ओमेक्स फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने अपनी आजीविका पर हमले का विरोध किया

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 01/08/2017 - 21:30

ओमेक्स, ऑटोमेक्स और स्पीडोमेक्स ये तीनों कारखाने मारुति-सुजुकी और होंडा कंपनियों को ऑटोपार्ट्स की अपूर्ति करते हैं। ये तीनों कारखाने एक ही मालिक के हैं, गुड़गांव में इनकी 6 यूनिटें हैं तथा पूरे देश में 10 यूनिटें काम करती हैं। पिछले 6 महीनों से ऑटोमेक्स फैक्ट्री के प्रबंधन ने गुड़गांव प्लांट से मशीनें हटाकर उनको बावल प्लांट में ले जाने का काम शुरू किया है। ऑटोमेक्स प्लांट में कई विभाग हैं।

Automax-workers 26 जून, 2017 को जब ऑटोमेक्स के 300 मज़दूर फैक्ट्री के गेट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि प्लांट के बंद किये जाने का नोटिस लगा हुआ है। कंपनी के मज़दूर जो कि पिछले 2 दशकों से इस फैक्ट्री में काम कर रहे थे, अचानक ही रातों-रात उनका रोज़गार छिन गया। फैक्ट्री के प्रबंधन ने मज़दूरों या उनकी यूनियन को कोई भी नोटिस नहीं दिया और बढ़ते पैमाने पर निष्क्रिय होते श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रबंधन ने फैक्ट्री को बंद कर दिया। जबकि फैक्ट्री को बंद करने का नोटिस लगाया गया है और सभी स्थायी मज़दूर फैक्ट्री के बाहर बैठे हैं, फैक्ट्री का रेलवे विभाग अब भी कार्य कर रहा है और उसको चलाने के लिए नए मज़दूरों को भर्ती किया गया है। इससे पहले मई के महीने में कंपनी ने 150 ठेका मज़दूरों को यह कहकर निकाल दिया था कि कंपनी के उत्पादों की मांग अब कम हो गयी है।

नोटिस देखकर सभी मज़दूर कंपनी के गेट पर इकट्ठा हुए और कंपनी बंद होने का विरोध करते हुए मांग करने लगे कि वे कंपनी बंद किये जाने के कानूनी दस्तावेज़ देखना चाहते हैं। इसके जवाब में प्रबंधन ने पुलिस को बुलाया, जिसने मज़दूरों पर हमला बोल दिया।

जब मशीनों को गुड़गांव प्लांट से निकालकर ओमेक्स के बावल प्लांट में ले जाया जा रहा है, तब बावल प्लांट में एक भी स्थायी मज़दूर नहीं है। फरवरी 2017 को ओमेक्स प्लांट के 389 अनुबंधित मज़दूरों को निकाल दिया गया था। इनमें से अधिकतर मज़दूर इस कंपनी में 15-20 वर्ष से काम कर रहे थे।

मशीनों के स्थानांतरण में पुलिस पूरी मदद कर रही है और कंपनी को सुरक्षा दे रही है। यह सारा काम स्थानीय एस.एच.ओ. की अगुवाई में किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग प्रबंधन की जेब में हैं और ऑटोमेक्स प्लांट के बंद किये जाने पर चुप्पी साधे हुए है।

इससे पहले 2010 में बनी अपनी यूनियन के बल पर मज़दूर अपने लिए कुछ सुविधायें और वेतन में बढ़ोतरी के लिए कुछ हद तक, अपनी मांगें मनवाने में सफल हुए थे। मज़दूर आज फिर अपनी यूनियन की अगुवाई में, अपने रोज़गार के अधिकार पर हमले के खिलाफ़ एकजुट हो रहे हैं और 26 जून से फैक्ट्री के गेट पर उनका धरना प्रदर्शन जारी है। पिछले 24 दिनों से रात-दिन उनका धरना प्रदर्शन चल रहा है।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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