐसे वक्त में कम्युनिस्टों को क्या करना चाहिए। इस पुस्तक में, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सभी कम्युनिस्टों को एकजुट होने का बुलावा दे रही है। हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने भी अंग्रेजों के खिलाफ़ सभी क्रांतिकारियों को एकजुट होने का बुलावा दिया था। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सभी कम्युनिस्टों की एकता का बुलावा दे रही है। अंत में उन्होंने कहा कि यह हम सब पर एक बड़ी जिम्मेदारी है कि हम सब कम्युनिस्टों की एकता की दिशा में काम करें और इंक़लाब का बीड़ा उठाने के लिए नौजवानों को प्रेरित करें।

पुस्तक में उठाये गए अहम मुद्दों का जिक्र करते हुए कामरेड प्रकाश राव ने कहा कि ग़दरियों के बारे में दो बड़े झूठ फैलाये जाते हैं। एक झूठ यह कि ग़दरी बेहद नादान थे और क्रांतिकारी सिद्धांत का उनको कोई ज्ञान नहीं था। दूसरा झूठ यह कि कांग्रेस पार्टी और ग़दर पार्टी के लक्ष्य में कोई अंतर नहीं था; केवल उनके संघर्ष के तरीके अलग थे।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी के झंडे में दो तलवारें हैं। एक तलवार ज्ञान का प्रतीक है, तो दूसरी तलवार, जंग के मैदान में बहादुरी का प्रतीक है। ग़दरी अपना साप्ताहिक अख़बार हिन्दोस्तान की कई भाषाओं में छापा करते थे, जिसका लाखों की संख्या में दुनियाभर में वितरण किया जाता था। क्रांति की ज़रूरत के बारे में लोगों को जागरुक करने के महत्व को वे भली-भांति समझते थे। उन्होंने दुनियाभर में बसे हिन्दोस्तानी आप्रवासियों के बीच और बर्तानवी हिन्दोस्तानी सेना के बीच अपनी पार्टी की शाखाएं बनायीं। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के साम्राज्यवादी चरित्र को अच्छी तरह से समझ लिया और फैसला किया कि वह इस मौके का इस्तेमाल जनक्रांति के द्वारा बर्तानवी राज को खत्म करने के लिए करेंगे। यह कहना कि वे नादान थे और उनको सिद्धांत की कोई जानकारी नहीं थी, यह उनका घोर अपमान करना होगा। ग़दरियों द्वारा उस वक्त पेश किया गया कार्यक्रम अपने समय के हिसाब से बहुत आगे था।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी और कांग्रेस पार्टी के लक्ष्य एक दूसरे से एकदम विपरीत थे। ग़दर पार्टी ने बर्तानवी हुकूमत का खात्मा करने और एक नया राज्य स्थापित करने के लिए काम किया, जहां मज़दूर और किसान सत्ता में होंगे। जबकि कांग्रेस पार्टी ने बर्तानवी बस्तीवादी सत्ता और व्यवस्था के ही भीतर हिन्दोस्तानी पूंजीपतियों और ज़मींदारों के हितों को शामिल करने के लिए काम किया, ताकि वह बर्तानवी बस्तीवादियों की हुकूमत की जगह पर इन शोषक वर्गों की हुक्मशाही को लोगों पर थोप सके।

कामरेड प्रकाश राव ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी अपने नज़रिये और कार्य में सही मायने में अंतर्राष्ट्रीयतावादी थी। उन्होंने हिन्दोस्तान के सभी राज्यों का एक संयुक्त गणराज्य बनाने के लक्ष्य को पेश किया, जिसके तहत सभी राष्ट्रों, राष्ट्रीयताओं और लोगों के हितों की हिफ़ाज़त होगी। अपने संगठनात्मक और प्रचार कार्य के द्वारा ग़दर पार्टी ने बर्तानवी हिन्दोस्तानी सेना के सिपाहियों को अन्य बर्तानवी उपनिवेशों के लोगों पर गोली चलाने से रोका।

ग़दरियों की एक खासियत यह थी कि वे कभी भी अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं लड़े। वे सामूहिक नेतृत्व और व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के सिद्धांत के आधार पर संगठित हुए थे। अपने महान लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने हरदम एकजुट होकर काम किया। ग़दर पार्टी के बीच कभी भी कोई गुट नहीं थे।

बर्तानवी बस्तीवादियों और उनकी संस्थाओं तथा हिन्दोस्तानी सरमायदारों की सांप्रदायिक और “धर्म-निरपेक्ष” पार्टियों के प्रति हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी का रवैया हमेशा गैर-समझौताकारी रहा था। यह एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि ग़दर पार्टी का यह रवैया पूरी तरह से उस रुझान के खिलाफ़ है, जिसके चलते राज्य और उसके तमाम संस्थानों और धर्म-निरपेक्षता की आधिकारिक विचारधारा के साथ समझौता किया जाता है और आज भी कम्युनिस्ट आंदोलन इस रुझान से ग्रसित है।

अपने भाषण का समापन करते हुए, कामरेड प्रकाश राव ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी क्रांति उस देश की ठोस वस्तुगत हालतों में अपना रूप लेती है और उस देश की क्रांतिकारी विरासत से सीख लेती है। सभी कम्युनिस्टों को इस हक़ीक़त को पहचानने की ज़रूरत है। अंत में उन्होंने कहा कि “हमारे बीच कई मतभेद हो सकते हैं। आओ हम वहां से चर्चा शुरू करें जिस बात पर हम सब सहमत हैं और वहां से आगे बढ़ें”।

कामरेड नौनिहाल सिंह ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी को इस पुस्तक को इस दौर में प्रकाशित करने के लिए बधाई दी। पुस्तक में दिए गए बरकतुल्लाह के भाषण का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि यह भाषण बहुत महत्वपूर्ण है और बरकतुल्लाह ने “जिहाद” को एक नया अर्थ दिया - जिहाद का मतलब है तमाम तरह के दमन के खिलाफ़ संघर्ष। जिस तरह से लेनिन की बोल्शेविक पार्टी ने सभी मज़दूरों को अपने-अपने देश के पूंजीपतियों के खिलाफ़ संघर्ष करने का आह्वान दिया, उसी तरह हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने दुनिया के कई देशों में तैनात हिन्दोस्तानी सेना की टुकड़ियों को अपनी बंदूकें बर्तानवी शासकों के खिलाफ़ मोड़ने के लिए आह्वान दिया। कामरेड नौनिहाल सिंह ने कहा कि इस पुस्तक पर गंभीर चर्चा करने की ज़रूरत है। हिन्दोस्तान की क्रांति के पड़ाव पर सभी कम्युनिस्टों के बीच चर्चा द्वारा एक समझ बनाने की ज़रूरत है।

कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा ने कहा कि पंजाबी लोगों ने देश के इतिहास में अनेक क्रांतिकारी विद्रोहों में बहादुरी वाली भूमिका अदा की है। यह पुस्तक भी सभी कम्युनिस्टों को, सभी प्रगतिशील और क्रांतिकारी ताक़तों को एकजुट होने का आह्वान दे रही है। हम लोगों को हुक्मरान वर्गों की किसी भी पार्टी के साथ यह बहाना देकर हाथ नहीं मिलाना चाहिए, कि वह “कम बुरी” है। हमें मौजूदा संविधान और उसे बनाने वाली व स्वीकार करने वाली संविधान सभा के बारे में भी चर्चा करने की ज़रूरत है।

खालसा कॉलेज लायलपुर के पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर गोपाल सिंह भुट्टर, ने बताया कि ग़दर पार्टी ने ग़दर का मतलब इंक़लाब बताया। उन्होंने आगे बताया कि कांग्रेस पार्टी, जिसे एक अंग्रेज अधिकारी ए.ओ. ह्यूम की पहल पर 1885 में गठित किया गया था, उसने पहली बार आज़ादी की मांग 1928 में जाकर रखी, जबकि हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने बस्तीवादी हुकूमत से संपूर्ण आज़ादी का नारा 1913 से ही उठाया था।

डी.ए.वी. कॉलेज, नकोदर के प्रोफेसर राम मूर्ति ने कहा कि पंजाबी लेखक सभा के पुनर्जीवन के बाद, उसका पहला कार्यक्रम ग़दर पार्टी पर इस महत्वपूर्ण किताब का विमोचन है। यह बड़े फक्र की बात है। हम इतिहास के एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। सत्ता में बैठे हुक्मरान लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं; लोगों को जागरुक करना बेहद ज़रूरी है। आज प्रगतिशील साहित्य और संस्कृति पर हमले हो रहे हैं और हमें उन हमलों का सामना करना होगा।

गुरमीत सिंह ढोढा ने कहा कि इस किताब पर और हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी की लाइन पर चर्चा होनी चाहिए। हमारे देश के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं और इसको टक्कर देने के लिए हम सबको एकजुट होना होगा। इस हॉल को पूरा भरा हुआ देखकर बेहद खुशी होती है।

हरजिंदर सिंह अटवाल ने कहा कि आज़ादी के 70 साल बाद भी हमारा देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है और जिन्हें तोड़ने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि इन बेड़ियों को बरकरार रखने में कांग्रेस पार्टी की क्या भूमिका है। उन्होंने कहा कि जब पंजाबी लेखक सभा के पास यह प्रस्ताव आया कि देश भगत यादगार कमेटी के साथ मिलकर इस पुस्तक का विमोचन करना है, जिसे कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने प्रकाशित किया है, तब हमारे बीच काफी चर्चा हुई। क्या हम इस राजनीतिक पुस्तक का विमोचन करें या न करें? हमने फैसला किया कि हम इस राजनीतिक पुस्तक का विमोचन करेंगे क्योंकि ग़दर आंदोलन एक राजनीतिक आंदोलन है।

विमोचन के कार्यक्रम का समापन क्रांतिकारी उत्साह के साथ हुआ और वहां मौजूद सभी लोगों ने यह फैसला किया कि हमारे देश को सभी प्रकार के शोषण और दमन से मुक्ति दिलाने के लिये ग़दरियों के संघर्ष को हम आगे लेकर जायेंगे।

कार्यक्रम का समापन करते हुए प्रोफेसर जोहल ने कहा: “विचार कभी नहीं मरते और क्रांतिकारी विचार हमेशा अमर रहते हैं। हमारा संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक हम अपने ग़दरियों का लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते!”

Tag:    हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी    Aug 1-15 2017    Voice of the Party    Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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