नई दिल्ली में सामूहिक प्रदर्शन और रैली : लोगों के सशक्तिकरण के लिए एक संयुक्त आह्वान

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 01/08/2017 - 22:30

लोक राज संगठन ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, जमात-ए-इस्लामी हिन्द, यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, सीपीआई (एम-एल)-न्यू प्रोलेतेरियन, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, पुरोगामी महिला संगठन, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन्स और अन्य संगठनों के साथ मिलकर, सभी तबकों के लोगों की रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ़ एक संयुक्त प्रतिरोध का निर्माण करने और लोगों के हाथों में सत्ता लाने के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की।

Joint Rally Ramleela to Sansad
Joint Rally Ramleela to Sansad
Joint Rally Ramleela to Sansad

इस संयुक्त रैली की शुरुआत 16 जुलाई, 2017 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान से हुई। इस पुराने शहर की भीड़ भरी सड़कों से गुजरते हुए रैली का समापन संसद के पास जंतर-मंतर पर हुई जनसभा में हुआ। प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों ने अपने हाथों में बैनर और प्लाकार्ड उठाए हुए थे, जिनपर राज्य द्वारा विभिन्न तबकों के लोगों पर सब-तरफा हमलों की आलोचना करते हुए नारे लिखे हुए थे।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों के वक्ताओं ने जंतर-मंतर पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने जोशिले भाषणों में, सभी तबकों के लोगों पर हो रहे हमलों की निंदा की। मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यक तबकों के धर्म और जीवन जीने के तौर-तरीकों के खिलाफ़ हमले किये जा रहे हैं, जाति के आधार पर दलितों के खिलाफ़ हमले किये जा रहे हैं, श्रम कानूनों में संशोधनों के ज़रिये मज़दूरों के खिलाफ़ हमले किये जा रहे हैं, जबकि सरकार बड़े़-बड़े देशी-विदेशी इज़ारेदार पूंजीपतियों के लिए “व्यापार को सहज बनाने” का वादा कर रही है। साथ-साथ कृषि उत्पादों को राज्य द्वारा लाभकारी क़ीमत पर खरीदने की व्यवस्था को ख़त्म करके, सरकार किसानों को दिवालियापन और बर्बादी की ओर धकेल रही है, महिलाओं पर हमलों और सबतरफा अन्याय के खिलाफ़ अपनी आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर सरकार हमले कर रही है। सरकार कश्मीर और उत्तर-पूर्व के लोगों के खिलाफ़ हमले कर रही है, वे लोग आफ्स्पा के तहत अपने उपर चल रहे दमन और अत्याचार का विरोध कर रहे हैं।

वक्ताओं ने समझाया कि इस राजनीतिक व्यवस्था में लोग पूरी तरह से राजनीतिक ताक़त से वंचित हैं। मतदान के अधिकार के अलावा चुनाव में उनके पास अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चयन करने का कोई तंत्र नहीं है, न ही वे चुने गए प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहरा सकते हैं और न ही उन्हें वापस बुला सकते हैं। लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बनाने की पहल भी नहीं कर सकते हैं।

मौजूदा सरकार, पहले की सरकारों की तरह ही सिर्फ बड़े-बड़े इज़ारेदार पूंजीवादी घरानों के मुनाफ़ों को बढ़ाने के लिए काम कर रही है। लोगों को आपस में बांटकर उनके संघर्ष को दबाने के लिए, सरकार राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक का इस्तेमाल कर रही है। दुनिया में एक बड़ी शक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए हिन्दोस्तानी शासक वर्ग अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ा रहा है और अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ अपने रणनीतिक गठबंधन को मजबूत कर रहा है। “आतंकवाद पर जंग” के नाम से वह आतंकवाद के सरगना, अमरीका के साथ-साथ अन्य देशों, जैसे कि इस्राइल के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। इस्राइल ने, फिलिस्तीनी लोगों और पश्चिम एशिया के अन्य लोगों के लिए अनगिनत पीड़ाएं पैदा की हैं। इस क्षेत्र में शान्ति और सुरक्षा को वह गंभीर खतरे में डाल रहा है।

वक्ताओं ने यह भी बताया कि कांग्रेस पार्टी और भाजपा दोनों ही यह दावा करती हैं कि वे लोगों के लिए काम कर रही हैं, लेकिन वास्तव में वे सबसे बड़े-बड़े पूंजीवादी इज़ारेदारों की नीतियों को लागू करने का काम करती हैं। इसलिए, सिर्फ सरकार बदल जाने से समस्या का हल नहीं होगा, क्योंकि इन सभी समस्याओं की जड़ वर्तमान राज्य और उसकी आर्थिक तथा राजनीतिक व्यवस्था में है। हमारे सामने चुनौती है कि हम लोगों के सशक्तिकरण के लिए संगठित हों, ताकि लोग देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति को नई दिशा में ले जा सकें, जो सभी के अधिकारों और खुशहाली को सुनिश्चित करेगी।      

Tag:    प्रदर्शन और रैली    सशक्तिकरण    ऑफ ह्यूमन राइट्स    Aug 1-15 2017    Struggle for Rights    Communalism     Rights     2017   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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