हिन्दोस्तान-अमरीका-जापान का संयुक्त सैनिक अभ्यास :

Submitted by cgpiadmin on मंगल, 01/08/2017 - 16:30

अमरीका की साम्राज्यवादी रणनीति के साथ बढ़ती सांठ-गांठ!

हिन्दोस्तान, जापान और अमरीका ने 10 जुलाई को अपने 5-दिवसीय त्रिपक्षीय संयुक्त समुद्री मालाबार नौसेना अभ्यास का 21वां संस्करण बंगाल की खाड़ी में शुरू किया। इसमें नौसेना के 95 विमान, 16 जहाज और 2 पनडुब्बियों ने हिस्सा लिया, इसके अलावा दुनिया का सबसे बड़ा लड़़ाकू विमानपोत, अमरीका यू.एस.एस. निमित्ज भी इस अभ्यास में शामिल था। इस अभ्यास में समुद्री तट के अलावा समुद्र के अन्दर की सैनिक गतिविधियां भी शामिल थीं।

तटीय अभ्यास कार्यवाइयों में निम्नलिखित को शामिल करने की ख़बरें मिली हैं - युद्धपोतों द्वारा हमलों की सामूहिक कार्यवाई में पेशेवर आदान-प्रदान, समुद्री पहरेदारी और खोजी कार्यवाइयां, भूमि और पनडुब्बी-विनाशक युद्ध कार्यवाइयां, मेडिकल कार्यवाइयां, क्षति नियंत्रण कार्यवाइयां, विस्फोटक सामग्री का निपटारा करने की कार्यवाइयां तथा हेलिकॉप्टर कार्यवाइयां।

समुद्र में पनडुब्बियों की कार्यवाई से परिचित कराना, हवाई सुरक्षा कार्यवाही, मेडिकल निकासी अभ्यास, समुद्र के ऊपर जंग का अभ्यास, संचार अभ्यास तथा खोजी और बचाव कार्यवाइयां भी शामिल थीं।

इस अवसर पर जारी की गयी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ऐसा बताया गया है कि इस समुद्री अभ्यास का लक्ष्य “तीनों देशों के बीच सैनिक संबंधों को गहरा करना” और “हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना” है।

मालाबार अभ्यास जिसकी शुरुआत 1994 में हिन्दोस्तान और अमरीका की नौसेना के बीच द्विपक्षीय कार्यवाही के रूप में हुई थी, अब पूरी तरह से संस्थागत बना दिया गया है। धीरे-धीरे इसका प्रसार बढ़ता गया है और इस क्षेत्र के अन्य देश भी इसमें शामिल किये गए हैं। वर्ष 2007 में तीन अन्य देश - जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर, मालाबार अभ्यास में शामिल किये गए।

मालाबार अभ्यास और उसमें हिन्दोस्तान का शामिल होना, हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमरीकी साम्राज्यवादियों की रणनीति के हिस्से बतौर देखा जाना चाहिए, जिसमें पूरा एशिया और अफ्रीका के पूर्वी तट के देश आते हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद पूरे एशिया पर अपना निर्विरोध दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह एशिया के देशों और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ़ भ्रात्रीय युद्ध में फंसाने की कोशिश कर रहा है। अमरीकी साम्राज्यवाद हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्गों को चीन, पाकिस्तान और अन्य देशों के खिलाफ़ जंग के लिए भड़का रहा है। अमरीका के साथ सहयोग करते हुए अपने बाज़ार और प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने के नशे में चूर, हिन्दोस्तान के बड़े-बड़े इज़ारेदार सरमायदार अमरीका के साथ सैनिक सहयोग के खतरनाक रास्ते पर अंधा-धुंध आगे बढ़ रहे हैं और हमारे लोगों को एक तबाहकारी जंग में घसीटने की धमकी दे रहे हैं।

अमरीका चाहता है कि चीन की घेराबंदी करने की उसकी योजना में हिन्दोस्तान उसके साथ सक्रिय रूप से शामिल हो जाये। चीन को चुनौती देने के लिए वह हिन्दोस्तान को आधुनिक हथियार और सैनिक प्रशिक्षण देने की पेशकश कर रहा है। अमरीका की हथियार उत्पादन करने वाली सबसे बड़ी कंपनियां, हिन्दोस्तान के सबसे बड़े इज़ारेदारों के साथ मिलकर हिन्दोस्तान में आधुनिक हथियारों के उत्पादन के लिए सैनिक उद्योग परिसर बनाने की योजना बना रही हैं, बशर्ते हिन्दोस्तानी राज्य इन हथियारों को खरीदने की गारंटी दे। सबसे बड़े इज़ारेदार घराने जो हिन्दोस्तानी राज्य पर अपना नियंत्रण रखते हैं, अमरीका के सबसे बड़े हथियार उत्पादकों के सहयोग में सांझा कंपनियां बनाने लिए अपना पूरा जोर लगा रहे हैं।

मालाबार संयुक्त अभ्यास हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्ग और अमरीकी साम्राज्यवाद के बीच रणनैतिक सैनिक गठबंधन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में की जा रही कार्यवाही का हिस्सा है। हिन्दोस्तान-अमरीका सैनिक रणनैतिक गठबंधन, हिन्दोस्तान और एशिया के सभी देशों और लोगों की आज़ादी और संप्रभुता के खिलाफ़ है। यह एक बेहद खतरनाक गठबंधन है जो कि इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। हिन्दोस्तान के सभी देशभक्त और शांति पसंद लोगों को हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्गों की इन खतरनाक योजनाओं का ज़ोरदार तरीके से विरोध करना चाहिए।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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